गुजरात समेत पूरे देश में पहली बार मेडिकल स्टोर बंद…जानें क्या है वजह और क्या है इनकी मांगें?

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सूरत। ऑनलाइन दवा बिक्री सहित कई मुद्दों को लेकर बुधवार को देशभर के मेडिकल स्टोर संचालक हड़ताल पर चले गए हैं। देशव्यापी हड़ताल के तहत गुजरात के 35,000 से अधिक मेडिकल स्टोर बंद रखकर विरोध कर रहे हैं। हालांकि, इमरजेंसी के समय मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए एसोसिएशन द्वारा सभी जिलों और शहरों में विशेष व्यवस्था की गई है। फूड एंड ड्रग विभाग ने भी हड़ताल के बीच राज्य में खुले रहने वाले 832 मेडिकल स्टोर्स की सूची जारी की है, जहां से मरीजों को हड़ताल के दौरान भी दवाएं मिल सकेंगी। लोग सूची में अपने शहर का नाम देखकर खुले रहने वाले मेडिकल स्टोर्स की जानकारी ले सकते हैं। दरअसल, पिछले कई दिनों से मेडिकल स्टोर संचालक कई मुद्दों को लेकर सरकार से अपील कर रहे रहे थे, जब उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया। 
ऑल इंडिया के 12.40 लाख, गुजरात के 35 हजार और अहमदाबाद के करीब 3 हजार केमिस्ट एक दिन का बंद रखकर विरोध कर रहे हैं। कई बार प्रस्तुति देने के बावजूद सरकार द्वारा ऑनलाइन व्यापार करने वाले केमिस्टों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने से अब केमिस्ट एसोसिएशन आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गया है।

आइए जानते हैं…केमिस्ट और ड्रगिस्ट की मुख्य मांगें

  • ऑनलाइन दवाओं की बिक्री बंद की जाए।
  • कोरोना काल में ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए दी गई छूट वापस ली जाए।
  • कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट बंद किए जाएं।
  • गैरकानूनी ई-फार्मेसी पर प्रतिबंध लगाया जाए।
  • नशीली दवाओं की ऑनलाइन बिक्री बंद की जाए।

जरूरी दवाओं के लिए भटक रहे लोग, कहीं पिता परेशान तो कहीं बेटा

मेडिकल स्टोर्स बंद होने से लोग काफी परेशानी झेल रहे हैं। कहीं दवा के लिए पिता परेशान नजर आए तो कहीं बेटा। जरूरी दवाओं के लिए लोग भटकते नजर आए। अहमदाबाद में बेटे के ऑपरेशन के लिए दवा लेने निकले पिता बेबस नजर आए, जबकि सूरत में मां की हाई ब्लड प्रेशर की दवा नहीं मिलने पर एक बेटा 5 किलोमीटर घूमने के बाद भी तनाव में दिखाई दिया।

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कतारगाम स्थित सूरत दवा बाजार बंद

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में सूरत केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने बंद का ऐलान किया है, जिसके चलते सूरत शहर और जिले में दवा सप्लाई करने वाला कतारगाम स्थित ‘सूरत दवा बाजार’ पूरी तरह बंद दिखाई दिया। सभी व्यापारी इस हड़ताल में शामिल होने से दवा बाजार की गतिविधियां ठप हो गईं और पूरा परिसर सुनसान नजर आया।

यह विरोध ओर हड़ताल जनता की हित के लिए है

सूरत केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों की रोजी-रोटी छीन रही हैं। इसलिए कोरोना काल में ऑनलाइन होम डिलीवरी के लिए दी गई छूट को अब तुरंत बंद किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यह विरोध केवल व्यापारियों के हित के लिए नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा के लिए भी है।
राज्य में कहां कितनी दुकानें बदं…

मेहसाणा में 1500 से अधिक दवा दुकानें नहीं खुलीं

ऑनलाइन दवा बिक्री सहित विभिन्न लंबित मुद्दों के विरोध में मेडिकल एसोसिएशन द्वारा घोषित देशव्यापी बंद का असर मेहसाणा जिले में व्यापक रूप से देखने को मिला। जिले की होलसेल मार्केट के साथ-साथ सभी छोटी-बड़ी मेडिकल स्टोर्स पूरी तरह बंद रहीं। जिलेभर में लगभग 1500 से अधिक मेडिकल दुकानों के इस आंदोलन में शामिल होने से पूरे दवा बाजार में सख्त बंद का माहौल रहा। देशभर में ऑनलाइन फार्मेसी के कारण पारंपरिक दवा विक्रेताओं को हो रहे नुकसान और अन्य व्यावसायिक समस्याओं को लेकर यह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसका मेहसाणा में व्यापक और तीखा असर दिखाई दिया।

 

गांधीनगर में भी 1200 और शहर के 500 मेडिकल स्टोर्स बंद

गांधीनगर केमिस्ट एसोसिएशन के निर्देश पर गांधीनगर में भी छोटे-बड़े सभी मेडिकल स्टोर्स के शटर बंद दिखाई दिए। गांधीनगर शहर के अनुमानित 500 और पूरे जिले के कुल 1200 केमिस्ट इस सामूहिक हड़ताल में शामिल हुए हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री इसी तरह बेलगाम जारी रही तो पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स बंद होने की नौबत आ जाएगी। दूसरी ओर, इस अचानक हुई हड़ताल के कारण इमरजेंसी में मरीजों को दवाओं के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए एसोसिएशन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है। शहर में 5 प्रमुख मेडिकल स्टोर्स के अलावा अपोलो और प्लैनेट जैसी बड़ी फार्मेसी चेन को चालू रखा गया है, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है।

भरूच और नर्मदा जिले के 850 मेडिकल स्टोर बंद

भरूच-नर्मदा जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि ई-फार्मेसी कंपनियां बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री कर रही हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी अनियमितताओं के कारण युवाओं में नशे की लत बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से नकली दवाओं की बिक्री और फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के उपयोग जैसी गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। कोरोना काल के दौरान जारी विशेष नोटिफिकेशन का कुछ ई-फार्मेसी संचालकों द्वारा दुरुपयोग किए जाने का भी आरोप लगाया गया।

मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

गुजरात केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि आज देशभर में एक दिन का प्रतीकात्मक बंद रखा गया है। ऑनलाइन दवाओं का जो व्यापार हो रहा है, वह गैरकानूनी है और इसे बंद करने की मांग कई बार की जा चुकी है। लेकिन फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री बहुत व्यस्त हैं, इसलिए हमें मिलने का समय भी नहीं दिया जा रहा है। कोरोना काल में लोगों को बाहर न निकलना पड़े और दवाएं घर तक पहुंच सकें, इसलिए ऑनलाइन दवाओं की सुविधा शुरू की गई थी। लेकिन कोरोना खत्म हुए कई साल बीत जाने के बावजूद ऑनलाइन दवा व्यापार बंद नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भारी डिस्काउंट के कारण नकली दवाओं का कारोबार बढ़ रहा है। 150 करोड़ रुपये से अधिक की नकली दवाएं पकड़ी जा चुकी हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसलिए नकली दवाएं बनाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाया जाना चाहिए।

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