गुजरात में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स: तालुका पंचायत में अब सत्ता बचाने के लिए सदस्यों को भेजा गया राजस्थान

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स्थानीय स्वराज की चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रमुख और उपप्रमुख पद पर कब्जा जमाने के लिए राजनीतिक पार्टियों ने जोड़तोड़ शुरू कर दी है। वाव-थराद के दियोदर तालुका पंचायत में सत्ता बचाने और किसी बड़े उलटफेर या टूट-फूट को रोकने के लिए कांग्रेस ने आखिरी समय में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का सहारा लिया है।

चुनाव से पहले ही कांग्रेस अपने विजयी सदस्यों को बचाने के लिए किसी अज्ञात स्थान पर ले गई है, ऐसी चर्चा से सीमावर्ती इलाके की राजनीति में भारी गर्महाट आ गई है। अब बनासकांठा जिले की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दियोदर तालुका पंचायत के प्रमुख पद के चुनाव से पहले ही दल-बदल और हॉर्स ट्रेडिंग की राजनीति से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने सदस्यों को सुरक्षित रखने हेतु 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' का सहारा लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दियोदर तालुका पंचायत के प्रमुख और उपप्रमुख पद की आगामी चुनाव प्रक्रिया 25 तारीख को होनी है। उससे पहले ही राजनीतिक ड्रामा शुरू हो चुका है। दियोदर तालुका पंचायत में अपनी सत्ता बरकरार रखने और सदस्यों को टूटने से बचाने के लिए कांग्रेस ने सभी विजयी सदस्यों को अज्ञात स्थान पर भेजकर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू कर दी है।

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कांग्रेस इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। तालुका पंचायत के 12 सदस्यों के साथ-साथ जिला पंचायत के 3 सदस्यों को भी सुरक्षा और सावधानी के तहत राजस्थान भेज दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, ये सभी सदस्य अब किसी के संपर्क में नहीं हैं और वे 25 तारीख को प्रमुख और उपप्रमुख के चुनाव के समय ही सीधे बैठक में उपस्थित होंगे। भाजपा के स्थानीय नेता अपनी मजबूती और सत्ता हासिल करने के दावे कर रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस की यह रणनीति कितनी सफल होती है, यह 25 तारीख को ही पता चलेगा।

सूत्रों के अनुसार, 23 मई को चुनाव के दिन ही इन सभी सदस्यों को सीधे दियोदर में मतदान के लिए उपस्थित किया जाएगा। इतना ही नहीं, तालुका पंचायत के साथ-साथ जिला पंचायत के सदस्यों को भी किसी निजी स्थान पर शिफ्ट किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए चुनाव में दियोदर तालुका पंचायत की कुल 22 सीटों में से कांग्रेस ने 12 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि भाजपा को 10 सीटें मिली हैं। नियम के अनुसार कांग्रेस आसानी से अपनी सत्ता कायम रख सकती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर भाजपा द्वारा साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाकर सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगाने की चर्चा है। भाजपा की इस जोड़तोड़ की राजनीति से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने सभी 12 सदस्यों को सीमा पार राजस्थान के एक रिसॉर्ट में भेज दिया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस की रिसॉर्ट पॉलिटिक्स कितनी सफल साबित होती है।

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