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कमल कीचड़ में खिलता है लेकिन कीचड़ की गंदगी से दूर रहता है
(उत्कर्ष पटेल)
प्रकृति ने हमें कई चीज़ों के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाई है। उसमें सबसे अद्भुत उदाहरण कमल का है। कमल कीचड़ में उगता है और कीचड़ से ही पोषण प्राप्त करता है, लेकिन कीचड़ की गंदगी से दूर रहता है!! कमल कीचड़ से कोई दुश्मनी नहीं करता, लेकिन कीचड़ को खुद पर हावी भी नहीं होने देता। यह एक साधारण सी बात लगती है, लेकिन अगर हम इस दर्शन (दर्शनशास्त्र) को अपने जीवन में उतार लें, तो जीवन बहुत ही सुंदर और सार्थक बन सकता है। इस बात को हम व्यक्तिगत जीवन, परिवार और समाज सेवा के माध्यम से समझें तो जीवन की कई समस्याओं का समाधान मिल सकता है।
व्यक्तिगत जीवन में हम कई प्रकार की परिस्थितियों का सामना करते हैं। कभी हमारी अपनी गलतियाँ, तो कभी परिस्थितियों की प्रतिकूलता और कभी लोगों का नकारात्मक व्यवहार हमारे लिए कीचड़ के समान होता है। ऐसे समय में कमल की तरह हमें भी घबराहट और नफरत नहीं करनी चाहिए। नकारात्मकता को मन में स्थान न दें, बल्कि साथ ही यह भी ध्यान रखें कि हमारे विचार खराब न हों। यदि हम परिस्थितियों से घिरकर अपना व्यवहार बिगाड़ लेंगे, तो हम भी कीचड़ बन जाएँगे। इसलिए अपने विचारों को शुद्ध रखना और अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहना ही सच्ची समझदारी है। हमें अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना चाहिए और उनसे सीख लेनी चाहिए, लेकिन उन कमजोरियों को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

परिवार हमारे जीवन की नींव है। परिवार में सभी के स्वभाव में विविधता होती है। किसी का स्वभाव गर्म होता है तो किसी का ठंडा। कभी-कभी छोटी-छोटी बातों को लेकर अहंकार और मनमुटाव पैदा हो जाते हैं। ये स्थितियाँ कीचड़ जैसी ही हैं। यहाँ कमल का गुण यह है कि वह कीचड़ को पोषण मानता है। हमें भी परिवार की कमियों को स्वीकार करना चाहिए। परिवार के सदस्यों से दुश्मनी न करें, लेकिन साथ ही उनकी नकारात्मक या बुरी आदतों को खुद पर हावी न होने दें। परिवार में रहकर भी अपने संस्कारों और अनुशासन को बनाए रखना चाहिए। किसी की बुरी बातों में आकर अपना व्यक्तित्व न बिगाड़ें। प्यार से रिश्तों को जोड़े रखें और अपनी मर्यादा भी बनाए रखें। परिवार के क्लेश को अपनी प्रगति में बाधा रूपी कीचड़ न बनने दें, बल्कि उससे धैर्य और प्रेम का पोषण प्राप्त करें।
समाज सेवा सबसे बड़ा क्षेत्र है। समाज में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं। समाज सेवा करने निकलेंगे तो कई बाधाएँ आएँगी। लोग आप पर शक करेंगे, आपकी निंदा करेंगे और कभी-कभी आपकी भावनाओं का फायदा भी उठाएँगे। यह समाज का कीचड़ है। एक सच्चा समाज सेवक कभी समाज के साथ धोखा नहीं करता। वह समाज की कमियों को जानते हुए भी सेवा करता है। लेकिन साथ ही वह समाज की बुरी गतिविधियों जैसे भ्रष्टाचार, लालच या अन्याय को अपने अंदर प्रवेश नहीं करने देता। समाज सेवा के नाम पर कभी अपनी नैतिकता न बिगाड़ें। निर्मल और शुद्ध हृदय से सेवा करें। कीचड़ में रहकर सेवा करें, लेकिन कीचड़ से दूषित न हों। समाज की बुराइयों को देखकर निराश न हों, बल्कि समाज के भलाई के कामों में खुद को जोड़ दें।
जीवन एक तालाब है और हम सब उसमें खिलने वाले कमल हैं। हमारे आसपास कई तरह के कीचड़ होंगे—कभी व्यक्तिगत जीवन में, कभी परिवार में, तो कभी समाज में। हमें यह सीखना है कि विपरीत परिस्थितियों और संजोगों में फँसना नहीं है। नफरत मन को खोखला कर देती है, इसलिए सभी को सहज भाव से स्वीकार करें और साथ ही अपनी शुद्धता को बनाए रखें। कमल की तरह हम भी हर परिस्थिति में खिल सकते हैं, बस शर्त एक ही है कि कीचड़ को स्वीकार करना है, लेकिन कीचड़ बनना नहीं है।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाज सेवक और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

