प्रफुल पानसेरिया: विवादों से दूर, मुस्कुराते हुए सेवा के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति

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(उत्कर्ष पटेल)

गुजरात की राजनीति में कुछ नेता ऐसे हैं जिनका नाम सुनते ही विवाद, वाद-विवाद या राजनीतिक खींचतान याद आ जाती है। यहाँ प्रफुलभाई छगनभाई पानसेरिया एक ऐसे अपवाद स्वरूप व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन और कार्यकाल विवादों से दूर रहकर केवल सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ता रहा है। उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा और सरल व्यवहार मानो यह कहता है कि सत्ता सेवा का साधन है, प्रसिद्धि और घमंड का नहीं। आज गुजरात सरकार में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा विभाग के स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री के रूप में वे जो कार्य कर रहे हैं, वह उनकी इसी सहज प्रकृति का प्रतिबिंब है।

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प्रफुलभाई का जन्म 1 जून 1971 को अमरेली जिले के शेढावदर गाँव में हुआ था। मूल रूप से सौराष्ट्र के लेउवा पाटीदार समाज के एक किसान परिवार की संतान ने वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। इस शिक्षा ने उन्हें जीवन की गहरी समझ दी, लेकिन उनका असली निर्माण समाज सेवा करते हुए हुआ। 1900 के दशक से ही वे सामाजिक कार्यों से जुड़ गए। रक्तदान शिविर, जरूरतमंदों की मदद, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम... यह सब उन्होंने किसी संगठन, राजनीतिक जिम्मेदारी या पद का इंतजार किए बिना किया। उनके इन कार्यों के कारण उन्हें युवा सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में स्वीकृति मिली और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी उनके सात दिवसीय अखंड रक्तदान शिविर को दर्ज किया गया।

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राजनीति में उनका प्रवेश 2012 में हुआ, जब वे सूरत की कामरेज विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुने गए। 2022 के चुनाव में भी उन्हें जनमत मिला। विधायक के रूप में उन्होंने कामरेज को विकास का एक नया रूप दिया। सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए उन्होंने बेहतरीन काम किया। लेकिन उनकी खासियत यह रही कि वे कभी किसी विवाद में नहीं फंसे। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में भी उन्होंने विरोधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखा। कोविड-19 के कठिन समय में उनकी सेवाओं की विशेष प्रशंसा भी हुई। अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की मदद करने, दवा और टीकाकरण के काम में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।

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2022 में भूपेंद्रभाई पटेल की सरकार में उन्हें राज्य मंत्री के रूप में संसदीय कार्य, प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा का प्रभार सौंपा गया। शिक्षा विभाग में उन्होंने स्कूलों की स्वच्छता, गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। एक बार स्कूल के शौचालयों को गंदा देखकर उन्होंने खुद ही सफाई की! ये दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हुए और लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने बार-बार कहा कि युवाओं का विदेश जाकर सफल होना गर्व की बात नहीं बल्कि चिंता का विषय है; यहीं ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए कि वे यहीं रहकर देश की सेवा करें। उनके इन विचारों ने शिक्षा नीति को और अधिक व्यावहारिक बनाया।

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अक्टूबर 2025 में गुजरात सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा का स्वतंत्र प्रभार मिला। इस विभाग में उन्होंने खाद्य सुरक्षा, मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पोलियो टीकाकरण अभियान और अस्पतालों के नियमित निरीक्षण पर ध्यान केंद्रित किया है। एक मामले में पालीताना अस्पताल में अनियमितता देखकर उन्होंने तुरंत कार्रवाई की। फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया।

वे कहते हैं कि "मैं पहले कार्यकर्ता हूँ, मंत्री बाद में।" यह वाक्य उनकी विनम्रता की पहचान है। प्रफुलभाई की सेवा केवल सरकारी कार्यालय तक सीमित नहीं है। कामरेज के एक गाँव में पिता के निधन के बाद दो छोटी बच्चियों की मदद करते हुए उन्होंने घर बनाकर दिया, शिक्षा की व्यवस्था की और आर्थिक सहायता प्रदान की। ऐसे कई उदाहरण उनके जीवन में हैं।

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आज के समय में जब राजनीति अक्सर स्वार्थ और विवादों से भरी नजर आती है, तब प्रफुलभाई जैसे नेता याद दिलाते हैं कि सच्ची नेतागिरी वही है जो लोगों की समस्याओं को समझे, समाधान लाए, हंसते चेहरे के साथ काम करे और विवादों से दूर रहे। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है... शिक्षा प्राप्त करें, समाज सेवा करें और सत्ता को सेवा का साधन बनाएं। गुजरात के ऐसे नेता ही समाज को आगे ले जाएंगे।

(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

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