देश की सीमाओं पर मौजूद सैनिकों का ऋण हम कभी चुका नहीं सकते

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आज जब हम अपने घर में आराम से बैठकर चाय पीते हैं, तब कोई जवान हिमालय की बर्फीली चोटियों पर, लद्दाख की जमा देने वाली ठंड में या राजस्थान के रेगिस्तान की तपती रेत में तन-मन से खड़ा होता है। उसकी आँखों में नींद का एक अंश भी नहीं है, हाथ में हथियार है और हृदय में केवल एक ही संकल्प- 'भारत माता हमारी है और हम उसके हैं।' क्या यह ऋण हम कभी चुका सकते हैं?

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जब हम अपने परिवार के साथ दीवाली के दीये जलाते हैं, तब सीमा पर खड़ा जवान अपने बच्चे की तस्वीर हथेली में लेकर बैठा होता है। उसका छोटा बच्चा फोन पर पूछता है, 'बापूजी, कब आओगे?' और वह जवाब देता है, 'जल्दी आ जाऊंगा, बेटा।' लेकिन वह जानता है कि यह ‘जल्दी’ शायद कभी नहीं आएगा। उसकी पत्नी रात में अकेले बिस्तर पर आंसू बहाती होगी। उसकी माँ हर त्योहार पर मंदिर जाकर प्रार्थना करती होगी, 'भगवान, मेरे बेटे को सुरक्षित रखना।' उसके पिता बुढ़ापे में भी घर के दरवाज़े की ओर देखते हुए बैठे रहते होंगे… शायद आज कोई पत्र आए या फोन की घंटी बजे। और उसकी छोटी बहन स्कूल में गर्व से कहती है, 'मेरा भाई देश की रक्षा करता है।'

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भारतीय सेना के ये जवान केवल सैनिक नहीं हैं, वे पुत्र हैं, पति हैं, पिता हैं, भाई हैं। वे अपने जीवन के सुखद क्षणों का त्याग करके हमारे लिए सीमा पर खड़े हैं। जब हम अपने बच्चे को गोद में लेकर सुलाते हैं, तब वे बंकर में बैठकर दुश्मन की हर गतिविधि पर नज़र रखते हैं। जब हम सर्दियों में गर्म कंबल ओढ़ते हैं, तब वे केवल सरकारी जैकेट में बर्फ की चादर के बीच खड़े रहते हैं। और जब हम छोटी-छोटी परेशानियों से दुखी हो जाते हैं, तब वे मृत्यु का सामना करके मुस्कुराते हुए कहते हैं, 'जय हिंद!' 'भारत माता की जय!!'

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भारत माता के लिए शहीद होने वाले जवानों की बात करें तो दिल काँप उठता है। कितने ही युवा, जिनके होंठों पर अभी मुस्कान की कोमलता थी, जिनके सपने अभी पूरे भी नहीं हुए थे, वे एक ही पल में हमारे लिए अमर हो गए। उनके शहीद होने की खबर आते ही पूरे देश की आँखें नम हो जाती हैं, लेकिन उनके परिवार का दर्द? उसे सोचकर ही आत्मा काँप जाती है। उनकी विधवा पत्नी की आँखों में खालीपन, उनके बच्चे के हाथों में पिता की याद थामे रोती आँखें और उनके माता-पिता की बूढ़ी होती चाल… यह सब देखकर कौन कह सकता है कि हमने उनका ऋण चुका दिया?

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देशभक्ति क्या है? यह केवल झंडा लहराना नहीं है, या केवल ‘वंदे मातरम्’ गाना नहीं है। यह केवल नेताओं के मंच से कही जाने वाली बातें नहीं हैं, न ही वोट इकट्ठा करने की राजनीति है। देशभक्ति वह है, जहाँ अपने बच्चे को अकेला छोड़कर सीमा पर जाना, पत्नी के आँसुओं को अनदेखा कर कर्तव्य निभाना, माता-पिता की वृद्धावस्था को पीछे छोड़कर देश की रक्षा करना। यही सच्ची देशभक्ति है। यही भारतीय सेना के जवानों का जीवन है।

आज हम सुरक्षित हैं क्योंकि वे हमारे लिए जागते हैं। हम आराम से सोते हैं क्योंकि वे हमारे लिए जागते रहते हैं। हम हँसते हैं क्योंकि वे हमारे लिए शहीद होते हैं। यह ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। फिर भी हम कम से कम उन्हें नमन कर सकते हैं, उनके परिवार को सम्मान दे सकते हैं और हर पल याद रख सकते हैं कि हमारी आज़ादी और हमारा सुख देश के जवानों के खून से लिखा गया है।

भारतीय सेना कोसादर वंदन और देश के जवानों को परम आदर।

जय हिंद!

जय जवान!!

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