बिहार के मोतिहारी में स्थापति हुआ दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, 210 टन वजनी शिवलिंग को तराशने में लग गए 10 साल

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मोतिहारी। बिहार के मोतिहारी में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना हुई है। खास बात रही कि शिवलिंग की स्थापना के लिए कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, गंगा सागर, सोनपुर, रामेश्वरम से गंगा जल मंगाया गया। इसके साथ ही सिंधु, नर्मदा, नारायणी, कावेरी, गंडक नदी के जल से भी अभिषेक हुआ। शिवलिंग की स्थापना मोतिहारी के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में की गई है। वाराणसी और अयोध्या से आए पंडित मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद सहस्त्रालिंगम शिवलिंग की स्थापना हुई। वहीं, इतने बड़े शिवलिंग को स्थापित करने के लिए राजस्थान और भोपाल से दो क्रेन मंगाए गए थे। स्थापना से एक दिन पहले इन क्रेन की मदद से ट्रायल भी किया गया।

शिवलिंग की खासियत: यह शिवलिंग करीब 210 टन वजनी है। इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में कारीगरों ने 10 साल में तराशा। दरअसल, इसे काले ग्रेनाइट की एक विशाल पत्थर से बनाया गया है। इसके निर्माण में 3 करोड़ रुपये का खर्च आया। यह महाबलीपुरम से 2178 किमी की यात्रा करके करीब डेढ़ महीने बाद बिहार पहुंचा था।

अयोध्या, बनारस, गुजरात और हरिद्वार से भी पंडित पहुंचे पूजा कराने

इस पूजा के लिए महावीर मंदिर से करीब सात पंडित पहुंचे। इसके साथ ही अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात, हरिद्वार, महाराष्ट्र से भी पंडित आए। शनिवार सुबह 8 से करीब 11 बजे तक पूजा हुई। इसके बाद हवन और फिर शिवलिंग की स्थापना हुआ। सहस्त्रलिंगम की स्थापना के दौरान होने वाले भव्य यज्ञ में चारों वेदों के विद्वानों को आमंत्रित किया गया। 

शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए 18 फीट की माला तैयार की गई

शिवलिंग की स्थापना और पूजा के लिए कंबोडिया और कोलकाता से एक ट्रक फूल मंगवाया गया। इसमें गुलाब, गेंदा, गुलदाउदी के फूल शामिल हैं। शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए खास तरह की 18 फीट की माला तैयार की गई, जिसे फूल सहित भांग, धतूरा, बेलपत्र मिलाकर बनाया गया।

माघ कृष्ण चतुर्दशी यानी शिवलिंग की उत्पत्ति का दिन

शनिवार यानी 17 जनवरी को शिवलिंग की स्थापना के पीछे मूल वजह यह है कि यह माघ कृष्ण चतुर्दशी की तिथि है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और भगवान शिव की लिंग के रूप में पूजा हुई थी। इस दिन का महत्व शिवरात्रि के समान माना जाता है, इसलिए स्थापना के लिए यह दिन चुना गया है।

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