दीपावली पर माता लक्ष्मी के साथ ही भगवान गणेश और देवी सरस्वती की भी पूजा करें… ऐसा करना क्यों उत्तम है?

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सूरत। रोशनी और उजाले का पर्व दीपावली में अब केवल चार दिन रह गए हैं। 20 अक्टूबर को कार्तिक अमावस्या पर देवी लक्ष्मी की पूजा जाएगी। साथ ही जमकर आतिशबाजी की जाएगी। हालांकि अमावस्या 21 अक्टूबर तक रहेगी। लेकिन अमावस्या शाम तक ही रहेगी। इसलिए ज्योतिषियों का कहना है कि लक्ष्मी पूजन 20 अक्टूबर को उचित रहेगा। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या पर देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, इस वजह से इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। लक्ष्मी जी के साथ ही भगवान गणेश और देवी सरस्वती की भी पूजा होती है। इन तीनों देवी-देवताओं की तस्वीरें भी बहुत प्रचलित हैं। मां लक्ष्मी धन, समृद्धि और वैभव की देवी हैं। वे सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करती हैं। भगवान गणेश बुद्धि, विघ्नविनाशक और शुभारंभ के देवता माने जाते हैं। वे सभी कार्यों की शुरुआत में पूजे जाते हैं ताकि विघ्न न आए। वहीं, देवी सरस्वती ज्ञान, कला, संगीत और विद्या की देवी हैं।

तीनों देवी-देवताओं की पूजा करना यानी जीवन संतुलित होना

दीपावली के मौके पर तीनों देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। इसके पीछे खास कारण है। इन तीनों देवी-देवताओं की पूजा एक साथ करने का अर्थ है कि जीवन में धन, बुद्धि और ज्ञान का तालमेल जरूरी है। धन (महालक्ष्मी) कमाने और उसका सही उपयोग करने के लिए बुद्धि (गणेश) और ज्ञान (सरस्वती) आवश्यक है। इन तीनों का सही संतुलन ही जीवन में सुख-समृद्धि पाने का मूलमंत्र है।

भगवान विष्णु के साथ भी कर सकते हैं मां लक्ष्मी की पूजा

दीपावली के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है। माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं। शास्त्रों में यह कहा गया है कि जो भक्त लक्ष्मी जी के साथ विष्णु जी की भी पूजा करता है, उसे लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। बता दें कि विष्णु पुराण में विष्णु और लक्ष्मी के संयुक्त पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। इनका संयुक्त पूजन जीवन में धन, ज्ञान, बुद्धि और पुरुषार्थ की प्राप्ति का साधन है।

ज्ञान और विवेक से ही हम धन का संतुलन बनाकर रख सकते हैं

धन का संतुलन बनाकर रखना जरूरी है। यह ज्ञान और विवेक से ही संभव है। दरअसल, ज्ञान और विवेक से ही हम धन का सही संतुलन बनाकर रख सकते हैं। इसलिए मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा करना उत्तम होता है। धन का सही नियोजन और विवेक बुद्धि से ही होता है, जो गणेश का रूप है। वहीं ज्ञान से ही हम सही निर्णय लेते हैं और जीवन के उच्चतर लक्ष्य प्राप्त करते हैं, जो सरस्वती का रूप है। इसलिए महालक्ष्मी की पूजा में गणेश और सरस्वती को भी शामिल करना चाहिए। दरअसल, जीवन में धन का महत्व तभी बढ़ता है जब उसका सही प्रयोग किया जाए।

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