मुरुदेश्वर महादेव मंदिर: रामायण काल का वो शिवलिंग जो तीन ओर से घिरा है समुद्र से

Khabarchhe  Picture
On

अरब सागर के तट पर मुरुदेश्वर महादेव मंदिर एक अद्वितीय आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम प्रस्तुत करता है। भारत के दक्षिणी भाग में स्थित कर्नाटक राज्य के उत्तर कन्नड़ जिले की भटकल तहसील में इस प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है, जब लंकापति रावण भगवान शिव को प्रसन्न कर उनसे अमर होने का वरदान पाने के लिए तपस्या कर रहा था।

murudeshwar1
amarujala.com

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे एक दिव्य शिवलिंग प्रदान किया। शिवजी ने रावण को आगाह किया था कि वह इस शिवलिंग को सीधे लंका ले जाकर ही स्थापित करे, क्योंकि जिस स्थान पर भी इसे धरती पर रखा जाएगा, यह वहीं स्थापित हो जाएगा। रावण शिवलिंग को लेकर लंका की ओर चला, लेकिन देवता नहीं चाहते थे कि रावण अमर हो, इसलिए भगवान विष्णु ने एक योजना बनाई। उन्होंने रावण को रास्ते में ही शिवलिंग रखने पर विवश कर दिया। जिस स्थान पर शिवलिंग रखा गया, वह आज बैजनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से विख्यात है। इस बारे में जब रावण को विष्णु का छल समझ आया और वह क्रोधित होकर शिवलिंग को नष्ट करने का प्रयास कर रहा था, तब उस लिंग पर ढंका हुआ एक दिव्य वस्त्र उड़कर वर्तमान मुरुदेश्वर क्षेत्र में आ गिरा। इसी दिव्य वस्त्र के कारण इस क्षेत्र को तीर्थ क्षेत्र माना जाने लगा और यहीं मुरुदेश्वर मंदिर की स्थापना हुई।

murudeshwar
amarujala.com

मुरुदेश्वर मंदिर परिसर में भगवान शिव की एक विशाल और भव्य मूर्ति स्थापित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 123 फीट है। यह मूर्ति दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची शिव प्रतिमा मानी जाती है, और इसे इस प्रकार से निर्मित किया गया है कि दिनभर सूर्य की किरणें इस पर पड़ती रहती हैं, जिससे यह सदैव चमकती रहती है।

यह मंदिर एक पहाड़ी पर निर्मित है। यह मंदिर अरब सागर से घिरा हुआ है। मुरुदेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, आध्यात्मिकता और प्रकृति का एक ऐसा अनूठा मिश्रण है, जो हर आने वाले को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है। मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित दो हाथियों की विशाल मूर्तियां आगंतुकों का स्वागत करती हैं, जो इस पवित्र स्थल की भव्यता में चार चांद लगा देती हैं। 

About The Author

Khabarchhe  Picture

Lorem Ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry. Lorem Ipsum has been the industry's standard dummy text ever since the 1500s, when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries, but also the leap into electronic typesetting, remaining essentially unchanged. It was popularised in the 1960s with the release of Letraset sheets containing Lorem Ipsum passages, and more recently with desktop publishing software like Aldus PageMaker including versions of Lorem Ipsum.

More News

आखिर गढ़ड़ा में ऐसा क्या हुआ?  पुलिस के धड़ाधड़ दस्ते उतरे, कर्फ्यू जैसा माहौल

Top News

आखिर गढ़ड़ा में ऐसा क्या हुआ? पुलिस के धड़ाधड़ दस्ते उतरे, कर्फ्यू जैसा माहौल

बोटाद जिले के तीर्थधाम गढ़ड़ा शहर में पशु को मारने जैसी सामान्य बात के कारण स्थिति बिगड़ गई है। शहर...
राष्ट्रीय  
आखिर गढ़ड़ा में ऐसा क्या हुआ?  पुलिस के धड़ाधड़ दस्ते उतरे, कर्फ्यू जैसा माहौल

कन्या मेहंदी लगाकर दूल्हे का इंतज़ार कर रही थी, प्रेमी दूल्हा बारात लेकर आया ही नहीं, परिवार घर पर ताला लगाकर भाग गया

मेहंदी से सजे हाथ, दुल्हन का श्रृंगार, लाइटों से सजा हुआ घर और बारात के स्वागत के लिए दरवाज़े पर...
कन्या मेहंदी लगाकर दूल्हे का इंतज़ार कर रही थी, प्रेमी दूल्हा बारात लेकर आया ही नहीं, परिवार घर पर ताला लगाकर भाग गया

युद्ध का साया चारधाम यात्रा पर भी दिख रहा, श्रद्धालुओं में उत्साह कम, रजिस्ट्रेशन कम होने से पर्यटन करोबार पर पड़ेगा असर

देहरादून। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब चारधाम यात्रा पर भी दिखने लगा है। चारधाम...
धर्म ज्योतिष 
युद्ध का साया चारधाम यात्रा पर भी दिख रहा, श्रद्धालुओं में उत्साह कम, रजिस्ट्रेशन कम होने से पर्यटन करोबार पर पड़ेगा असर

जैसे मानसून खत्म होते ही मेंढक गायब हो जाते हैं, वैसे ही चुनाव खत्म होते ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता भी गायब हो जाते हैंः जगदीश विश्वकर्मा

गुजरात भाजपा के अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने हाल ही में गुजरात के विपक्षी दलों पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने...
जैसे मानसून खत्म होते ही मेंढक गायब हो जाते हैं, वैसे ही चुनाव खत्म होते ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता भी गायब हो जाते हैंः जगदीश विश्वकर्मा

बिजनेस

Copyright (c) Khabarchhe All Rights Reserved.