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मोदीजी! आपके चुने हुए वलसाड के उच्च शिक्षित युवा सांसद धवल पटेल भी दिखावे में पड़ गए!
हम अभी देख रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ Gen-Z ने आंदोलन किया। सरकार ने उनकी मांगें सुनीं। PM नरेंद्र मोदी खुद अब उनसे जुड़ने के प्रयास कर रहे हैं। लेकिन क्या PM मोदी ने जिन युवा नेताओं को युवा समझकर, अनुभव न होने के बावजूद मौका दिया, वे Gen-Z को स्वीकार्य लगे ऐसा व्यवहार करते हैं?
वलसाड-डांग के युवा सांसद सूरत में रहते हैं। उनकी गाड़ी सूरत की सड़कों पर घूम रही थी। एक पाठक ने हमें उसकी तस्वीर भेजी। पाठक शायद उन्हें पहचानता नहीं था। लेकिन उसका सवाल था कि क्या कोई सांसद अपनी निजी गाड़ी के पीछे इतने बड़े अक्षरों में दो-दो बार 'Member of Parliament' और 'सांसद आहवा डांग' लिखवा सकता है? पाठक का दूसरा सवाल था कि उन्हें ऐसा लिखवाने की क्या जरूरत है? ऐसा लिखवाकर वे किसे और क्या संदेश देना चाहते हैं?
वैसे तो यह सामान्य बात है। Gen-Z के आंदोलन से पहले ऐसे सवाल कोई नहीं पूछता था। लेकिन अब पूछे जाने लगे हैं। पाठक के सवालों के दो पहलू हैं।
एक पहलू यह है कि क्या कानूनी रूप से ऐसा लिखवाया जा सकता है। दूसरा पहलू यह है कि इसकी जरूरत ही क्या है। इसलिए हमने इसका जवाब तलाशना शुरू किया। इंटरनेट पर खोज की। मोटर व्हीकल एक्ट की धाराएं देखीं।

कानूनी रूप से हमें यह पता चला कि गुजरात का कानून कहता है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 111 के अनुसार किसी भी सांसद को अपनी निजी कार पर इस तरह का कोई भी लेखन करवाने की अनुमति नहीं है। प्रशासन इस संबंध में उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। यदि उन्होंने अनुमति लेकर ऐसा किया हो तो वे ऐसा कर सकते हैं। पाठक का दावा था कि उनकी कार के शीशे भी काले थे। यदि ऐसा है तो वे कार के शीशे काले नहीं रख सकते।
शायद आपको यह बात छोटी लगे, लेकिन सांसद धवल पटेल के लिए यह छोटी बात नहीं होनी चाहिए। इसके पीछे निश्चित कारण और तर्क हैं।
धवल पटेल युवा सांसद हैं। कहा जाता है कि उनका चयन सीधे PM नरेंद्र मोदी द्वारा एक विशेष उद्देश्य के साथ किया गया था। उनके चयन का कारण उनकी शिक्षा और करियर था। उन्हें मात्र 37 वर्ष की उम्र में सांसद बनने का अवसर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे वर्ष 2021 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और वर्ष 2024 में सांसद बनने का अवसर मिला। राजनीति में इतनी तेजी से किसी को मौका नहीं मिलता, इसलिए उन पर जिम्मेदारी भी बड़ी है। उन्हें भाजपा की अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनना है।
धवल पटेल ने सूरत स्थित देश के प्रतिष्ठित सरदार वल्लभभाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक किया है। इस संस्थान में प्रवेश पाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। बहुत कम लोगों को प्रवेश मिलता है। धवल पटेल इतने बड़े संस्थान से इंजीनियर बने हैं। इसके बाद उन्होंने प्रबंधन की पढ़ाई भी देश के अग्रणी माने जाने वाले सिम्बायोसिस कॉलेज से एमबीए करके पूरी की। इस तरह बीटेक और एमबीए करने के बाद उन्होंने IBM, Accenture Strategy और Capgemini जैसी दुनिया की प्रसिद्ध बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी काम किया है। संपत्ति की बात करें तो उन्होंने 6.78 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। संसद में उनकी उपस्थिति भी लगभग 93 प्रतिशत दर्ज की गई है। समय-समय पर वे स्थानीय मुद्दों के लिए भी मेहनत करते हैं। कुल मिलाकर धवल पटेल के नाम कोई विवाद नहीं है। उनकी प्रोफाइल एक युवा नेता के अनुरूप है।

लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि इतनी अच्छी प्रोफाइल होने के बावजूद एक युवा नेता को ऐसा क्यों करना पड़ता है? क्या वे भी दूसरे नेताओं जैसे ही हो गए हैं या हो जाएंगे? क्या उनकी पढ़ाई-लिखाई से कोई फर्क नहीं पड़ता? वे भी दूसरे अशिक्षित और अनजान नेताओं की तरह कैसे व्यवहार कर सकते हैं? सबसे बड़ा सवाल तो पाठक ने यही किया कि उन्हें ऐसा करने की जरूरत ही क्या है। कार पर बड़े अक्षरों में "सांसद" लिखवाकर वे क्या साबित करना चाहते हैं? क्या वे यह दिखाना चाहते हैं कि मैं तुमसे अलग हूं? मैं तुमसे ज्यादा शक्तिशाली हूं? अगर ऐसा लिखा होगा तो कोई पुलिसवाला मुझे नहीं रोकेगा? मुझे कहीं भी पार्किंग करने की छूट मिल जाएगी? यदि सांसद इन सभी कारणों से अपनी कार पर ऐसा लिखवाते हैं, तो शायद उनके चयन में PM मोदी से चूक हुई है। उनके जैसे शिक्षित व्यक्ति से ऐसी उम्मीद PM मोदी को तो नहीं ही होगी, लेकिन एक सामान्य मतदाता भी शायद इस बात को पसंद नहीं करेगा। शायद पहले सवाल नहीं पूछे जाते थे। लेकिन अब पूछे जाने लगे हैं।

