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प्रशांत किशोर विदेश में लाखो डॉलर की नौकरी छोड़ कैसे बने भारत के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकार?
प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका और जन सुराज पार्टी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के बीच लोग उनके जीवन, शिक्षा और करियर के बारे में जानना चाहते हैं। कभी संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ रहे प्रशांत किशोर आज देश के सबसे चर्चित राजनीतिक रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।
बिहार से शुरू हुई पढ़ाई की यात्रा
प्रशांत किशोर का जन्म बिहार में हुआ और उनकी शुरुआती शिक्षा भी यहीं हुई। उन्होंने बक्सर के सरकारी स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की, जबकि इंटरमीडिएट की शिक्षा पटना साइंस कॉलेज से हासिल की। पढ़ाई के दौरान वे विशेष रूप से गणित में बेहद मेधावी छात्र माने जाते थे। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) के क्षेत्र में अपना करियर बनाया।
इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से 'बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन' (BBA) की डिग्री हासिल की। आगे चलकर उन्होंने हैदराबाद स्थित 'एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया' (ASCI) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (MHM) का डिप्लोमा/स्नातकोत्तर प्रबंधन कार्यक्रम पूरा किया
अमेरिका और अफ्रीका में किया महत्वपूर्ण काम
इंजीनियरिंग के बाद प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में काम शुरू किया। वे संयुक्त राष्ट्र (UN) से वित्तपोषित कार्यक्रमों से जुड़े और करीब आठ वर्षों तक अफ्रीका के कई देशों में स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से संबंधित परियोजनाओं पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य, कुपोषण और सामाजिक नीतियों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनका कार्यक्षेत्र अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से भी जुड़ा रहा, जहां विकास और स्वास्थ्य नीतियों पर काम करने का अनुभव मिला।
एक रिपोर्ट ने बदल दी जिंदगी
बताया जाता है कि भारत में कुपोषण और आर्थिक विकास से जुड़ी उनकी एक रिपोर्ट ने तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद दोनों की मुलाकात हुई और यहीं से प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर की शुरुआत मानी जाती है। वर्ष 2011 में उन्होंने चुनावी रणनीति के क्षेत्र में कदम रखा और नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान से जुड़ गए।
देश के बड़े चुनावी रणनीतिकार बने
प्रशांत किशोर ने बाद में कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार की। उन्होंने विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में कई दलों के साथ काम किया। चुनावी प्रबंधन, डेटा विश्लेषण, जनसंपर्क अभियान और बूथ स्तर की रणनीति तैयार करने में उनकी टीम की अहम भूमिका मानी जाती रही है। इसी वजह से उन्हें भारतीय राजनीति का सबसे प्रभावशाली चुनावी रणनीतिकार भी कहा जाता है।

रणनीतिकार से नेता बनने तक का सफर
लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति बनाने के बाद प्रशांत किशोर ने सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया। उन्होंने जन सुराज अभियान की शुरुआत की, जिसे बाद में राजनीतिक दल का रूप दिया गया। अब वे सीधे जनता के बीच जाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है और बांकीपुर उपचुनाव को उनके राजनीतिक करियर की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
क्यों चर्चा में हैं प्रशांत किशोर?
बांकीपुर उपचुनाव में उनकी दावेदारी और जन सुराज की बढ़ती सक्रियता ने एक बार फिर प्रशांत किशोर को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। वर्षों तक दूसरों को चुनाव जिताने की रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर अब खुद जनता के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।

