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बारिश का रेड अलर्ट! आज सुरेंद्रनगर, अहमदाबाद समेत 6 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
गुजरात में बादल फिर जमकर बरस रहे हैं, आज मेघराजा सुरेंद्रनगर पर मेहरबान हैं। आज सुबह 6 से 10 बजे तक 187 तालुकों में बारिश हुई है, जिसमें सबसे अधिक सुरेंद्रनगर के लखतर में 4.33 इंच बारिश से भारी तबाही मची है। जहां देखो वहां सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है।
सुरेंद्रनगर के लखतर में एक ओर उमई नदी का पानी और दूसरी ओर रेलवे अंडरब्रिज जलमग्न हो जाने से लीलापुर गांव का संपर्क टूट गया है। सुरेंद्रनगर जिले के लखतर स्थित लीलापुर गांव के पास बहने वाली उमई नदी का तटबंध टूटने से बाढ़ का पानी गांव के भरवाड़वास इलाके में फैल गया। घरों में पानी घुस जाने से स्थानीय लोगों का घरेलू सामान भीग गया और भारी नुकसान हुआ है। वहीं, लीलापुर गांव मुख्य मार्ग पर होने के कारण सड़क बंद हो गई है, जिससे आगे स्थित कारेला, इंगरोली और सवलाणा समेत कई गांवों का तालुका मुख्यालय लिखतर से सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है। उधर, अहमदाबाद में भी सुबह से काले घने बादलों के बीच कल से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। अहमदाबाद के अलावा मोरबी, राजकोट, भावनगर, बोटाद और सुरेंद्रनगर में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।
सुरेंद्रनगर जिले में जारी रेड अलर्ट के बीच लगातार बारिश के कारण वांसल डैम अपनी पूर्ण जलभराव क्षमता तक पहुंचकर ओवरफ्लो हो गया है। इसके चलते निचले इलाकों के चूडा और गोखरवाला गांव के लोगों को नदी के किनारे से दूर रहने और पशुधन को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की चेतावनी दी गई है। दूसरी ओर, लगातार पानी की आवक के कारण मूली तालुका का नायका डैम भी 90% भर गया है और कभी भी उसके गेट खोलकर पानी छोड़ा जा सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए गौतमगढ़, कुकड़ा, गोदावरी और शेखपर गांव के लोगों को प्रशासन ने विशेष सतर्क रहने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के निर्देश दिए हैं।

सूरत शहर में कुछ समय के विराम के बाद बारिश ने एक बार फिर जोरदार पारी शुरू कर दी है। इससे पहले लगातार बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया था, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। हालांकि, बारिश रुकने पर पानी उतर गया और लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन अब फिर से मूसलाधार बारिश शुरू होने से सड़कों पर पानी भरना शुरू हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों में फिर जलभराव की चिंता बढ़ गई है।
सूरत शहर की स्थानीय खाड़ियों में पानी की भारी आवक शुरू हो गई है। इसके चलते हर मानसून में बाढ़ से प्रभावित होने वाले सनिया हेमद (सनिया अहमद) गांव में एक बार फिर पानी भरना शुरू हो गया है। पिछली बाढ़ के दौरान इस गांव में 10 से 15 फुट तक पानी भर गया था, जिससे भारी तबाही हुई थी। फिलहाल फिर से सड़कों पर पानी आने से ग्रामीणों में डर और चिंता का माहौल है तथा वे प्रार्थना कर रहे हैं कि गांव में दोबारा बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति न बने।
दक्षिण गुजरात और ऊपरी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण सूरत की जीवनरेखा माने जाने वाले उकाई डैम का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सुबह 10:00 बजे के आंकड़ों के अनुसार उकाई डैम में 3,46,200 क्यूसेक पानी की भारी आवक हो रही है, जिससे डैम का जलस्तर 320.82 फुट तक पहुंच गया है (खतरे का स्तर: 345 फुट)। दूसरी ओर, रांदेर स्थित वियर-कम-कॉजवे का जलस्तर खतरे के 6 मीटर के निशान को पार कर 7.90 मीटर तक पहुंच गया है, जिससे कॉजवे पूरी तरह ओवरफ्लो हो गया है। कॉजवे से तापी नदी में 1,11,223 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण तापी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है और दोनों किनारों से बह रही है।

वलसाड में औरंगा नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के बाद अब बाढ़ का पानी उतरने पर शहर और भगड़ा खुर्द को जोड़ने वाले पिचिंग क्षेत्र सहित निचले इलाकों में तबाही के दृश्य सामने आए हैं। नदी किनारे स्थित डंपिंग साइट का कचरा और कीचड़ बाढ़ के पानी के साथ बहकर सड़कों और मकानों तक फैल गया है, जिससे गंदगी फैल गई है। स्थिति को सामान्य करने के लिए वलसाड नगर पालिका के कार्यकारी अध्यक्ष अशिष देसाई के अनुसार 3-4 विशेष टीमें बनाकर स्लम क्षेत्र और दाणा बाजार सहित कई इलाकों में युद्धस्तर पर सफाई अभियान शुरू किया गया है। बीमारी न फैले, इसके लिए स्थानीय लोग भी जल्द से जल्द कीचड़ और कचरा हटाने की मांग कर रहे हैं।
नवसारी शहर में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच शांतादेवी रोड क्षेत्र में 10 से 12 फुट तक पानी भर जाने से एक बीमार व्यक्ति फंस गया था। सूचना मिलते ही नवसारी फायर ब्रिगेड के जवानों ने तुरंत नाव के जरिए बाढ़ के पानी में उतरकर मरीज का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। मरीज को सुरक्षित रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकालकर तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
भरूच जिले में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण कई तालुकों में बारिश का पानी भर जाने से संपर्क टूट गया है। वहीं, भरूच शहर के वार्ड नंबर 2 स्थित कौसरपार्क सोसायटी में घुटनों तक पानी भर जाने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भारी बारिश के कारण नडियाद में सड़कों पर पानी भर गया है। बोटाद जिले के गढ़डा शहर और तालुका के लिए संजीवनी समान रमाघाट डैम इस मानसून सीजन में पहली बार अपनी पूर्ण जलभराव क्षमता तक पहुंचकर ओवरफ्लो हो गया है। डैम के ओवरफ्लो होने से मनमोहक दृश्य देखने को मिल रहे हैं। इस डैम के छलकने से गढ़डा, मांडवधार, अडताला, लाखणका, तताणा और पीपळ सहित आसपास के लगभग 15 गांवों को पीने और सिंचाई के पानी का सीधा लाभ मिलेगा। डैम के ओवरफ्लो होने की खबर मिलते ही किसानों और शहरवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में लोग सुंदर नजारे देखने के लिए डैम पर पहुंचने लगे।
बोटाद जिले के राणपुर तालुका में लगातार हो रही बारिश के कारण नीलका नदी में पानी की आवक काफी बढ़ गई है। इसके चलते सुंदरियाणा गांव का कॉजवे पानी में डूब गया है। सुरक्षा और एहतियात के तौर पर प्रशासन ने इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी है। कॉजवे बंद होने से रास्ता अवरुद्ध हो गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजकोट शहर में केवल दो इंच बारिश होने पर ही शहर के पोपटपरा क्षेत्र स्थित अंडरपास में पानी भरना शुरू हो गया है। पानी भरते ही एहतियात के तौर पर प्रशासन ने अंडरपास बंद कर दिया है और वहां पुलिस तथा नगर निगम के कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है।
दोनों ओर से अंडरपास बंद कर दिए जाने के कारण रेलनगर, पोपटपरा, रिफ्यूजी कॉलोनी और रूखड़ियापरा क्षेत्र के लगभग 50,000 लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और उन्हें एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। यह इस क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्या है और केवल एक से दो इंच बारिश में ही अंडरपास में पानी भर जाने से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

