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गुजरात सरकार का बड़ा कदम, साइबर फ्रॉड की 1930 पर शिकायत मिलते ही दर्ज हो जाएगी ई-जीरो एफआईआर; कितना मददगार होगा यह?
गांधीनगर। गुजरात सरकार ने साइबर फ्रॉड जैसे मामलों से तुरंत निपटने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत 'साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड ई-जीरो एफआईआर सेवा शुरू की है। इस नई व्यवस्था के अनुसार अब साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज होते ही सिस्टम स्वतः ई-जीरो एफआईआर तैयार करेगा और उसे संबंधित पुलिस थाने को भेज देगा, जिससे जांच तुरंत शुरू हो सकेगी।
इस सेवा का शुभारंभ गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने गांधीनगर में किया। यह व्यवस्था केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के सहयोग से विकसित की गई है। इसका उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों में शुरुआती देरी को खत्म करना और पीड़ित को वित्तीय नुकसान से बचाना है। हर्ष सांघवी ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक के माध्यम से पुलिस व्यवस्था को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था से लोग अपने घर से ही शिकायत दर्ज करा सकेंगे और समय पर कार्रवाई होने से ठगी गई राशि को फ्रीज या वापस दिलाने की संभावना भी बढ़ेगी।
किस तरह काम करेगी नई व्यवस्था
नई प्रणाली के तहत यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, कार्ड पेमेंट, डिजिटल अरेस्ट, निवेश, ओटीपी या अन्य माध्यम से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो वह तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत दर्ज होते ही सिस्टम स्वतः एक ई-जीरो एफआईआर तैयार करेगा। इसके बाद यह एफआईआर संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेज दी जाएगी। इसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारी शिकायतकर्ता से संपर्क करेंगे। आवश्यक जानकारी और दस्तावेज प्राप्त कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद बिना समय गंवाए जांच शुरू कर देंगे। इससे शिकायत दर्ज होने और एफआईआर लिखे जाने के बीच लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
पुलिस अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
गुजरात के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लिया जाए। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। वहीं, साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख एवं पुलिस महानिरीक्षक बिपिन आहिरे ने बताया कि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस तुरंत आवश्यक कार्रवाई शुरू करेगी, जिससे साइबर अपराधियों तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलेगी।
ई-जीरो एफआईआर के पहले ही मामले में बचाए 15.76 लाख रुपये
नई व्यवस्था का पहला लाभ अहमदाबाद के एक निवासी को मिला। वह 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर साइबर ठगी का शिकार हुआ था। उसकी शिकायत के आधार पर राज्य की पहली ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गई। साइबर अपराध विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 15.76 लाख रुपये से अधिक की राशि बचाने में सफलता हासिल की। यह मामला इस नई व्यवस्था की उपयोगिता का पहला उदाहरण माना जा रहा है।
क्या है ई-जीरो एफआईआर?
ई-जीरो एफआईआर ऐसी एफआईआर होती है जिसे किसी भी क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना दर्ज किया जा सकता है। बाद में इसे संबंधित पुलिस थाने को भेज दिया जाता है। ई-जीरो एफआईआर इसी प्रक्रिया का डिजिटल रूप है, जिसमें शिकायत मिलने के बाद एफआईआर स्वतः इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दर्ज होकर संबंधित पुलिस थाने तक पहुंच जाती है। इससे कार्रवाई शुरू करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है और साइबर ठगी के मामलों में रकम फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है।
देश के कई राज्यों में लागू हो चुकी है सुविधा
ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था सबसे पहले दिल्ली में पायलट परियोजना के रूप में शुरू की गई थी। इसके बाद हरियाणा, ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, असम, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, राजस्थान और अब गुजरात में भी इसे लागू किया गया है। केंद्र सरकार का लक्ष्य इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू करना है, ताकि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज हो सके और पीड़ितों की राशि बचाने की संभावना बढ़े।
इस पहल का यह है मूल उद्देश्य
देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि शिकायत तुरंत दर्ज हो जाए और बैंक खातों को समय रहते फ्रीज कर दिया जाए तो ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा बचाया जा सकता है। गुजरात सरकार की यह नई पहल इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर शुरू की गई है, ताकि पीड़ितों को जल्द राहत मिल सके और साइबर अपराधियों के खिलाफ तेज कार्रवाई सुनिश्चित हो।

