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बदल रहा है हमारा भारत… देश में पांच साल में चार गुना बढ़ गए अरबपति, अब 576 लोग अमीर; सरकार यह कैसे पता करती है?
अति-उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या बढ़ी, लेकिन संपत्ति का रिकॉर्ड नहीं रखती सरकार
नई दिल्ली। टैक्स के मोर्चे पर देश के लिए एक अच्छी खबर आई है। दरअसल, अति-उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इससे यह पता चलता है कि देश में लोग टैक्स भरने के मामले में ज्यादा जागरूक हुए हैं। देश की प्रगति और उन्नति के लिए यह जरूरी है। संसद में सरकार ने बताया कि असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए दाखिल आयकर रिटर्न यानी आईटीआर में 576 व्यक्तियों ने अपनी ग्रॉस टोटल इनकम 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक घोषित की है। पांच वर्ष पहले यानी वित्तीय वर्ष 2021-22 में ऐसे करदाताओं की संख्या केवल 142 थी। इस तरह देखा जाए तो इस श्रेणी में आने वाले लोगों की संख्या लगभग चार गुना हो गई है। यह देश की मजबूत आर्थिक स्थिति के लिए जरूरी है।
बता दें कि लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 2025 तथा पूर्ववर्ती आयकर अधिनियम, 1961 में अरबपति शब्द की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। इसलिए सरकार करदाताओं को अरबपति की श्रेणी में वर्गीकृत नहीं करती, बल्कि आयकर रिटर्न में घोषित आय के आधार पर ही आंकड़े उपलब्ध हैं। सरकार के अनुसार, 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक आय घोषित करने वालों की संख्या में हर वर्ष उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह संख्या 301 रही, जो 2023-24 में घटकर 284 हो गई। इसके बाद वित्तीय 2024-25 में यह बढ़कर 415 और 2025-26 में 576 तक पहुंच गई। यानी पिछले एक वर्ष में ही इस श्रेणी में 161 नए करदाता जुड़े हैं।
क्या सरकार के पास अरबपतियों की संपत्ति का आधिकारिक रिकॉर्ड रहता है
इसका जवाब है नहीं। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया कि उसके पास देश के उच्च आय वर्ग या करदाताओं की कुल संपत्ति (नेटवर्थ) का कोई आधिकारिक या समेकित डेटा उपलब्ध नहीं है। इसका कारण यह बताया गया कि संपत्ति कर अधिनियम, 1957 को 1 अप्रैल 2016 से समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद से सरकार करदाताओं की कुल संपत्ति का अलग से रिकॉर्ड नहीं रखती। इसलिए संसद में उपलब्ध जानकारी केवल आयकर रिटर्न में घोषित आय तक सीमित है।
अमीर बढ़े लेकिन देश में बेरोजगारी की स्थिति क्या है
सरकार ने इसी संदर्भ में उच्च आय वर्ग की बढ़ती संख्या के साथ अन्य आर्थिक संकेतकों का भी उल्लेख किया। वित्त राज्य मंत्री के अनुसार, पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़ों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर 2022 के 3.6% से घटकर 2025 में 3.1% रह गई है। सरकार का दावा है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का श्रम बाजार कोविड-पूर्व स्तर से बेहतर स्थिति में पहुंच चुका है।
इसी प्रकार, घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच उपभोग असमानता में कमी आई है। सर्वे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों का गिनी गुणांक 0.237 और शहरी क्षेत्रों का 0.284 दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है। गिनी गुणांक में कमी को आय और उपभोग संबंधी असमानता घटने का संकेत माना जाता है।
सरकार का दावा- 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले
वहीं, सरकार ने नीति आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक का हवाला देते हुए कहा कि 2015-16 से 2019-21 के बीच देश में बहुआयामी गरीबी का अनुपात 24.85% से घटकर 14.96% रह गया। इस अवधि में करीब 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। साथ ही सरकार ने कहा कि आय असमानता कम करने के लिए अधिक आय वाले व्यक्तियों पर सामान्य आयकर के अतिरिक्त सरचार्ज लगाया जाता है तथा रोजगार सृजन और समावेशी विकास के लिए विभिन्न सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

