- Hindi News
- राष्ट्रीय
- जहांगीर महल को लेकर CM मोहन यादव का बयान, कहा जहांगीर कभी ओरछा आए ही नहीं
जहांगीर महल को लेकर CM मोहन यादव का बयान, कहा जहांगीर कभी ओरछा आए ही नहीं
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ओरछा स्थित जहांगीर महल को लेकर दिए गए बयान के बाद राज्य में इसके इतिहास और नामकरण को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। निवाड़ी जिले के ओरछा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जहांगीर कभी ओरछा आए ही नहीं थे और जिस इमारत को आज जहांगीर महल कहा जाता है, उसका निर्माण बुंदेला शासक राजा वीर सिंह देव ने कराया था। उन्होंने यह भी कहा कि इसे सूर्यदेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आने के बाद इतिहासकारों, राजनीतिक दलों और स्थानीय स्तर पर इस विषय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
इतिहास में क्या दर्ज है?
ओरछा का जहांगीर महल बुंदेलखंड की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में से एक माना जाता है। प्रचलित ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, बुंदेला शासक वीर सिंह देव और मुगल सम्राट जहांगीर के बीच राजनीतिक संबंध थे। बताया जाता है कि 1602 में अबुल फजल की हत्या के बाद दोनों के संबंध और मजबूत हुए। वर्ष 1605 में सलीम मुगल सम्राट बने और जहांगीर के नाम से गद्दी संभाली, जबकि उसी समय वीर सिंह देव भी ओरछा के शासक बने।
सरकारी पर्यटन दस्तावेजों और भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल 'इन्क्रेडिबल इंडिया' में उल्लेख मिलता है कि वीर सिंह देव ने जहांगीर के सम्मान में इस महल का निर्माण कराया था। इन्हीं ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर इस इमारत को 'जहांगीर महल' के नाम से जाना जाता है।
स्थापत्य कला की अनोखी मिसाल
जहांगीर महल अपनी भव्य वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। इस इमारत में बुंदेली और मुगल स्थापत्य शैली का सुंदर मेल देखने को मिलता है। विशाल प्रवेश द्वार, ऊंचे गुंबद, आकर्षक छतरियां, झरोखे और बहुमंजिला संरचना उस दौर की स्थापत्य कला और राजनीतिक-सांस्कृतिक प्रभावों को दर्शाते हैं। यह महल उस समय के बदलते राजनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय इतिहास का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
ओरछा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस इमारत का निर्माण राजा वीर सिंह देव ने कराया था और उनके अनुसार जहांगीर कभी ओरछा नहीं आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद महल के नाम और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर बहस तेज हो गई है।
कांग्रेस ने जताई आपत्ति
मुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता आनंद जाट ने कहा कि सरकार को इतिहास से जुड़े विवादों के बजाय प्रदेश के किसानों, छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए इसे अनावश्यक विवाद पैदा करने वाला बताया।
ओरछा दौरे पर क्या-क्या किया?
रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सबसे पहले ओरछा पहुंचे, जहां उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक और पुरातात्विक विशेषताओं की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' को सुना। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री रामराजा सरकार मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली, विकास और जनकल्याण की कामना की।

