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नीतिन गडकरी पहुंच गए हाई कोर्ट! जानिए वे किसके खिलाफ मामला दर्ज करने जा रहे हैं?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। रिपोर्ट के अनुसार, वे उनके खिलाफ प्रसारित की गई डीपफेक सामग्री के विरुद्ध मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। मेटा, एक्स और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दी गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब E20 का मुद्दा सोशल मीडिया पर जोर पकड़ रहा है। वहीं विपक्ष ने भी इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी कर ली है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, गडकरी को कथित मानहानिकारक पोस्ट और डीपफेक कंटेंट के खिलाफ मामला दर्ज करने की हाई कोर्ट से अनुमति मिल गई है। खास बात यह है कि इसमें ऐसी सामग्री भी शामिल की गई है, जिसमें उन्हें और उनके परिवार को एथेनॉल से जुड़े मुनाफे के लिए निशाना बनाया जा रहा है।
7 जुलाई को उन्होंने इस आरोप का जवाब दिया था कि उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियां एथेनॉल के उत्पादन में शामिल हैं और इसी कारण वे पेट्रोल में अधिक एथेनॉल मिलाने की वकालत कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके परिवार के सदस्य चीनी मिलों के मालिक हैं और उनकी कंपनियां एथेनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि सरकार ने फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस संबंध में कोई भी फैसला वैज्ञानिक अध्ययन और उद्योगों के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
गोपी ने उच्च सदन में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, "अब तक सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वाहन निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों सहित सभी हितधारकों के साथ विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन तथा परामर्श के बाद ही कोई भी कदम उठाया जाएगा।"
गोपी ने बताया कि भारत निर्धारित समय से 5 वर्ष पहले ही 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य तक पहुंच गया है और औसत मिश्रण 2013-14 में लगभग 1.53 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 20 प्रतिशत हो गया है।
सरकार ने कहा है कि पूरे देश में वैज्ञानिक परीक्षणों, क्षेत्रीय अध्ययनों और उपयोग के अनुभव के आधार पर E20 पेट्रोल सुरक्षित है तथा इंजन के प्रदर्शन, टिकाऊपन या वाहन के जीवनकाल पर किसी व्यापक प्रतिकूल प्रभाव के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं।
गोपी ने गुरुवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ परामर्श करके चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है।
गोपी के अनुसार, देश में प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर आते हैं। E15 मिश्रित पेट्रोल का उपयोग साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय से किया जा रहा है और E19-E20 का उपयोग ढाई वर्ष से अधिक समय से हो रहा है। 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इस मिश्रित ईंधन पर चल रही हैं तथा बड़े पैमाने पर इंजन फेल होने के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।

