डेढ़ लाख रुपये प्रति तोला सोना तो वैसे भी जनता खरीद नहीं सकती, चुनाव खत्म होते ही ‘संकट’ याद आ गया! अखिलेश यादव के तीखे प्रहार

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चुनावी प्रक्रिया पूरी होते ही देश में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई सात सूत्रीय अपील पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। यादव ने इस अपील को सरकार की ‘विफलता की स्वीकारोक्ति’ बताते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को संकट याद आ गया, जबकि वास्तव में भाजपा खुद ही देश के लिए सबसे बड़ा संकट है।

अखिलेश यादव ने सरकार की आर्थिक मोर्चे पर विफलता का मुद्दा उठाते हुए गंभीर सवाल किए। उन्होंने पूछा कि यदि इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं, तो ‘5 ट्रिलियन डॉलर की जुमलेबाज़ अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? सरकार के हाथ से नियंत्रण निकल चुका है। डॉलर आसमान छू रहा है और रुपया पाताल में जा रहा है। जनता से सोना न खरीदने की अपील करने के बजाय भाजपा को यह सलाह अपने भ्रष्ट नेताओं को देनी चाहिए। जनता तो अभी 1.5 लाख रुपये प्रति तोला के भाव पर सोना खरीदने में सक्षम ही नहीं है। भाजपा के लोग ही अपनी काली कमाई को सोने में बदल रहे हैं।

सपा प्रमुख ने चुनाव के दौरान हुए खर्च को लेकर भाजपा को घेरते हुए पूछा कि क्या चुनाव में भाजपा नेताओं द्वारा की गई हजारों चार्टर विमान यात्राएँ पानी से चलती थीं? क्या वे होटलों में नहीं ठहरते थे? यदि इतना ही संकट था तो चुनाव प्रचार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से क्यों नहीं किया गया? क्या सारी पाबंदियाँ सिर्फ जनता के लिए ही हैं?

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यादव ने आरोप लगाया कि देश की वर्तमान स्थिति के पीछे भाजपा की कमजोर विदेश नीति जिम्मेदार है। भारत की पारंपरिक ‘गुटनिरपेक्ष’ (Non-aligned) नीति को छोड़कर कुछ विशेष समूहों के दबाव में आने के कारण देश की जनता को महंगाई, बेरोजगारी और मंदी का सामना करना पड़ रहा है। किसान, मजदूर, युवा और गृहिणियां- हर वर्ग इस समय इसकी चपेट में है।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर कई मोर्चों पर हमला करते हुए कहा कि चुनाव में अनियमितताएँ करके राजनीति को प्रदूषित किया गया है। नफरत फैलाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ा गया है। अपने आचरण से संस्कारों को कलंकित किया गया है। साधु-संतों पर आरोप लगाकर धर्म को भी नहीं छोड़ा गया है।

अखिलेश यादव ने अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार का काम संसाधनों का सदुपयोग करके आपदा से बाहर निकालना है, डर या अफरातफरी फैलाना नहीं। इस अपील के बाद जनता में जो रोष फूटा है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी ‘चुनावी जुगाड़’ से नहीं कर पाएगी। अब देश कह रहा है। आज का भारत कहता है, नहीं चाहिए भाजपा!

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