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अनारबेन पटेल एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जहां भक्ति, सेवा और समर्पणभाव का त्रिवेणी संगम मिलता है
(उत्कर्ष पटेल)
गुजरात में सेवा और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में अनारबेन पटेल प्रेरणादायी नाम हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पुत्री अनारबेन पटेल केवल उद्योगसाहसी ही नहीं बल्कि भक्ति, सेवा और समर्पण के त्रिवेणी संगम का जीवंत उदाहरण हैं। उनका व्यक्तित्व निराभिमानी, सहज पारदर्शी और सेवा-समर्पित है, जो अनेक महिलाओं, कारीगरों और खासकर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।

अनारबेन के लिए उनकी माँ आनंदीबेन पटेल ही आदर्श हैं। मां के सेवाभाव, कर्मयोग और समाज के प्रति समर्पण से प्रभावित होकर अनारबेन ने छोटी उम्र से ही सेवा का मार्ग अपनाया था। १९९५ में उन्होंने ग्रामश्री ट्रस्ट की स्थापना की जो दूर-दराज के इलाकों में कठिन परिस्थितियों में रहने वाली महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन और सम्मान दिलाने का माध्यम बन गया। माँ के मार्गदर्शन में अनारबेन ने कभी प्रसिद्धि या पद की पीछे नहीं दौड़ी। उनका जीवन आज भी केवल सेवा और समर्पण का प्रतीक बना हुआ है।
अनारबेन का व्यक्तित्व बिल्कुल निराभिमानी है। वे जीवन में योग और ध्यान को बहुत महत्व देते हैं। घर में मातृत्व की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए सेवा कार्यों का संचालन करते हुए और समाज के दुखी-पीड़ित वर्ग की बातें सुनते हुए वे हमेशा संतुलन बनाए रखती हैं। “मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करती हूँ” यह सरल वाक्य उनकी विनम्रता का प्रतीक है। किसी भी मौके पर वे अपनी बात को बड़ा नहीं बनातीं, बल्कि सेवा के कार्य को आगे बढ़ाती हैं। यह निराभिमानी रवैया उन्हें समाज में अनोखा स्थान देता है।
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श्री खोडलधाम ट्रस्ट में अनारबेन की भक्ति और पाटीदार समाज के प्रति सेवाभाव केंद्र में रहता है। जनवरी २०२६ में उन्हें खोडलधाम संगठन की अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वे ट्रस्टी और महिला विभाग के नेतृत्व में सक्रिय रहीं। लेवा पाटीदार समाज के आस्था केंद्र श्री खोडलधाम में वे भक्ति के साथ सेवा और समाज सुधार को जोड़ रही हैं। समाज की युवा पीढ़ी को इतिहास, संस्कार, संस्कृति और एकता का पाठ सिखाने के लिए वे निरंतर प्रयास करती रहती हैं। पाटीदार समाज के विकास, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक संगठन में उनकी सक्रियता गुजरात की बहनों और बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा है।
अनारबेन के सेवा कार्य अनेक हैं और वे लाखों लोगों के जीवन को छूते हैं। १९९५ में ग्रामश्री के माध्यम से उन्होंने अहमदाबाद के स्लम इलाकों की महिलाओं को सिलाई, कापड़काम, एम्ब्रॉयडरी जैसे कौशल सिखाकर आर्थिक स्वावलंबन का रास्ता खोला। आज ग्रामश्री दो हजार से अधिक महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचा रहा है। २००१ के कच्छ भूकंप के बाद उन्होंने लुडिया, गांधीनु गांव जैसे गांवों का पुनर्निर्माण किया और कारीगरों को रोजगार दिया। मानव साधना जैसी संस्था के जरिए दस हजार से अधिक स्लम के बच्चों को शिक्षा और मूल्यों का पोषण देने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है। इन सभी कार्यों में उनका उद्देश्य केवल सहायता करना नहीं, बल्कि समाज को स्वावलंबी और समृद्ध बनाना है।

कला के प्रति अनारबेन का समर्पणभाव अद्भुत है। क्राफ्टरूट्स उनकी इसी सोच का जीवंत रूप है। ग्रामश्री के अंतर्गत स्थापित क्राफ्टरूट्स ने पिछले दो दशकों में पैंतीस हजार से अधिक कारीगरों को जोड़ा है और पचहत्तर से अधिक पारंपरिक हस्तकलाओं को नई जिंदगी दी है। मशरू वणाट जैसी लुप्त होती कला को पुनर्स्थापित कर गुजरात के प्रमुख शहरों के अलावा दुबई से मुंबई तक प्रदर्शनियों के जरिए उन्होंने कारीगरों को वैश्विक पहचान और बाजार दिलाया है। महिला कारीगरों को प्रशिक्षण, डिजाइन वर्कशॉप और आर्थिक सहयोग देकर क्राफ्टरूट्स ने उन्हें समाज में सम्मान का माहौल तैयार किया है। अनारबेन मानती हैं कि “हर कारीगर को सम्मान के साथ रोजगार देना ही सच्ची सेवा है।” इस समर्पणभाव से वे भारतीय हस्तकला को अगली पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी के प्रति अनारबेन का आदरभाव उनके शब्दों और कार्यों में लगातार झलकता है। वे पीएम मोदी को कर्मयोगी और करुणामय व्यक्तित्व के रूप में हमेशा याद करती हैं। उनके कार्यों में ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना साफ दिखती है। ग्रामश्री और क्राफ्टरूट्स के जरिए वे महिला सशक्तिकरण के साथ आत्मनिर्भर भारत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे पीएम नरेंद्रभाई मोदी के विजन को हकीकत का रूप दे रही हैं। इस तरह उनके कार्यों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मंत्र निरंतर गूंजता रहता है।

अनारबेन पटेल एक सादगी भरा, समर्पित और प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन यह संदेश देता है कि सेवा ही सच्ची भक्ति है। उनके कार्य दिखाते हैं कि निराभिमानी हृदय से किया गया काम समाज को कैसे बदल सकता है। आज की युवा पीढ़ी के लिए अनारबेन एक आदर्श कहे जा सकते हैं, जिन्होंने माँ के आदर्श को अपनाकर समाज के प्रति समर्पित होकर और कला को जीवन का अंग बनाकर एक नया सेवा सेतु तैयार किया है।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

