ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों पर सियासत…कांग्रेस बोली- एक साल तक शहीदों की जानकारी छिपाई गई, जानिए रक्षा मंत्रालय ने क्या सफाई दी?

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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह भारतीय सैनिकों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पर दर्ज होने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि इन जवानों की शहादत की जानकारी एक वर्ष तक सार्वजनिक नहीं की गई और उन्हें समय पर वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। वहीं, रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि शहीदों को पहले ही सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी जा चुकी है। 

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए एक बयान का वीडियो साझा किया। वीडियो में रक्षा मंत्री एक सवाल के जवाब में कहते हुए दिखाई देते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि यदि ऑपरेशन के दौरान छह जवान शहीद हुए थे तो संसद में यह जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल दो संभावनाएं हैं- या तो उस समय रक्षा मंत्री को जवानों की शहादत की जानकारी नहीं थी, या फिर उन्होंने संसद को गुमराह किया। दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

आरोप- संसद में पूरी जानकारी साझा नहीं की गई

कांग्रेस का कहना है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई को लेकर संसद में पूरी जानकारी साझा नहीं की गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज होने के बाद ही यह तथ्य व्यापक रूप से सामने आया।
उधर, रक्षा मंत्रालय ने विस्तृत बयान जारी कर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया जा रहा है कि छह शहीदों को पहली बार सार्वजनिक सम्मान मिला है, जबकि यह पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से गलत है।

बड़ा सवाल: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद ही नाम क्यों आए सामने?

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज होने के बाद यह सवाल उठा कि उनके नाम एक साल बाद ही क्यों सामने आए। कांग्रेस ने इसे जानकारी छिपाने का मामला बताते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि शहीदों की शहादत को सार्वजनिक नहीं किया गया।
हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने इस दावे को खारिज किया है। मंत्रालय के मुताबिक, शहीदों की जानकारी पहले भी अलग-अलग अवसरों पर सार्वजनिक की जा चुकी थी। 11 मई 2025 को तत्कालीन डीजीएमओ ने आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। 14 अगस्त 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उनके वीरता पुरस्कारों की घोषणा की गई। सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी श्रद्धांजलि दी गई, जबकि 8 अक्टूबर 2025 और 15 जनवरी 2026 को उनके परिजनों को सार्वजनिक समारोहों में सम्मानित किया गया।

मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज करने की एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रोटोकॉल है। सभी नाम उसी प्रक्रिया के तहत शामिल किए जाते हैं। इसलिए नाम अब दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि शहीदों की जानकारी पहली बार सार्वजनिक की गई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने शहीदों के परिजनों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सभी निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

राजनाथ सिंह के दिये बयान के बारे में मंत्रालय ने क्या कहा?

रक्षा मंत्रालय ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान पर भी सफाई दी। मंत्रालय के मुताबिक, सोशल मीडिया पर उनके भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग कर प्रस्तुत किया गया, जिससे गलत संदेश देने की कोशिश हुई कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में किसी भारतीय सैनिक के शहीद नहीं होने की बात कही थी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री का बयान उन दावों का जवाब था, जिनमें कहा जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपने लड़ाकू पायलट खो दिए थे। मंत्रालय के अनुसार, रक्षा मंत्री का आशय ऐसे दुष्प्रचारों का खंडन करना था। 

भाजपा के अमित मालवीय ने इस पूरे मामले पर क्या कहा?

इस पूरे विवाद पर भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने रक्षा मंत्री के बयान की एक बयान को जानबूझकर संदर्भ से काटकर राजनीतिक विवाद खड़ा किया। उनके अनुसार, बयान का उद्देश्य केवल उन झूठे दावों का खंडन करना था जिनके जरिए ऑपरेशन की सफलता पर सवाल उठाने और देश का मनोबल कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी।

गौरतलब है कि 6 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। केंद्र सरकार के अनुसार इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। इसके बाद 10 मई को भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई थी।
बता दें कि ऑपरेशन के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को भी निशाना बनाया था। बाद में निजी सैटेलाइट कंपनी मैक्सर द्वारा जारी तस्वीरों में सरगोधा, नूर खान, भोलारी और सुक्कुर एयरबेस पर हमलों के पहले और बाद की स्थिति दिखाई गई थी, जिनमें नुकसान स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

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