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अमित शाह सिर्फ़ एक नेता नहीं बल्कि एक संवेदनशील इंसान हैं जो डॉक्टरों के परिवारों की चिंता करते हैं
(उत्कर्ष पटेल)
जब भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA NATCON 2025) के 100वें नेशनल कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों को इमोशनल श्रद्धांजलि दी, तो उनके शब्दों में न सिर्फ़ आभार बल्कि एक संवेदनशील नेता की गहरी समझ और दया भी दिखी। उन्होंने खुद तीन बार कोविड से पीड़ित होने की बात कही और कहा कि हर डिपार्टमेंट में डॉक्टरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मरीज़ों की सेवा की। यह किसी नेता की नहीं बल्कि एक आम आदमी की संवेदनशीलता को दिखाता है जो अपने अनुभव से डॉक्टरों के त्याग को समझता है।

खासकर गुजरात की बात करते हुए, उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में बने 4000 बेड के मिलिट्री हॉस्पिटल का ज़िक्र किया। वहां 700 रिटायर्ड डॉक्टरों ने अपनी मर्ज़ी से काम किया। इनमें से 132 डॉक्टरों ने कोविड से संक्रमित होने के बावजूद अपनी सेवा नहीं रोकी। यह त्याग का जीता-जागता उदाहरण है: कोई फ़र्ज़ नहीं, कोई ज़िम्मेदारी नहीं, सिर्फ़ इंसानियत का एहसास। इस बारे में बात करते हुए होम मिनिस्टर की आंखों में जो भाव थे, उससे पता चलता है कि वे सिर्फ़ एक लीडर नहीं बल्कि एक सेंसिटिव इंसान हैं जो डॉक्टरों के परिवारों की चिंता, उनके खतरे को दिल से महसूस करते हैं।
यह सेंसिटिविटी हेल्थ सेक्टर की तरक्की में भी दिखती है। उन्होंने कहा कि 2000 के बाद मलेरिया के मामलों में 97% की कमी आई है और जल्द ही भारत मलेरिया-फ्री हो जाएगा। आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत जैसी स्कीमों से हेल्थ बजट 37 हज़ार करोड़ से बढ़कर 1.28 लाख करोड़ हो गया। योग करने वालों में 40% की बढ़ोतरी हुई। इन आंकड़ों के पीछे एक सेंसिटिव विज़न है जो बीमारी के इलाज के साथ-साथ बचाव पर भी ज़ोर देता है।

अमित शाह जैसे सेंसिटिव होम मिनिस्टर का यह नोट हमें प्रेरणा देता है कि लीडरशिप सिर्फ़ पॉलिसी नहीं बल्कि दिल की समझ होती है। देश के डॉक्टरों का त्याग और सरकार की सेंसिटिविटी मिलकर 2047 तक एक डेवलप्ड इंडिया का सपना सच करेंगे। आइए हम सब इस त्याग को सलाम करें और इंसानियत की सेवा में जुट जाएं।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्यमी और समाज सेवक हैं। लेख में व्यक्त किये गये विचार उनके निजी विचार हैं। )

