महाराष्ट्र की 'लाडकी बहिण योजना 'की सूचि से 92 लाख महिलाओं को क्यों हटाया गया?

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महाराष्ट्र सरकार ने अपनी चर्चित 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना' में बड़ा फैसला लेते हुए करीब 92 लाख महिलाओं को लाभार्थियों की सूची से बाहर कर दिया है। यह कार्रवाई योजना के तहत किए गए व्यापक सत्यापन अभियान के बाद की गई है। सरकार का कहना है कि जांच में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन सामने आए, जो योजना की पात्रता शर्तों पर खरे नहीं उतरते थे या जिनमें गड़बड़ियां पाई गईं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि सरकार लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं तक पहुंचे, जो वास्तव में इसके लिए पात्र हैं। इसी उद्देश्य से लाभार्थियों का डेटा विभिन्न सरकारी रिकॉर्ड से मिलान किया गया और ई-केवाईसी के साथ-साथ दस्तावेजों का भी सत्यापन किया गया।

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सरकार के अनुसार, जांच के दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं। कुछ महिलाओं ने एक से अधिक बार आवेदन किया था, जबकि कुछ ऐसे लाभार्थी मिले जो पहले से ही दूसरी सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे थे। इसके अलावा, कुछ महिलाओं की पारिवारिक आय योजना की निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। कई मामलों में दस्तावेज अधूरे या गलत थे, वहीं कुछ लाभार्थी सरकारी कर्मचारी या आयकरदाता परिवारों से जुड़े पाए गए, जो योजना के नियमों के अनुसार पात्र नहीं हैं। ऐसे सभी मामलों को चिन्हित कर लाभार्थियों की सूची से हटा दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद योजना के लाभार्थियों की संख्या में करीब 38 प्रतिशत की कमी आई है। सरकार का मानना है कि इससे योजना अधिक पारदर्शी बनेगी और सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित होगा। अधिकारियों का कहना है कि पहले बड़ी संख्या में आवेदन जल्दबाजी में मंजूर किए गए थे, इसलिए अब विस्तृत जांच के जरिए अपात्र लोगों को अलग किया जा रहा है।

इस बदलाव का असर योजना के बजट पर भी पड़ा है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए बजट आवंटन को घटाकर 26,500 करोड़ रुपये कर दिया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इसके लिए 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। सरकार का कहना है कि लाभार्थियों की संख्या कम होने के कारण बजट में भी स्वाभाविक रूप से कमी आई है।

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गौरतलब है कि मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना की शुरुआत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे ट्रांसफर की जाती है। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य उनके दैनिक खर्चों में मदद करना है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। यदि भविष्य में भी कोई लाभार्थी अपात्र पाया जाता है, तो उसका नाम सूची से हटाया जाएगा। वहीं, जो महिलाएं पात्र हैं लेकिन किसी कारणवश उनका नाम हट गया है, वे आवश्यक दस्तावेज जमा कर दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी पात्र महिला को योजना से वंचित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता केवल सही और योग्य लाभार्थियों तक ही पहुंचे

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