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चलती ट्रेन में चल रहा था पूजा-पाठ, हवन, विरोध होने पर रेलवे ने दी सफाई
सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक रेलवे कोच के अंदर हवन और पूजा-पाठ होता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या भारतीय रेलवे अब ट्रेनों में धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति दे रहा है। मामला बढ़ने पर उत्तरी रेलवे ने इस पूरे विवाद पर आधिकारिक सफाई जारी की है।
रेलवे के अनुसार, वायरल वीडियो किसी सामान्य यात्री कोच का नहीं, बल्कि रेलवे के सैलून कोच (Saloon Coach) का है। यह विशेष कोच वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों के निरीक्षण, आधिकारिक यात्राओं और विशेष अवसरों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह कोच आम यात्रियों के लिए उपलब्ध नहीं होता।

रेलवे ने बताया कि जिस समय यह वीडियो बनाया गया, उस दौरान एक नए सैलून कोच के निर्माण के बाद पारंपरिक गृह प्रवेश और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया था। भारतीय परंपरा के अनुसार किसी नई इमारत, वाहन या अन्य संपत्ति के उपयोग से पहले पूजा करने की परंपरा रही है। इसी परंपरा के तहत यह धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
रेलवे ने यह भी साफ किया कि यह आयोजन किसी नियमित ट्रेन सेवा या यात्री यात्रा के दौरान नहीं हुआ था। वीडियो को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि लोगों को लगा मानो चलती ट्रेन में यात्रियों के बीच हवन कराया जा रहा हो, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
रेलवे के मुताबिक, यह कार्यक्रम रेलवे परिसर में खड़े सैलून कोच के भीतर आयोजित किया गया था और इसका आम यात्रियों की ट्रेन सेवा से कोई संबंध नहीं था। इसलिए इसे नियमित रेलवे संचालन या यात्रियों के लिए उपलब्ध कोच से जोड़कर देखना सही नहीं है।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बीच उत्तरी रेलवे ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि जरूर करें। रेलवे ने कहा कि अधूरी या भ्रामक जानकारी के आधार पर गलत निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
इस घटना के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो का पूरा संदर्भ जानना कितना जरूरी है। रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि वायरल वीडियो को लेकर जो दावे किए जा रहे थे, वे पूरी तरह सही नहीं हैं और यह मामला केवल नए सैलून कोच में आयोजित पारंपरिक पूजा-अर्चना से जुड़ा था।

