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घर से मिले 1.76 करोड़ कैश, कार में 5 लाख... रिश्वतखोर क्लास-1 अधिकारी ए.बी. चौधरी को समय से पहले किया रिटायर
पिछले महीने ACB ने उद्योग भवन में मुख्य विद्युत निरीक्षक, वर्ग-1 के रूप में कार्यरत अश्विन बी. चौधरी को सोलर प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। राज्य सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान 'ऑपरेशन गंगाजल' के तहत एक और बड़े अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। गुजरात सरकार के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स विभाग ने मुख्य विद्युत निरीक्षक (चीफ इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर) अश्विन बी. चौधरी को जनहित में तत्काल प्रभाव से समय से पहले सेवानिवृत्त करने की घोषणा की है।
सरकार द्वारा 10 जुलाई, 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय गुजरात सिविल सर्विसेज (पेंशन) नियमों के तहत लिया गया है। अश्विन चौधरी को 3 महीने के वेतन और भत्तों के बराबर राशि का भुगतान करके सेवा से हटा दिया गया है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, ए.बी. चौधरी के खिलाफ ACB ने पिछले महीने 1 जून को मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान उनकी कार से 5.51 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे, जबकि उनके निवास स्थान से लगभग 1.76 करोड़ रुपये नकद और अन्य संपत्तियों के सबूत मिले थे।
रिश्वतखोर क्लास-1 अधिकारी के पास से सूरत और गांधीनगर में 2.64 करोड़ रुपये की संपत्ति मिली थी। अधिकारी की स्विफ्ट कार से 5 लाख रुपये और उसके घर से 1.76 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए थे। साथ ही जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी क्लास-1 अधिकारी ने केवल एक ही सप्ताह में सोलर पैनल से संबंधित लगभग 100 फाइलें तेजी से मंजूर कर दी थीं।
इस मामले के बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था और वडोदरा स्थित डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर के कार्यालय को उनका मुख्यालय निर्धारित किया गया था। अब केवल एक महीने से थोड़ा अधिक समय में ही राज्य सरकार ने उन्हें सेवा से हटा दिया है।
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन गंगाजल' के तहत भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मामले में अश्विन बी. चौधरी की संपत्तियों की भी जांच चल रही है और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
रूपाणी सरकार के दौरान गुजरात लैंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (GLDC) के तत्कालीन एमडी कनैयालाल देत्रोजा के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद राज्य के सुपर क्लास-वन अधिकारी के खिलाफ यह सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां अब मामले के वित्तीय पहलुओं और संपत्तियों के स्रोतों की और गहन जांच कर रही हैं। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं, लेकिन कुछ मामले पूरे तंत्र पर ही सवाल खड़े कर देते हैं।

