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गुजरात से विद्यार्थी इतनी बड़ी संख्या में विदेश पढ़ने क्यों जा रहे हैं?
एक अनुमान के अनुसार, हर साल 50,000 से अधिक छात्र उच्च शिक्षा के लिए गुजरात से विदेश जाना पसंद करते हैं। एक समय था जब अमेरिका, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करना सिर्फ प्रतिष्ठा (स्टेटस सिंबल) का विषय माना जाता था, लेकिन आज एक वैश्विक डिग्री करियर के लिए एक रणनीतिक जरूरत बन गई है। हम इस बात का विश्लेषण करना चाहते हैं कि गुजरात से छात्र विदेश क्यों जा रहे हैं।
विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन दर्शाते हैं कि भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ाई के लिए मुख्य रूप से तीन कारणों को महत्व देते हैं—वैश्विक शिक्षा (ग्लोबल एजुकेशन), अंतर्राष्ट्रीय मूल्य वाली डिग्री और बेहतर करियर के अवसर। आज के तेजी से बढ़ते वैश्वीकरण (ग्लोबालाइजेशन) के दौर में अच्छे करियर के लिए सिर्फ डिग्री काफी नहीं है; वैश्विक दृष्टिकोण, उद्योगों के साथ संपर्क, अनुसंधान (रिसर्च) का अनुभव और विभिन्न संस्कृतियों के साथ काम करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि आज दुनिया बहुत छोटी हो गई है।

गुजराती क्यों आगे हैं?
दूसरी ओर, गुजरात का स्वभाव ही वैश्विक रहा है। व्यापार, उद्योग और उद्यमशीलता (इंटरप्रेन्योरशिप) में गुजरात सदियों से हमेशा आगे रहा है। आज यही सोच शिक्षा में भी देखने को मिल रही है। गुजरात के छात्र सिर्फ पढ़ाई करके नौकरी पाने के लिए विदेश नहीं जाते। वे वैश्विक कंपनियों में नेतृत्व (लीडरशिप) करने, अपने पारिवारिक व्यवसाय को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने और नई तकनीकों से जुड़ने के लिए ग्लोबल डिग्री चुन रहे हैं।
विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक, ग्रीन एनर्जी, बिजनेस मैनेजमेंट, हेल्थकेयर, डिजाइन और क्रिएटिव आर्ट्स जैसे क्षेत्रों में ग्लोबल एजुकेशन छात्रों को दुनिया की प्रतिस्पर्धा में आगे रखता है।
क्या नया बदलाव आया है?
हाल के वर्षों में फॉरेन एजुकेशन में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी देखने को मिल रहा है। अब ग्लोबल एजुकेशन का मतलब सिर्फ चार या छह साल के लिए विदेश जाना नहीं रह गया है। हाइब्रिड एजुकेशन, ट्रांसनेशनल एजुकेशन और इंटरनेशनल पाथवे प्रोग्राम्स के कारण छात्र कम लागत में और अधिक लचीले (फ्लेक्सिबल) तरीके से ग्लोबल डिग्री हासिल कर सकते हैं। आज ऑस्ट्रेलिया जैसी कई यूनिवर्सिटीज से जुड़े पाथवे मॉडल्स के जरिए छात्र सिंगापुर जैसे एशियाई एजुकेशन हब में अपनी पढ़ाई शुरू करके आगे ऑस्ट्रेलियन डिग्री की ओर बढ़ सकते हैं। भारत की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) भी उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देती है।

On Track Education के रूप में हमारा अनुभव कहता है:
आज छात्रों को केवल एडमिशन की जरूरत नहीं है, बल्कि सही दिशा की जरूरत है। हर छात्र के लिए एक ही देश या एक ही कोर्स सही नहीं हो सकता। उसके सपनों, क्षमता, बजट और करियर के लक्ष्यों के अनुरूप रास्ता चुनना ही सही काउंसलिंग है।
व्यापार में माहिर गुजरातियों के लिए ग्लोबल डिग्री अब सिर्फ अमीरी का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, कौशल और वैश्विक अवसरों में किया जाने वाला सबसे मूल्यवान निवेश है। आने वाले दशक में सफलता उन्हीं की होगी, जो केवल डिग्री नहीं, बल्कि वैश्विक सोच के साथ शिक्षा का चयन करेंगे।
About The Author
Director – Purple Patch Education / OnTrack Education, Surat
Mamta Dhiren Jani is a seasoned international education professional with over 27+ years of experience in student counselling and global academic placements. Over the course of her career, she has guided more than 15,000 students toward higher education opportunities across Australia, New Zealand, USA, UK, UAE, Canada, Singapore, Europe, and beyond. Before founding OnTrack Education, Mamta served as Country Head at Planet Education, where she was instrumental in shaping the organisation’s early growth. Today, as Director of Purple Patch Education LLP and OnTrack Education, she leads a team dedicated to quality counselling, student preparedness, and building meaningful, long-term institutional partnerships. Her practice is rooted in three core values — trust, transparency, and genuine student success — which have earned her and her team the confidence of thousands of families across India and beyond.

