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कर्नाटक: जाति पूछी, फिर घर से निकाल दिया! SIR सर्वे के दौरान महिला BLO के साथ बदसलूकी
जातिवाद हमारे समाज की एक ऐसी वास्तविकता है, जिसे छिपाया नहीं जा सकता, चाहे कितनी भी बार उसका इनकार किया जाए, क्योंकि यह मानसिकता व्यवहार में झलक ही जाती है। कुछ लोग जातिगत अहंकार में इतने डूबे होते हैं कि वे दलित या आदिवासी व्यक्ति का अपमान करते समय शिष्टाचार की सभी सीमाएं लांघ जाते हैं। कर्नाटक के मंगलुरु के शिरलालु गांव में ऐसा ही एक मामला सामने आया है।
यहां शिरलालु गांव की एक महिला BLO का अपमान किया गया और केवल इस वजह से उसे घर से बाहर निकाल दिया गया क्योंकि वह दलित है। महिला वहां घर के लोगों के काम से गई थी। वह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत गई थी। आरोप है कि घर की महिला ने BLO से उसकी जाति पूछ ली। जाति का पता चलते ही महिला ने BLO को घर में प्रवेश देने से इनकार कर दिया और उसे दरवाजे से ही भगा दिया।
कर्नाटक में इस समय एसआईआर प्रक्रिया चल रही है। इसके तहत BLO के रूप में नियुक्त सरकारी कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्रों के निवासियों से डेटा एकत्र करने के लिए लोगों तक पहुंच रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महिला आंगनवाड़ी केंद्र में काम करती है और उसे भी एसआईआर प्रक्रिया के लिए BLO की जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। वह 6 जुलाई को एक सहकर्मी के साथ शिरलालु गांव में अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियां निभाने पहुंची थी।
महिला BLO गांव में यशोदा आचारी नाम की महिला के घर गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, वहां इस आधिकारिक सरकारी कार्य में भी जातिवाद घुस आया। जैसे ही घर की महिला को BLO की जाति का पता चला, उसने सरकारी कर्मचारी का अपमान करने में कोई हिचक नहीं दिखाई। उसने तुरंत बीएलओ को वहां से चले जाने के लिए कह दिया। हद तो तब हो गई, जब उसने महिला BLO को अपने घर के आंगन पर भी आने से मना कर दिया।
इसके बाद, 7 जुलाई को BLO ने वेणूर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने अपने साथ हुए जाति आधारित भेदभाव की पूरी घटना बताई। महिला की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए वेणूर पुलिस ने आरोपी यशोदा आचारी के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।

