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हर्ष संघवी पहले एक उत्साही युवा नेता रहे और अब जनता के लोकप्रिय नेता भी साबित हुए
(उत्कर्ष पटेल)
गुजरात की राजनीति में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में युवा नेता अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि नई पीढ़ी राजनीति में रुचि विकसित कर रही है। गुजरात में जब युवा नेतृत्व की चर्चा होती है, तो हर्ष संघवी का नाम सबसे पहले आता है। एक ऊर्जावान कार्यकर्ता से युवा भाजपा की जिम्मेदारी, उसके बाद विधायक और वर्तमान में गुजरात के उपमुख्यमंत्री का पदभार। कम उम्र में जीवन में पहली बार इतनी सारी जिम्मेदारियां और दायित्व निभाने हों, और गलती की कोई गुंजाइश न हो, तो उस पर खरा उतरना वास्तव में एक कठिन परीक्षा कही जा सकती है।

भारतीय जनता पार्टी ने अपने युवा कार्यकर्ता हर्ष संघवी को अवसर दिया और हर्ष संघवी ने दायित्व निभाते-निभाते जब जनता के सामने, जनता के बीच काम करना शुरू किया, तो समय के साथ आज पूरे गुजरात की जनता उनका स्वागत कर रही है। कोविड के समय उनके द्वारा दिन-रात की परवाह किए बिना किए गए सेवा कार्य, और आज सूरत में जब खाड़ीपुर की स्थिति उत्पन्न हुई, तब घुटनों तक पानी में स्वयं जनता के बीच जाकर उनकी स्थिति का जायजा लेना, सरकारी तंत्र को योजनाबद्ध तरीके से काम में लगाना और प्रभावित नागरिकों की देखभाल करना, उन्हें सांत्वना देना और यह भरोसा दिलाना कि सरकार उनके लिए क्या कर रही है, इसकी जानकारी देना, तथा यह सुनिश्चित करना कि कार्य सही ढंग से हो रहा है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की इस कार्यशैली ने उन्हें जनता के नेता के रूप में और अधिक मजबूत पहचान दिलाई है। यदि गुजरात की राजनीति में युवा कार्यकर्ता इसी प्रकार सेवा-निष्ठा और कर्तव्यभाव से कार्य करेंगे, तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि भविष्य में गुजरात को अच्छे समाजसेवी नेता मिलेंगे और वे लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा करेंगे।

राजनीति में सेवा का भाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब युवा नेता जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं, तब वे लोगों के दिलों में स्थान बनाते हैं। गुजरात में ऐसे नेताओं की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि राज्य का भविष्य सुरक्षित है।

यदि ये युवा सेवा, कर्तव्य और प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देंगे, तो गुजरात विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकेगा और लोकतंत्र के मूल्य और अधिक मजबूत होंगे। गुजरात की राजनीति में यदि ऐसी सेवा-निष्ठा और व्यापक होगी, तो लोकतंत्र के आधारस्तंभ और अधिक सुदृढ़ होंगे तथा नई पीढ़ी राजनीति को अधिक जिम्मेदार और जनमुखी बनाएगी।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

