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आगरा: RPF जवानों ने डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट को स्टेशन पर घसीटा, फिर हुई बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रेलवे के दो विभागों के बीच विवाद भड़क गया, जिसके कारण पूरे स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हीराकुड एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव के दौरान शुरू हुआ विवाद जल्द ही मारपीट में बदल गया। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) के कुछ कर्मचारियों ने डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट पर हमला किया, उन्हें जमीन पर गिरा दिया और दोनों हाथ पकड़कर प्लेटफॉर्म पर घसीटते हुए ले गए। घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आया। 4 आरपीएफ कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के आगरा डिवीजन के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने एक वीडियो जारी कर बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और तत्काल विभागीय कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद रेलवे नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रेन संख्या 20808 हीराकुड एक्सप्रेस को आगरा कैंट स्टेशन पर रोका गया था, तभी सूचना मिली कि एक यात्री घायल हो गया है। बताया जाता है कि इस स्थिति के जवाब में डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट ने ट्रेन को कुछ समय के लिए रोकने का निर्णय लिया। इसी बात को लेकर डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट और आरपीएफ कर्मचारियों के बीच बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही देर में बहस इतनी बढ़ गई कि डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट और आरपीएफ कर्मचारियों के बीच मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इस दौरान डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट पर हमला भी किया गया।
पूरी घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया, जिसकी तस्वीरें अब सामने आई हैं। तस्वीरों में कुछ आरपीएफ कर्मचारी डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट को प्लेटफॉर्म पर घसीटते हुए ले जाते दिखाई दे रहे हैं, जबकि रेलवे कर्मचारी और यात्री पास में मौजूद थे। कुछ लोग बीच-बचाव करने की कोशिश करते हुए भी नजर आते हैं।
इस मामले में आरोप केवल एक पक्ष तक सीमित नहीं हैं। जहां डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट पर हमला करने का आरोप लगाया गया है, वहीं आरपीएफ कांस्टेबल जितेंद्र ने भी डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट पर हमला करने का आरोप लगाया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला करने का आरोप लगा रहे हैं। इसी कारण रेलवे प्रशासन ने निष्पक्ष जांच कराने का निर्णय लिया है।
इस घटना के बाद, प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर रेलवे प्रशासन ने 4 आरपीएफ कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित कर्मचारियों में एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बदन सिंह शामिल हैं। रेलवे का कहना है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे विभागीय और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में एएससी आगरा कैंट, स्टेशन डायरेक्टर आगरा कैंट और एओएम आगरा शामिल हैं। जांच समिति सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और दोनों पक्षों के दावों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया जाएगा कि विवाद कैसे शुरू हुआ और हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार था। आगरा कैंट उत्तर भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है। ऐसे स्टेशन पर रेलवे के दो विभागों के बीच खुले विवाद से यात्री भी हैरान रह गए। घटना के दौरान स्टेशन पर कुछ समय के लिए अराजकता की स्थिति रही और घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए थे। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन जैसे संवेदनशील कार्यों में शामिल विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। ऐसे विवाद न केवल रेलवे की छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि यात्रियों के बीच भी नकारात्मक संदेश देते हैं। फिलहाल सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद खुलासा होगा कि ट्रेन संख्या 20808 हीराकुड एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान हुई हिंसक झड़प का कारण क्या था और पूरी घटना के लिए कौन जिम्मेदार था।

