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अपने ही विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले दिल्ली के ACP ने कहा- थाने के अंदर सुरक्षित नहीं हैं, तो दूसरों की सुरक्षा कैसे करेंगे?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया। वकीलों के साथ हुई झड़प की घटना के बाद दो पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया था। इसके विरोध में मनस्वी वशिष्ठ ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के अंदर और बाहर करीब 10 घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। मंत्रालय ने सस्पेंशन की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है। हालांकि, दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई अनुशासनहीनता के चलते की गई है।
मान सिंह रोड स्थित पुलिस मुख्यालय के बाहर सोमवार सुबह पुलिस के खिलाफ पुलिस का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला। वशिष्ठ के नेतृत्व में करीब 100 पुलिसकर्मियों ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। अपने साथी प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वशिष्ठ ने कहा, 'अगर हम ही पुलिस स्टेशन के अंदर सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर दूसरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं?'
वशिष्ठ के सस्पेंड होने के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने मंगलवार को कामकाज के बहिष्कार का अपना फैसला वापस ले लिया और वकीलों से नियमित न्यायिक कार्यों पर लौटने को कहा। सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान वशिष्ठ की ओर से वकीलों के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां किए जाने के विरोध में एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से 3 नवंबर को काम से दूर रहने की अपील की थी।
दूसरी ओर, दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को वकीलों के एक समूह की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें ACP वशिष्ठ के व्यवहार पर स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया था। कोर्ट ने उनसे जरूरी सबूतों के साथ विधिवत याचिका दायर करने को कहा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने कहा कि याचिका पेश किए जाने के बाद ही इस मामले की जांच की जाएगी। बेंच ने टिप्पणी की, 'हम रिकॉर्ड के आधार पर काम करने वाली अदालत हैं। इसलिए हमारे सामने कुछ लिखित रूप में होना जरूरी है। आपके पास जो भी सामग्री या सबूत हैं, उन्हें याचिका के रूप में रजिस्ट्री में जमा करें, ताकि उन्हें अदालत के सामने विचार के लिए रखा जा सके।'

वकीलों ने बेंच को बताया कि प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ AK-47 के इस्तेमाल और 'काले कोट वाले गुंडे' जैसी टिप्पणियां की गई थीं।
सोमवार को वशिष्ठ के नेतृत्व में करीब 100 पुलिसकर्मियों के एक समूह ने बैनर और पोस्टर लेकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने मुख्यालय के अंदर प्रवेश किया और वहां धरने पर बैठ गए। पुलिस विभाग में इस तरह का प्रदर्शन असामान्य माना जा रहा है। इससे नाराज वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को चेतावनी दी कि वे आंदोलनकारियों की तरह व्यवहार न करें।
पुलिसकर्मी ACP वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले का विरोध कर रहे थे। 23 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी जिले के शहादरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे वकीलों के एक समूह ने दोनों अधिकारियों पर उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था।

विभागीय कार्रवाई से नाराज प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों ने दोनों अधिकारियों को बहाल करने की मांग की। करीब 10 घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उनकी मांगें सुनीं।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह पुलिस स्टेशन में वकीलों के साथ हुई झड़प के बाद दोनों अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए गए थे। इस घटना में एक वकील के सिर में चोट लगने का आरोप है। वकीलों ने आरोप लगाया था कि पुलिस स्टेशन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक के दौरान वशिष्ठ ने अपनी लोडेड रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकी दी थी। इस घटना के बाद जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी और आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
वकीलों के भारी दबाव के बाद 28 अक्टूबर को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने वशिष्ठ और अरुण कुमार का तबादला कर दिया था।

