- Hindi News
- राष्ट्रीय
- RSS की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की 3 दिवसीय बैठक, मोहन भागवत के विदेश दौरे और वहां मिले अनुभवों पर...
RSS की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की 3 दिवसीय बैठक, मोहन भागवत के विदेश दौरे और वहां मिले अनुभवों पर भी होगी चर्चा
इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को डेली कॉलेज में शुरू हो गई। बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी 6 सह-सरकार्यवाह सहित देशभर से करीब 400 से अधिक पदाधिकारी शामिल हुए हैं। यह बैठक 4 नवंबर तक चलेगी। इसमें संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ संगठन के विस्तार और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी।
संघ ने पिछले एक साल में देशभर में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू होने की जानकारी दी है। इसके साथ ही 65 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। बैठक में इन आयोजनों से मिले अनुभवों के आधार पर भविष्य की गतिविधियों की दिशा तय की जाएगी।
इसके साथ ही बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के विदेश दौरे और वहां मिले अनुभवों पर भी चर्चा होगी। शताब्दी वर्ष के संदर्भ में अगस्त और सितंबर में वे अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम गए थे। इस दौरान उन्होंने वहां के प्रमुख लोगों से संवाद किया और विभिन्न सम्मेलनों में अपने विचार रखे।
RSS की बैठक का मुख्य एजेंडा
सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, परिवार प्रबोधन, स्वत्व का भाव और नागरिक कर्तव्य को समाज में लागू करने की योजना बनाई जाएगी। पिछले 2 वर्षों के प्रयासों की समीक्षा की जाएगी। शाखाओं को अधिक स्थानों तक पहुंचाने और मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श होगा। सरसंघचालक के विजयादशमी संबोधन में उठाए गए समसामयिक विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
ऐतिहासिक हस्तियों पर जारी होंगे बयान
बैठक में तीन ऐतिहासिक हस्तियों से जुड़ी महत्वपूर्ण वर्षगांठ के अवसर पर बयान जारी किए जाएंगे।
-
राजनारायण बोस की 200वीं जयंती के अवसर पर।
-
स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने पर।
-
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्मशताब्दी के अवसर पर।
शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। आंबेकर के मुताबिक, शहरों में बस्तियों के स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में 8-10 गांवों को जोड़कर बनाए गए मंडल स्तर पर ये सम्मेलन आयोजित किए गए। कई जगहों पर दो-तीन मंडलों को जोड़कर भी कार्यक्रम किए गए।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी भी रही। अब इन अनुभवों के आधार पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रमों और गतिविधियों पर विचार किया जाएगा। युवाओं को जोड़ने के लिए शहरों, गांवों और कॉलेज परिसरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अन्य युवाओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इन प्रयासों को आगे बढ़ाने की योजनाओं पर चर्चा होगी।
https://twitter.com/RSSorg/status/2117132609641963567
संघ की पिछली 2-3 बैठकों में नशीले पदार्थों के बढ़ते चलन पर चिंता जताई गई है। इस बार भी यह विषय एजेंडे में शामिल रहेगा। आंबेकर ने बताया कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर विचार किया जाएगा। इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से काम करने की योजना बनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि पिछली समन्वय बैठक में संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों ने भी अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी।
शताब्दी वर्ष में संघ ने पंच परिवर्तन के पांच विषय समाज के सामने रखे हैं। इनमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, परिवार प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं।
इन विषयों को समाज तक पहुंचाने के लिए गृह संपर्क अभियान, सम्मेलन और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। बैठक में इन पांचों विषयों के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विभिन्न प्रांतों के पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में हुए कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर नए अभियान चलाने पर भी विचार किया जाएगा।
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक में संघ के 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों से संघचालक, सह संघचालक, कार्यवाह, सह कार्यवाह, प्रचारक और सह प्रचारक शामिल हुए हैं। अंतिम दिन विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी और आंकड़े प्रस्तुत किए जाएंगे।
आंबेकर ने बताया कि देशभर में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। साप्ताहिक मिलन और मासिक मिलन को भी शामिल करें तो संघ का काम अब 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच गया है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के दौरान 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं।
बैठक में कार्य विस्तार के प्रयासों के परिणामों और अनुभवों की समीक्षा की जाएगी। शाखाओं के साथ साप्ताहिक और मासिक मिलन की गतिविधियों को मजबूत बनाने पर भी चर्चा होगी।
उन्होंने बताया कि इन सम्मेलनों से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा और समाज की ओर से समर्थन मिला। लोगों ने संघ की शाखाओं से जुड़ने की इच्छा जताई। सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने भी अपने कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों के अनुभवों का लाभ लेने की इच्छा व्यक्त की है। बैठक में इन सम्मेलनों से मिले अनुभवों और सामाजिक भागीदारी की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर जनजागरूकता को लेकर भी चर्चा होगी। आंबेकर के मुताबिक, संघ का प्रयास रहेगा कि समाज के सभी वर्गों तक तथ्यात्मक जानकारी सही परिप्रेक्ष्य में पहुंचे। इसके लिए उचित दृष्टिकोण लोगों तक पहुंचाने की जरूरत पर विचार किया जाएगा।
आंबेकर के अनुसार, विदेश दौरे के दौरान भागवत ने हिंदुत्व की सही अवधारणा और भारत की उस सोच को प्रस्तुत किया, जिसमें दुनिया के सभी लोग एक साथ सुखपूर्वक रह सकते हैं। उन्होंने इस विचार को भी प्राथमिकता दी कि भारत की शक्ति बढ़ाने का उद्देश्य दुनिया का कल्याण होना चाहिए।
Gen-Z के आंदोलन से जुड़े सवाल पर आंबेकर ने कहा कि देश में कोई आवाज उठाता है तो संघ को पक्ष-विपक्ष के नजरिए से क्यों देखा जाता है? सभी लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि आंदोलन देशहित में हो। सभी को इस पर सतर्क रहना चाहिए। संघ इस बात का ध्यान रखता है और आगे भी रखेगा।

