- Hindi News
- राष्ट्रीय
- बागपत: ‘उसे मैं नहीं, मेरा भाई पसंद है’, पत्नी को लेकर देवर से शादी करवाने पहुंचा पति!
बागपत: ‘उसे मैं नहीं, मेरा भाई पसंद है’, पत्नी को लेकर देवर से शादी करवाने पहुंचा पति!
उत्तर प्रदेश के बागपत में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में एक महिला की अजीबोगरीब मांग ने अधिकारियों को स्तब्ध कर दिया। यह महिला गोद में बच्चा लेकर अपने पति के साथ आई थी, लेकिन वह अपने देवर से शादी करना चाहती थी। पति ने भी पत्नी की बात का समर्थन करते हुए कहा कि उसे मैं नहीं, मेरा छोटा भाई पसंद है। पंचायत से तलाक होने का दावा भी किया, लेकिन कानूनी दस्तावेजों के अभाव में उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया था।
बागपत में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी करने के इच्छुक जोड़ों के आवेदनों की जांच चल रही थी। इस दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया। महिला अपने बच्चे और वर्तमान पति के साथ अधिकारियों के सामने पहुंची थी, लेकिन उसकी मांग थी कि उसकी शादी उसके पति से नहीं बल्कि देवर से करवाई जाए। शुरुआत में तो सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन दस्तावेजों की जांच के दौरान एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। महिला पहले से ही शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा भी था, फिर भी वह सामूहिक विवाह योजना के तहत अपने देवर से शादी करने की तैयारी में थी।
जब अधिकारियों ने महिला से पूछा कि वह पहले से शादीशुदा होने के बावजूद दूसरी शादी कैसे कर सकती है, तब महिला ने बहुत ही स्पष्टता से जवाब दिया। उसने कहा कि उसे पति पसंद नहीं है और वह अपने देवर से शादी करना चाहती है। उसने दावा किया कि गांव में पंचायत बैठी थी और पंचों ने उनका तलाक करवा दिया है और सबूत के तौर पर पंचायत का एक लिखित फैसला भी अधिकारियों के सामने रखा।
हालांकि, इस पूरी घटना में सबसे आश्चर्यजनक मोड़ तब आया जब उसके साथ आए पति ने भी उसके दावे का समर्थन किया। पति ने अधिकारियों के सामने पत्नी की बात की पुष्टि करते हुए कहा कि वह सच कह रही है। उसे मैं नहीं, बल्कि मेरा छोटा भाई पसंद है। कुछ दिन पहले ही गांव में पंचों की मौजूदगी में इस दंपती का तलाक करवाया गया था। यानी जिस महिला को शादी के मंडप तक पहुंचाने वाला पति ही अपनी पत्नी की दूसरी शादी का समर्थन करता नजर आया। पति-पत्नी दोनों ने अपने तलाक के आधार के रूप में ग्राम पंचायत के फैसले का उल्लेख किया था, लेकिन सरकारी नियमों के मुताबिक यह दलील मान्य नहीं हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत का फैसला या सादे कागज पर लिखा तलाक का समझौता कानूनी तलाक का विकल्प नहीं बन सकता। दूसरी शादी करने के लिए, सबसे पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के जरिए तलाक लेना जरूरी है। महिला कानूनी तलाक के दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, इसलिए उसका आवेदन नामंजूर कर दिया गया।
मुख्यमंत्री की सामूहिक विवाह योजना के तहत कुल 220 ऑनलाइन आवेदन मिले थे। जांच के बाद 149 जोड़े पात्र पाए गए और 25 अक्टूबर को उनकी शादियां संपन्न हुईं। वहीं, दस्तावेजों में खामियों या पात्रता के मानदंडों को पूरा नहीं करने के कारण कुछ आवेदन नामंजूर कर दिए गए थे। इन नामंजूर किए गए आवेदनों की समीक्षा के दौरान ही पति, पत्नी और देवर से जुड़ा यह अनोखा मामला सामने आया था।
'आज तक' की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला समाज कल्याण अधिकारी नीलम चौहान ने बताया कि सामूहिक विवाह योजना के तहत एक महिला की ओर से आवेदन मिला था, जो अपने देवर से शादी करना चाहती थी। जांच प्रक्रिया के दौरान पता चला कि महिला ने अपने वर्तमान पति से कानूनी रूप से तलाक नहीं लिया था। ऐसे में, नियमों के अनुसार उसका आवेदन नामंजूर कर दिया गया।

