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नौकरी-पैसा कुछ नहीं बचेगा? अगले 20 वर्षों में क्या होने वाला है? बिल गेट्स ने 60 हजार कर्मचारियों को दे दिया हिंट
सुबह की भागदौड़ ऑफिस जाना, टार्गेट्स पूरे करने की चिंता और महीने के अंत में सैलरी का इंतजार करना, यही तो आम व्यक्ति के जीवन की कहानी है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि कड़ी मेहनत और डिग्रियां उनकी नौकरी को सुरक्षित रखेंगी। लेकिन क्या होगा अगर आने वाले वर्षों में पूरी व्यवस्था ताश के पत्तों के महल की तरह ढह जाए? यह भयावह संभावना अब सिर्फ किसी फिल्म की कहानी नहीं रही; हमारे सामने खड़ी एक कठोर सच्चाई बनने जा रही है। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक और दुनिया के टेक दिग्गज, बिल गेट्स ने भविष्य के बारे में कुछ चौंकाने वाली भविष्यवाणियां की हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है।
टेक जगत में फिलहाल माइक्रोसॉफ्ट के एक कदम की काफी चर्चा हो रही है, जिसमें कंपनी अपने लगभग 60,000 कर्मचारियों को 'बायआउट' पैकेज यानी स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का पैकेज ऑफर कर रही है। हाल ही में लोकप्रिय 'डीकोडर' (Decoder) पॉडकास्ट पर बात करते हुए, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने एक स्पष्ट चेतावनी दी है कि, अगले 20 साल मानवजाति के लिए अब तक के सबसे उथल-पुथल भरे होने वाले हैं। गेट्स का मानना है कि, AI और ह्यूमनॉइड रोबोट्स हमारे काम करने के तरीके, उद्योगों के स्वरूप और हमारे रोजमर्रा के जीवन को पूरी तरह बदल देंगे। हालांकि लंबे समय में AI दुनिया में समृद्धि और प्रगति ला सकता है, लेकिन जब तक समाज किसी नई टेक्नोलॉजी के साथ पूरी तरह तालमेल नहीं बिठा पाएगा, तब तक का यह दौर बेहद भयावह होगा। बदलाव के इस दौर में, कई लोग अपनी नौकरी गंवा देंगे और उनके सामने जीवन में उद्देश्य खोजना भी मुश्किल हो जाएगा।
किन-किन नौकरियों पर सीधा खतरा मंडरा रहा है?
गेट्स के मुताबिक, AI का असर सिर्फ IT या टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। कोई भी ऐसा काम जो बार-बार दोहराया जाता हो या जिसमें एक निश्चित नियमित प्रक्रिया का पालन होता हो, फिर चाहे वह डेटा और जानकारी को प्रोसेस करने का हो या ग्राहकों से बातचीत करने का, ये सभी काम AI के निशाने पर हैं।
ऑफिस की नौकरियां: टेलीफोन सेल्स, कस्टमर सपोर्ट और अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों में AI बहुत तेजी से इंसानों की जगह ले लेगा। AI ये काम इंसानों की तुलना में बहुत सस्ती दर पर, ज्यादा सटीकता से और कई गुना तेजी से कर सकता है। शारीरिक श्रम: यह खतरा सिर्फ ऑफिस की डेस्क जॉब्स तक सीमित नहीं है। रोबोटिक्स के क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण ऐसे 'ह्यूमनॉइड' रोबोट्स विकसित किए जा रहे हैं, जो घरों का निर्माण कर सकते हैं, खेती कर सकते हैं और जटिल सर्जरी भी कर सकते हैं।
कंपनी की मजबूरी: जब कंपनियों को कम खर्च में ज्यादा कुशल मशीनें मिल जाएंगी तो उनके पास इंसानों को काम पर रखने की कोई बड़ी वजह नहीं बचेगी। गेट्स की चिंता सिर्फ बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा होने की संभावना तक सीमित नहीं है; उनकी असली चिंता यह है कि इंसान अपनी पहचान कैसे बचा पाएंगे। नौकरी या काम सिर्फ पैसा कमाने का जरिया नहीं होता। सुबह उठने की वजह, नए लोगों से मिलना, समस्याएं सुलझाने का संतोष और कुछ नया करने की खुशी; यह सब हमारे काम से जुड़ा हुआ है।
अगर AI और मशीनें आय पैदा करने वाले सभी जरूरी काम संभालने लगेंगी, तो इंसानों के पास करने के लिए क्या बचेगा? जब AI हमसे बेहतर तरीके से फैसले लेना शुरू करेगा, तो इंसानों को ऐसा लग सकता है कि उनका कोई महत्व नहीं है और वे बिल्कुल खाली हो गए हैं। गेट्स ने अपनी संस्था और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी को खत्म करने के प्रयासों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर AI ऐसी बड़ी वैश्विक समस्याओं का समाधान इंसानों से ज्यादा प्रभावी तरीके से करे, तो यह मानव मन के लिए बहुत परेशान करने वाली बात होगी।
क्या काम के घंटे घटाकर नौकरियां बचाई जा सकती हैं?
बिल गेट्स ने इस गंभीर संकट का सामना करने के लिए कुछ उपाय सुझाए हैं। उनके मुताबिक, सरकारों और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को रोजगार नीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे:
काम के घंटों में कटौती: भविष्य में काम के घंटे सीमित करने होंगे और लोगों को जल्दी रिटायरमेंट देने की नीतियां अपनानी होंगी।
काम का बंटवारा: कुछ लोग 8-10 घंटे काम करें इसके बजाय, उपलब्ध काम को ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच बांट देना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति के पास आजीविका का साधन बना रहे।
आर्थिक विकास की नई परिभाषा: सरकारों को फिर से विचार करना होगा कि मानव श्रम के बिना हासिल हुए आर्थिक विकास के लाभों को समाज के सभी वर्गों तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।
क्या AI पर प्रतिबंध लगाया जाएगा?
गेट्स ने एक दिलचस्प बात की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि आगे चलकर, कुछ समाज या समुदाय स्वेच्छा से AI के इस्तेमाल को सीमित करने या उस पर प्रतिबंध लगाने का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने अमेरिका के प्रसिद्ध एमिश समुदाय का उदाहरण दिया, जो किसी भी नई टेक्नोलॉजी को अपनाने से पहले उसे अपनी परंपराओं और सिद्धांतों के हिसाब से बहुत सावधानीपूर्वक अपनाता है। ऐसा हो सकता है कि, भविष्य में लोग भारी-भरकम या प्रैक्टिकल कामों के लिए AI का इस्तेमाल करें, लेकिन कला, खेलकूद, खाना पकाने, बच्चों की परवरिश और व्यक्तिगत संबंधों जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल करने से बचें या उस पर प्रतिबंध लगा दें।
माइक्रोसॉफ्ट द्वारा 60000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (buyouts) देने का फैसला और बिल गेट्स की यह गंभीर चेतावनी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग' अब बातों से निकलकर जमीन पर आ चुका है। अगले 20 साल तय करेंगे कि मानवजाति इस नई टेक्नोलॉजी की गुलाम बनेगी या फिर इसका इस्तेमाल पूरी मानवजाति के कल्याण के लिए करना सीखेगी। लेकिन, फिलहाल टेक सेक्टर और आम कर्मचारी वर्ग के लिए आने वाला समय बहुत चुनौतियों से भरा रहने वाला है।

