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'100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को मंजूरी तो दे दी है लेकिन ईंधन कहां से लाएंगे?' सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा
100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को मंजूरी देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से ईंधन की उपलब्धता को लेकर सवाल किया है। कोर्ट ने पूछा कि अगर E100 ईंधन पर चलने वाले वाहनों को मंजूरी दी जाती है तो उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए इथेनॉल की आपूर्ति कैसे की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इथेनॉल आवंटन से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के सामने यह सवाल उठाया था।
हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति MM सुंदरेश और प्रसन्ना B वराले की बेंच ने पूछा था कि अगर 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को मंजूरी दी जाती है तो पर्याप्त ईंधन कैसे उपलब्ध कराया जाएगा। अटॉर्नी जनरल R वेंकटरमणी ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि, इसके लिए उत्पादन प्रणाली में बहुत बड़े पैमाने पर बदलाव करने की जरूरत होगी। कोर्ट ने सुनवाई अगले महीने तक स्थगित कर दी थी।
26 अक्टूबर को, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन करने वाली एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 ईंधन को शामिल किया गया है। E100 लगभग शुद्ध इथेनॉल वाला ईंधन है और इसका उपयोग इस उद्देश्य के लिए बनाए गए वाहनों में किया जा सकता है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन हैं जिन्हें पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण पर अलग-अलग अनुपात में चलने के लिए डिजाइन किया गया है। वे E85 जैसे ईंधन पर भी चल सकते हैं, जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। हालांकि, E100 के लिए नियामक मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि यह देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर आसानी से उपलब्ध होगा। उत्पादन, वितरण और ईंधन आपूर्ति से संबंधित प्रणालियों को भी विकसित करने की जरूरत होगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि, केंद्र सरकार की पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की कोई तत्काल योजना नहीं है। भारत में, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जाता है।
इसका उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करना, आयात लागत घटाना और स्थानीय स्तर पर उत्पादित इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देना है। इसलिए, E100 वाहन परमिट और पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मौजूदा नीति, ईंधन की उपलब्धता और उत्पादन क्षमता के बीच तालमेल जैसे सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि, यह मुद्दा सिर्फ ईंधन की उपलब्धता तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यापक जनहित, पर्यावरण और किसानों के हितों को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण है।
जस्टिस MM सुंदरेश ने किसानों को सशक्त बनाने की जरूरत पर जोर दिया था, उन्होंने कहा था कि, देश की विशाल आबादी, खासकर गांवों में रहने वाले लोगों के हितों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि किसानों को सशक्त बनाने का एक ऐसा पहलू है जिस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।
अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि, वे इस मामले में अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देंगे। सुनवाई के दौरान, एक वकील ने दलील दी थी कि, इथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को किसी न किसी तरह फायदा हो सकता है। एक अन्य वकील ने कहा था कि, केंद्र सरकार की नीति किसानों के हितों को भी ध्यान में रखती है।
सुप्रीम कोर्ट 2025-26 इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए इथेनॉल आवंटन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। 30 जून को, सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के इथेनॉल कोटा बढ़ाने के आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
यह मामला एक ऑयल मार्केटिंग कंपनी द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। कंपनी ने दावा किया था कि हाईकोर्ट का आदेश पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की राष्ट्रीय नीति को अस्थिर कर सकता है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) को इथेनॉल उत्पादक के अनुरोध पर विचार करने और निर्णय लेने का निर्देश दिया था। उत्पादक ने 2025-26 इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए आवंटन में वृद्धि की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि, सरकारी नियमों और दीर्घकालिक अनुबंधों से बंधी फैक्ट्रियों को केवल तेल बेचने वाली कंपनियों को इथेनॉल की आपूर्ति करने के लिए पहले अवसर की सेवा का लाभ देने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट अगले महीने इस मामले की सुनवाई करेगा। इस दौरान इथेनॉल की उपलब्धता, राष्ट्रीय मिश्रण नीति, उद्योग की उत्पादन क्षमता और किसानों के हितों जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।

