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पहलगाम हमला: आतंकियों के चीनी मोबाइल ने खोले कई राज, बायसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट से पाकिस्तान फिर बेनकाब
एनआईए ने कहा- यह कोई अचानक नहीं बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था हमला
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके पीछे मौजूद अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच के दौरान ऐसे डिजिटल और तकनीकी सबूत मिले हैं, जो आतंकियों की सुनियोजित तैयारी और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स की भूमिका की ओर इशारा करते हैं। फोरेंसिक जांच में सामने आया है कि हमले में शामिल आतंकियों के मोबाइल फोन में बायसरन घाटी की विस्तृत लोकेशन पहले से ही सेव थी। इसके साथ ही जिन चीनी मोबाइल फोनों का इस्तेमाल किया गया, उनकी सप्लाई पाकिस्तान के कराची और लाहौर की गई थी।
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने हमले से काफी पहले तैयारी शुरू कर दी थी। मोबाइल फोनों की फोरेंसिक जांच में पाया गया कि बायसरन क्षेत्र की जियोग्राफिकल लोकेशन नेविगेशन एप में रिकॉर्ड थी। इतना ही नहीं, इलाके के स्क्रीनशॉट भी मोबाइल में सुरक्षित रखे गए थे। शुरुआती निष्कर्षों के मुताबिक आतंकियों ने हमले से लगभग एक सप्ताह पहले बायसरन इलाके की रेकी की थी।
मोबाइल में स्क्रीनशॉट और फिर हमले को दिया गया अंजाम
सूत्रों का कहना है कि मोबाइल में मिले स्क्रीनशॉट 15 और 16 अप्रैल 2025 को लिए गए थे। इसके छह दिन बाद, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित बायसरन घाटी में आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक शामिल था। वहीं 16 लोग घायल हुए थे। जांच में यह भी सामने आया कि हमले के दौरान लोगों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया।
चीनी मोबाइल का पाकिस्तान कनेक्शन
एनआई की जांच में यह भी सामने आया है कि आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए गए दो चीनी मोबाइल फोन पाकिस्तान के पते पर भेजे गए थे। सप्लाई चेन रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि इन उपकरणों की डिलीवरी कराची और लाहौर के पतों पर हुई थी। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये डिवाइस पाकिस्तान से आतंकियों तक किस नेटवर्क के जरिए पहुंचे। इससे पहले 24 मई को एनआईए ने जानकारी दी थी कि पहलगाम हमले के आरोपियों से जुड़ा एक ग्रो-प्रो कैमरा बरामद हुआ था। जांच में पता चला कि अमेरिकी कंपनी यह कैमरा चीन के रास्ते लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक पहुंचा था।
एजेंसी का मानना है कि कैमरे की सप्लाई चेन को समझने से उन नेटवर्कों का खुलासा हो सकता है, जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों तक फंड, उपकरण और अन्य संसाधन पहुंचाते हैं। यह हाई-टेक कैमरा पिछले वर्ष जुलाई में डाचीगाम के जंगलों में मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकियों से बरामद किया गया था।
आतंकी अब आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं
एनआईए ने बताया कि आतंकी अब स्मार्ट गैजेट का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठन अब हमलों की रिकॉर्डिंग और बाद में प्रचार के लिए बॉडी कैमरा तथा एक्शन कैमरा जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। एनआईए के अनुसार संबंधित कैमरा चीन स्थित उसके अधिकृत वितरक को भेजा गया था। इसके बाद से जांच का फोकस इस बात पर है कि वह कैमरा चीन से आतंकियों तक कैसे पहुंचा।
लाहौर से हैंडलर लगातार तीनों आतंकियों को निर्देश दे रहा था
एनआईए ने 15 दिसंबर 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। हाल ही में इसके विवरण सार्वजनिक होने पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। चार्जशीट के अनुसार हमले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी सैफुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ है, जो पाकिस्तान के लाहौर के कसूर इलाके में रहता है। जांच में सामने आया है कि साजिद जट्ट हमले के दौरान आतंकियों का मुख्य हैंडलर था। उसने तीनों आतंकियों से लगातार संपर्क बनाए रखा और उन्हें रियल टाइम निर्देश देता रहा। चार्जशीट के मुताबिक बायसरन वैली की लोकेशन भी उसी ने आतंकियों को भेजी थी। हमले के दौरान भी वह लगातार उनके संपर्क में था।
टूरिस्ट गाइडों की भूमिका पर सवाल
चार्जशीट में टूरिस्ट गाइड परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार का भी उल्लेख किया गया है। एनआईए के अनुसार दोनों गाइडों ने हमले से पहले आतंकियों को बायसरन क्षेत्र में देखा था, लेकिन इसकी सूचना सुरक्षा एजेंसियों को नहीं दी। एजेंसी का मानना है कि समय रहते सूचना मिल जाती तो हमले को टाला जा सकता था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि हमले से एक दिन पहले तीनों आतंकियों ने परवेज की झोपड़ी में भोजन किया था। जाते समय वे रोटी और सब्जी भी साथ ले गए थे।
साजिद जट्ट कई हमलों में पहले भी शामिल रह चुका है
साजिद जट्ट को एनआईए ने कई बड़े आतंकी हमलों की साजिश से जोड़ा है। इनमें पहलगाम हमला, डांगरी हमला, पुंछ एयरफोर्स काफिले पर हमला और रियासी बस हमला शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक 20 अक्टूबर 2024 को श्रीनगर की जेड मोड़ टनल पर हुए हमले में भी साजिद और उसके तीनों सहयोगियों की भूमिका थी। उस हमले में सात लोगों की जान गई थी।
पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर, जानें कब क्या हुआ?
- पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 6-7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया।
- रात 1:05 बजे पाकिस्तान और पीओके में एयर स्ट्राइक की गई।
- भारतीय सेना ने 24 मिसाइलों से नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।
- कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया।
- हमले में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और चार सहयोगी भी मारे गए थे।

