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- भाजपा का 'मिशन 61': उत्तर प्रदेश की वो सीटें जहां अब तक मिली हार, वहां जीतने के लिए बना मेगा प्लान
भाजपा का 'मिशन 61': उत्तर प्रदेश की वो सीटें जहां अब तक मिली हार, वहां जीतने के लिए बना मेगा प्लान
BJP ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई चुनौती को अपना लक्ष्य बनाया है। पार्टी ने राज्य में ऐसी 61 विधानसभा सीटों की पहचान की है, जहां उसे पिछले तीन चुनावों (2012, 2017 और 2022) में लगातार हार का सामना करना पड़ा है। इन सीटों को बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन अब BJP ने इन सीटों के राजनीतिक समीकरण बदलने के लिए एक विस्तृत 'मेगा प्लान' तैयार किया है।
BJP इस बार कोई कसर छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। पार्टी इन 61 सीटों पर केवल सतही तौर पर ही काम नहीं करेगी, बल्कि प्रत्येक सीट के लिए विस्तृत चुनावी डेटा की भी जांच कर रही है, पिछले चुनावों में वोट शेयर से लेकर बूथ-स्तरीय डेटा तक की प्रतिक्रिया एकत्र कर रही है। पार्टी का प्राथमिक ध्यान इन सीटों के जातीय समीकरण को करीब से समझने पर है, ताकि प्रत्येक सीट के लिए एक सटीक रोडमैप विकसित किया जा सके।
रणनीतिक रूप से, इन 61 सीटों को दो प्रमुख क्षेत्रों में देखा जा रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 22 सीटें ऐसी हैं जो BJP के लिए महत्वपूर्ण चुनौती पेश करती हैं। ये सीटें मुख्य रूप से आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर जैसे जिलों में स्थित हैं। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 13 सीटों की पहचान की गई है, जिनमें सहारनपुर, मुरादाबाद और बिजनौर जिले शामिल हैं। 2022 के चुनाव में इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का काफी दबदबा रहा था।
राजनीतिक समीकरण अब पूरी तरह बदल चुका है। 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने वाले दल अब BJP के साथ NDA का हिस्सा हैं। इनमें ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल शामिल हैं। BJP को उम्मीद है कि इन नए सहयोगियों के आने से उन सीटों पर उसका आधार मजबूत होगा, जहां वह पहले गठबंधन के कारण लगातार पीछे रह जाती थी।
इन 61 सीटों में से कई सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी का काफी बड़ा प्रभाव देखने को मिलता है। BJP ने इन विशेष निर्वाचन क्षेत्रों के लिए एक सटीक और केंद्रित योजना विकसित की है। पार्टी सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधे पहुंचने और यहां अपनी मौजूदगी स्थापित करने का प्रयास कर रही है। BJP का स्पष्ट लक्ष्य है कि एक वर्ष पहले शुरू की गई इस तैयारी का लाभ उठाकर इन कठिन निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी गणित को सुलझाया जाए और आगामी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की जाए।

