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जंगल में पेड़ की छाल कोई काट रहा है, 2500 से अधिक पेड़ 'मरने' जैसी हालत में, अधिकारी कहते- किसान ऐसा करते हैं
छत्तीसगढ़ के धमतरी और गरियाबंद जिले में स्थित टाइगर रिजर्व में हजारों पेड़ों की छाल उतार लेने की घटना सामने आई है। इस घटना ने वन विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। जिन पेड़ों की छाल उतारी गई थी उनमें ज्यादातर साल, बीजा और तेंदू के पेड़ थे। यह घटना ऐसे इलाके में हुई थी जहां पहले जंगल के बीच एक गांव था। 40 साल पहले बांध के निर्माण के लिए ग्रामीणों को विस्थापित किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि, ग्रामीण इस इलाके में वापस लौट रहे हैं। आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में लौटे ग्रामीणों ने खेती के लिए जमीन तैयार करने के लिए जंगल में करीब 30,000 पेड़ काट दिए हैं।
मीडिया सूत्रों की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में हुई थी। यहां के करका इलाके में अधिकारियों द्वारा की गई जांच में यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है: बड़ी संख्या में पेड़ों की छाल चारों तरफ से काट दी गई थी। इस प्रक्रिया को 'गर्डलिंग' कहा जाता है। इससे पेड़ों को पोषक तत्वों की आपूर्ति बंद हो जाती है, जिसके कारण वे सूख जाते हैं और मर जाते हैं। अधिकारियों ने रिपोर्ट किया है कि, जांच के दौरान, उन्हें करका में 2000 से अधिक ऐसे पेड़ दिखाई दिए जिनकी छाल काट दी गई थी।
करका क्षेत्र वन्यजीवों के आने-जाने का एक मार्ग भी है, जहां से हाथियों का झुंड भी गुजरता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जानवरों के आवास और आवाजाही पर खतरा पैदा होता है, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष का जोखिम बढ़ सकता है।
अधिकारियों ने रिपोर्ट किया है कि, जो लोग पहले वहां रहते थे वे जंगल में वापस लौट रहे हैं। करका कभी जंगल वाला गांव था, जो पूर्व सीतानदी अभयारण्य में सौंधुर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में स्थित था। 1980 के दशक में बांध बनने के बाद, ग्रामीणों को विस्थापित किया गया था। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों का अब दावा है कि मुआवजे के बावजूद, ग्रामीण धीरे-धीरे वापस लौट रहे हैं। इस बीच, कई ग्रामीण दावा करते हैं कि, उन्हें कभी कोई मुआवजा या अन्य सहायता मिली ही नहीं। इसलिए, वे कभी गांव छोड़कर गए ही नहीं।
जब वन विभाग के अधिकारियों ने इलाके की पूरी जांच की तो पेड़ों की छाल काटने का मुद्दा सामने आया। इसमें ISRO सैटेलाइट तस्वीरों का उपयोग करके जंगल की जमीन पर निरीक्षण और करका तथा आसपास के इलाके में पेड़ों के घनत्व की तुलना शामिल है। जांच में पुरानी और नई तस्वीरों के बीच पेड़ों के घनत्व में कमी देखी गई। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि, उनका अनुमान है कि पिछले कुछ वर्षों में 2500 से अधिक पेड़ों की छाल चारों तरफ से काट दी गई है। इसके कारण ये पेड़ धीरे-धीरे सूख जाते हैं और मर जाते हैं। मौके पर स्थिति का निरीक्षण करने के बाद यह आंकड़ा सामने आया था।
उन्होंने बताया कि, आसपास के जंगल और कब्जे वाले क्षेत्र में निश्चित स्थानों का चयन करके पेड़ों की संख्या की तुलना की गई थी। आसपास के जंगल में प्रति हेक्टेयर 1500 से अधिक पेड़ हैं, जबकि अतिक्रमित क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर केवल 50 से 100 पेड़ ही बचे हैं।
वन विभाग अब इस मामले में कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल, GPS का उपयोग करके अतिक्रमित क्षेत्र की मैपिंग की जा रही है। DGPS से लैस ड्रोन का उपयोग करके सर्वे भी किया जा रहा है। जंगल के नुकसान की सीमा को सटीक रूप से निर्धारित करने के लिए ड्रोन से मिली तस्वीरों की तुलना ISRO सैटेलाइट तस्वीरों से की जाएगी।
वन विभाग एक बीट गार्ड और रेंज असिस्टेंट के खिलाफ भी विभागीय जांच कर रहा है। आरोप है कि, मामला सामने आने के बाद 20-25 दिनों तक शिकायत दर्ज कराने का उन्होंने विरोध किया था। इससे संदेह पैदा होता है कि वे इस मामले से अवगत थे लेकिन इतने लंबे समय तक उन्होंने इस बारे में कुछ भी नहीं कहा।

