अगर आपको लाल चटनी के साथ मोमोज़ खाना पसंद है, तो यह खबर पढ़कर हो जाइए सावधान

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शाम ढलते ही शहर के बाज़ारों में मोमोज़ के स्टॉल और दुकानें ग्राहकों से भर जाती हैं। बच्चों से लेकर युवाओं तक हर उम्र के लोग इस फास्ट फूड का आनंद लेने के लिए वहां उमड़ पड़ते हैं। हालांकि, जब यही मोमोज़ अस्वच्छ जगहों पर तैयार किए जाते हैं और इनके साथ परोसी जाने वाली लाल चटनी स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन जाती है, तब मामला गंभीर हो जाता है।

कानपुर में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) विभाग ने शहर में मोमोज़ बनाने और बेचने वाली कई दुकानों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। जांच के दौरान तीन स्थानों पर भारी गंदगी पाई गई। कई जगहों पर मोमोज़ के साथ परोसी जाने वाली चटनी अस्वच्छ स्थानों पर रखी मिली। कार्रवाई के दौरान लगभग 115 किलोग्राम चटनी नष्ट कर दी गई, जबकि मोमोज़ और चटनी दोनों के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं।

यह अभियान जिला मजिस्ट्रेट जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर चलाया गया। FSDA की टीम ने रावतपुर, साकेत नगर और मसवानपुर क्षेत्रों में मोमोज़ बनाने और बेचने वाली इकाइयों का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शहर में बिकने वाले खाद्य उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों का पालन करें। टीम सबसे पहले केशव नगर स्थित 'आकाश मोमोज़' पहुंची। इसके बाद उन्होंने रावतपुर स्थित 'श्री बालाजी मोमोज़' और साकेत नगर की एक अन्य मोमोज़ दुकान का निरीक्षण किया। निरीक्षण में तीनों स्थानों पर स्वच्छता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था; कई जगह खाद्य सामग्री अस्वच्छ वातावरण में रखी गई थी। अधिकारियों ने इसे ग्राहकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया।

सबसे बड़ी अनियमितता रावतपुर स्थित 'श्री बालाजी मोमोज़' में पाई गई। जांच में पता चला कि दुकान खाद्य व्यवसाय के लिए आवश्यक पंजीकरण के बिना संचालित हो रही थी। अधिकारियों ने परिसर में गंदगी, अस्वच्छ वातावरण और सामग्री के अनुचित भंडारण पर कड़ी नाराज़गी जताई। विभाग ने तत्काल संचालन बंद करने का आदेश दिया। स्पष्ट किया गया कि जब तक आवश्यक खाद्य पंजीकरण प्राप्त नहीं कर लिया जाता और सभी कमियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक दुकान का संचालन दोबारा शुरू नहीं किया जा सकेगा।

निरीक्षण के दौरान मोमोज़ के साथ परोसी जाने वाली चटनी सबसे बड़ी चिंता का विषय रही। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर चटनी अस्वच्छ जगहों पर रखी गई थी। टीम ने इसकी गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए जांच के लिए नमूने लिए। केवल 'श्री बालाजी मोमोज़' इकाई से ही लगभग 45 किलोग्राम चटनी नष्ट की गई। पूरे अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों से कुल 115 किलोग्राम संदिग्ध चटनी नष्ट की गई।

कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग ने मोमोज़ और चटनी के कई नमूने एकत्र किए। इन्हें प्रयोगशाला भेजा जाएगा, जहां यह जांच की जाएगी कि इनमें किसी प्रकार के प्रतिबंधित रंग, खराब सामग्री या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन तो नहीं है। यदि जांच रिपोर्ट में खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते, तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मसवानपुर क्षेत्र में सड़क किनारे लगने वाले मोमोज़ के ठेलों की भी जांच की। यहां भी रंगीन फिंगर चिप्स और चटनी स्वच्छता मानकों के अनुरूप नहीं मिली। अधिकारियों ने इन वस्तुओं को मौके पर ही नष्ट कर दिया और विक्रेताओं को स्वच्छता बनाए रखने तथा खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए।

जिला मजिस्ट्रेट जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। अभियान के दौरान एकत्र किए गए सभी नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। यदि नमूनों में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, खुले स्थानों पर तैयार किए गए या बारिश के मौसम में लंबे समय तक संग्रहित खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया तेजी से विकसित हो सकते हैं। ऐसे में चटनी, मेयोनीज़ और अन्य जल्दी खराब होने वाली चीज़ों को सुरक्षित तापमान पर रखना बेहद आवश्यक है। यदि इन्हें अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार या संग्रहित किया जाए, तो फूड पॉइज़निंग और पेट से संबंधित संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

फूड सेफ्टी विभाग ने संकेत दिया है कि शहर में ऐसे विशेष अभियान आगे भी जारी रहेंगे। विभाग का कहना है कि जो व्यापारी खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे केवल स्वच्छ और पंजीकृत दुकानों से ही खाद्य पदार्थ खरीदें। यदि कहीं गंदगी या संदिग्ध खाद्य सामग्री दिखाई दे, तो इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दें।

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