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T20I सीरीज के लिए 4 खिलाड़ी पूरी तरह फिट न होने के बावजूद भारतीय टीम में क्यों चुने गए?
अफगानिस्तान के खिलाफ नई दिल्ली में खेली जाने वाली ऐतिहासिक T20I सीरीज के लिए भारतीय चयन समिति ने 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम में बड़े स्टार्स वापस लौटे हैं, लेकिन फिटनेस के अभाव में हार्दिक पंड्या टीम से बाहर रहा है। इस टीम चयन में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि चार खिलाड़ियों के नाम के आगे ‘फिटनेस क्लियरेंस के अधीन’ दर्शाने वाली फुदड़ी लगाई गई है। इस सूची में तेज गेंदबाजी जोड़ी जसप्रीत बुमराह और हर्षित राणा तथा ऑलराउंडर नितिश रेड्डी और वॉशिंगटन सुंदर शामिल हैं। द्विपक्षीय सीरीज के लिए चयनकर्ताओं ने ऐसे खिलाड़ियों का चयन किया हो जो अभी पूरी तरह फिट नहीं हैं, इस बात को लेकर कई सवाल उठे हैं।
हाल ही में खिलाड़ियों को जल्दबाजी में टीम में वापस लाने के कारण उनके फिर से चोटिल होने के कई मामले सामने आए हैं। इस अनुभव से सबक लेते हुए BCCI ने किसी भी खिलाड़ी को टीम में खेलने की अनुमति देने से पहले बेहद सतर्क रुख अपनाया है।हर्षित राणा घुटने की चोट के कारण पांच महीने तक बाहर रहने के बाद इस साल की शुरुआत में आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरे के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी कर चुका है। उसने इंग्लैंड दौरे के सभी पांच T20I मैच खेले थे, लेकिन फिटनेस की समस्या के कारण वह तीन मैचों की वन-डे सीरीज से बाहर हो गया था और उसकी जगह प्रिंस यादव को शामिल किया गया था।

इसी तरह, बुमराह इंग्लैंड के खिलाफ तीन में से दो वन-डे मैच खेला था और श्रीलंका में हाल ही में खेली गई टेस्ट सीरीज में भारतीय तेज गेंदबाजी का नेतृत्व करने वाला था। हालांकि, दौरा शुरू होने से पहले ही उसे वापस बुला लिया गया और उसकी जगह आकीब नबी को मौका दिया गया था।
बुमराह की तरह ही शीर्ष बल्लेबाज साई सुदर्शन भी श्रीलंका दौरे में खेलने वाला था, लेकिन वह समय पर ठीक नहीं हो सका, इसलिए उसकी जगह सरफराज खान को शामिल किया गया था। इसके अलावा, जिम्बाब्वे T20I सीरीज के दौरान नितिश रेड्डी की जगह सूर्यांश शेडगे और वरुण चक्रवर्ती की जगह रवि बिश्नोई ने टीम में जगह बनाई थी।

खिलाड़ियों की लगातार चोटों और आखिरी समय में नाम वापस लेने के कारण BCCI के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (CoE) पर भी सवाल उठे हैं, जहां भारतीय खिलाड़ी चोट से उबरने के लिए रिहैबिलिटेशन से गुजरते हैं।
इसी कारण अब टीम मैनेजमेंट खिलाड़ी को मैदान में उतारने के लिए फिटनेस क्लियरेंस देने को लेकर बेहद सख्त हो गया है। 'क्रिकबज' की रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र ने बताया कि, मैनेजमेंट खिलाड़ी की मैदान पर उपलब्धता के बारे में 100 प्रतिशत नहीं, बल्कि 200 प्रतिशत आश्वस्त होना चाहता है। CoE इस मामले में कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं है।
BCCI के सचिव देवजीत सैकिया ने सशर्त चयन के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि, हम आम तौर पर टीम के रवाना होने से कम से कम तीन से चार सप्ताह पहले चयन समिति की बैठक आयोजित करते हैं। इसलिए मैच से तीन-चार सप्ताह पहले खिलाड़ी की फिटनेस की निश्चित स्थिति हमारे पास नहीं होती है। उस समय खिलाड़ी रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम से गुजर रहा होता है, इसलिए उसके नाम के आगे 'फिटनेस क्लियरेंस के अधीन' लिखा जाता है। अगर वह खिलाड़ी अगले 21 या 28 दिनों में फिट हो जाता है, तो उसे टीम में शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा, हम चयन के दिन खिलाड़ी को सीधे खारिज नहीं कर सकते, क्योंकि मैच खेलने के दिन या दौरे के समय उसके पूरी तरह फिट होने की संभावना हो सकती है। इसलिए ही इस सशर्त चयन का रास्ता अपनाया जाता है ताकि खिलाड़ी अवसर से वंचित भी न रहे और उसे फिट होने के लिए पर्याप्त समय भी मिल सके।

