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सम्राट पाटिल- सूरत के एक युवा जो समाज सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं
(उत्कर्ष पटेल)
सूरत शहर, जिसे पीएम मोदी ने 'लघु भारत' की पहचान दी है और वास्तविक रूप से सूरत लघु भारत बन भी चुका है, जहाँ भारत देश के अधिकांश प्रांतों के लोग बसते हैं, व्यापार करते हैं और देश की प्रगति में सहभागी बनते हैं। सूरत शहर ने कई ऐसे समाजसेवक दिए हैं जो सूरत आए तो खाली हाथ थे, लेकिन उसके बाद देश और शहर को जितना हो सके उतना कमाकर दान दिया और समाज की सेवा की।

आज सूरत में कई संपन्न समाजसेवक हैं जो विभिन्न सामाजिक कार्यों में भामाशाह के रूप में सहयोग करते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं सम्राट पाटिल। हाल ही में उनके द्वारा की गई सेवा को लेकर प्रशासन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह से उनका नाम हटाए जाने के कारण वे काफी चर्चा में हैं। सम्राट पाटिल युवा हैं और टेक्स्टाइल व्यापार से जुड़े हुए हैं। इस युवा व्यक्ति का गुण है कि वे विनम्र, विवेकशील और संवेदनशील स्वभाव के हैं। यही कारण है कि विवाद खड़ा होने के बावजूद उन्होंने कहीं भी कोई शिकायत करने से परहेज किया है। एक सामान्य परिवार से अपनी मेहनत के दम पर एक सफल व्यापारी बनने के बाद, वे अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा धर्म और समाज सेवा में लगाते हैं।

सम्राट पाटिल की समाज सेवा के प्रति इसी संवेदनशीलता के कारण आज उधना, पांडेसरा और लिंबायत जैसे इलाकों में इस युवा की सेवा की चर्चा होती रहती है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इन क्षेत्रों में सूरत शहर के सबसे अधिक अपराध दर्ज होते हैं। यहाँ शहर का एक बड़ा मजदूर वर्ग भी निवास करता है, जहाँ शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य की भारी समस्याएँ हैं। यहाँ आगे आकर सेवा कार्य करना भी एक साहस और समर्पण माना जा सकता है।

सम्राट पाटिल द्वारा उधना, पांडेसरा और लिंबायत जैसे इलाकों में कई प्रकार के सेवा कार्य चलाए गए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में गरीब और जरूरतमंद छात्रों को पुस्तकें, शैक्षणिक सामग्री और फीस सहायता प्रदान की जाती है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर, दवा वितरण और महिलाओं के लिए स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। रोजगार और कौशल विकास के लिए युवाओं को प्रशिक्षण देने के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं ताकि वे स्वावलंबी बन सकें। इसके अलावा बुजुर्गों, विधवा बहनों और अनाथ बच्चों को राशन किट, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुओं का नियमित रूप से वितरण किया जाता है। गर्मी में पानी की व्यवस्था, मानसून में बाढ़ पीड़ितों को सहायता और सर्दी में गरीबों को गर्म कपड़े उपलब्ध कराना जैसे मौसम आधारित सेवा कार्य भी उनकी सेवा का अभिन्न अंग हैं। ये सभी कार्य पूरी तरह से निस्वार्थ भावना से और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने के उद्देश्य से किए जाते हैं। इसके अलावा सूरत में देश की सबसे बड़ी 'शिवकथा' आयोजित करने का श्रेय भी सम्राट पाटिल और उनके परिवार को जाता है।


इसके साथ ही एक विशेष बात यह है कि इस सेवा के पीछे सम्राट पाटिल का कोई स्वार्थ या राजनीतिक उद्देश्य भी नज़र नहीं आ रहा है। हाँ, सम्राट पाटिल अक्सर चर्चाओं में पीएम मोदी और देश के गृह मंत्री अमित शाह को अपना आदर्श बताते हैं और कहते हैं कि उन्हीं से प्रेरित होकर वे निस्वार्थ भाव से समाज के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन वे किसी भी गुटबाज़ी से परे रहकर 'सबका साथ, सबका विकास' के सूत्र को आत्मसात करके काम करते हैं।

सम्राट पाटिल यानी 'सम्राट भाऊ' के नाम से मशहूर उनके जैसे युवा समाजसेवक सेवा करते रहें और अगर ऐसे समाजसेवक सूरत में रहने वाले हर प्रांत के लोगों में से आगे आएँगे, तो 'लघु भारत' कहा जाने वाला सूरत सेवा के क्षेत्र में भी जगमगा उठेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

