पीएम मोदी ने फिर की अपील- जरूरत न हो तो सोना नहीं खरीदे; देश की आर्थिक उन्नति और मजबूती के लिए यह क्यों जरूरी है?

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नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से लोगों से गैर-जरूरी खर्च कम करने और जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने की अपील की है। इससे पहले भी वे सोना नहीं खरीदने की लोगों से अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर सोने की जरूरत नहीं है तो इसे नहीं खरीदना चाहिए।’ 

दरअसल, देश की आर्थिक विकास दर 7.8% दर्ज होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी। सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के बीच भारत की यह आर्थिक उपलब्धि देशवासियों की इच्छाशक्ति, मेहनत और सामूहिक ताकत का परिणाम है। उनका जोर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और देश के भीतर ही खर्च को प्रोत्साहित करने पर रहा। लेकिन सवाल उठता है कि वे बार-बार सोना नहीं खरीदने की अपील क्यों कर रहे हैं? इससे देश को क्या फायदा होगा। 11 मई को भी उन्होंने देशवासियों से सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी। आइए जानतें हैं कि लोग यदि सोना खरीदना कम कर देंगे तो देश की आर्थिक उन्नति के लिए किस प्रकार फायदेमंद है…

सोना कम खरीदेंगे तो डॉलर की मांग घटेगी, रुपया मजबूत होगा

भारत अपनी जरूरत का करीब 99% सोना विदेशों से आयात करता है। इसका मतलब है कि देश में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजार से पूरा होता है और इसके भुगतान के लिए डॉलर की जरूरत पड़ती है। इसलिए गैर-जरूरी सोने की खरीद घटने पर भारत को कम डॉलर खर्च करना पड़ेगा। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात बिल रिकॉर्ड 72 बिलियन डॉलर यानी करीब 6.82 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। यह 2024-25 के 58 बिलियन डॉलर के मुकाबले 24% ज्यादा है। 2022-23 में यह आंकड़ा 36.5 बिलियन डॉलर था। यानी तीन साल में सोने के आयात पर होने वाला खर्च लगभग दोगुना हो गया।

अब सोने की खरीद कम होने का सीधा फायदा यह होगा कि देश से कम विदेशी मुद्रा बाहर जाएगी। डॉलर की मांग घटने से विदेशी मुद्रा बाजार में रुपए पर दबाव कम हो सकता है। रुपये की स्थिति मजबूत रहने पर भारत के लिए कच्चा तेल और दूसरी जरूरी वस्तुओं का आयात अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है। इससे आयात लागत और महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

2025-26 में कम सोना आयत, इसके बावजूद ज्यादा भुगतान

2025-26 में भारत ने पिछले कारोबारी साल की तुलना में 4.76% कम सोना खरीदा, लेकिन इसके बावजूद सोने का आयात बिल 24% बढ़ गया। इसकी मुख्य वजह सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। यानी मात्रा में खरीद कम होने के बावजूद भारत को सोने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़े। यही कारण है कि सरकार और प्रधानमंत्री की ओर से गैर-जरूरी सोने की खरीद घटाने पर जोर दिया जा रहा है।

महंगे तेल के बीच सोने का खर्च भी चुनौती

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। 28 फरवरी 2026 से अमेरिका-ईरान युद्ध जारी है और इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गया है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का करीब 20% इसी रास्ते से गुजरता है। इसका असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। ऐसे समय में भारत के आयात बिल पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ महंगा कच्चा तेल है, दूसरी तरफ सोने के आयात पर बड़ी रकम खर्च हो रही है। ऐसे में सोने की गैर-जरूरी खरीद कम होने से विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है।

तो आम लोग क्या करें… ETF में निवेश का विकल्प

फिजिकल गोल्ड यानी गहने या सिक्के खरीदने के बजाय गोल्ड ETF को एक विकल्प माना जा सकता है। इसमें सोने को घर या लॉकर में रखने की जरूरत नहीं होती, इसलिए चोरी का जोखिम और लॉकर का खर्च भी नहीं रहता। हालांकि भारत में सोना केवल निवेश का साधन नहीं है। यह शादी, त्योहार, परंपरा, बचत और सामाजिक-सांस्कृतिक भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रधानमंत्री की ओर से सोना नहीं खरीदने की अपील को असामान्य माना जा रहा है।

विदेश यात्रा और विदेशी शादी से भी बचने की अपील की थी

प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश घूमने और विदेश में शादी करने से बचने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि देशवासियों को ‘मेक इन इंडिया' के मंत्र के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक जितना ज्यादा स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जाएगा, भारत उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश के भीतर कुछ लोग निराशा फैलाने और 'झूठ की गूंज' के सहारे माहौल खराब करने में लगे हैं। इसके बावजूद भारत ने 7.8% की विकास दर हासिल की है और देश को इसी रफ्तार को बनाए रखते हुए आगे बढ़ना होगा।

मई में भी मोदी ने सोना नहीं खरीदने की अपील की थी

मई 2026 को हैदराबाद की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने सात सूत्री अपील की थी। इनमें एक साल तक सोना न खरीदना, अनावश्यक विदेश यात्रा से बचना, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना, ज्यादा से ज्यादा वर्क फ्रॉम होम अपनाना, ऊर्जा बचाना, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और विलासिता की खपत कम करना शामिल था। तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि एक साल तक, चाहे त्योहार हो या शादी, सोने के गहने नहीं खरीदने चाहिए। इस अपील के बाद बाजार में हलचल हुई थी। ज्वैलरी शेयरों में गिरावट आई और सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने की अटकलें तेज हुई थीं। मई 2026 में सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया।

विकसित भारत के लिए यह जरूरी क्यों है?

RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में सोने के आयात की वृद्धि दर में बड़ी कमी आई। जनवरी 2026 में करीब 100 टन सोना आयात हुआ था। फरवरी में यह घटकर 65-66 टन और मार्च में 20-22 टन रह गया। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि भारत जब आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब देश की युवा पीढ़ी को एक विकसित भारत सौंपा जाएगा।

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