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AI की मदद से फ्रॉड को तेजी से पकड़ा जा सकता है, लेकिन दूसरी तरफ इसके इस्तेमाल से साइबर हमले भी हो सकते हैं: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
भारत के डेमोग्राफिक एडवांटेज (युवा आबादी की ताकत) को एक सक्रिय और अनस्टॉपेबल वास्तविकता बताते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश की युवा पीढ़ी नई-नई टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल इकोसिस्टम को नया आकार दे रही है। 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' (GFF 2026) को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत का युवा वर्ग अब निराशा से बाहर आ चुका है और वह अब अवसर पैदा होने का इंतजार करके नहीं बैठता।
उन्होंने आगे कहा था कि, हमारे युवा अवसरों का इंतजार नहीं करते, वे खुद ही नए प्लेटफॉर्म का निर्माण कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि GFF 2026 में लगभग 8,000 संस्थान/एंटिटी भाग ले रहे हैं, जिसमें 20% हिस्सेदारी फिनटेक कंपनियों की और 25% हिस्सेदारी वित्तीय संस्थानों की है।
टेक्नोलॉजी के तेज विकास पर जोर देते हुए सीतारमण ने नियामक संस्थाओं के बीच अधिक मजबूत समन्वय की अपील की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि नई क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी पूरे सिस्टम के लिए जोखिम पैदा कर सकती है और अगर टेक्नोलॉजी बदलने की गति अधिक हो तो ये जोखिम भी बहुत तेजी से फैलते हैं।

इस संबंध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि, AI की मदद से फ्रॉड को बहुत तेजी से पकड़ा जा सकता है, लेकिन दूसरी तरफ इसका इस्तेमाल बेहद जटिल साइबर हमले करने के लिए भी किया जा सकता है।
इसी तरह, इंस्टेंट ट्रांजैक्शन के कारण सॉफ्टवेयर की खामियां, धोखाधड़ी और मार्केट झटके बहुत तेजी से फैल सकते हैं। वहीं क्वांटम कंप्यूटिंग क्षेत्र में हो रहे सुधार के कारण पारंपरिक सिक्योरिटी सिस्टम्स को अपग्रेड करना अनिवार्य हो जाएगा। इसलिए, इनोवेशन में बाधा पैदा किए बिना या सुरक्षा के साथ कोई समझौता किए बिना, नियम और कानून भी टेक्नोलॉजी की गति के साथ बदलने चाहिए।
सीतारमण ने ऑपरेशनल मुश्किलों और जरूरी सुरक्षा मानकों के बीच अंतर स्पष्ट करने की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गति हासिल करने की होड़ में ह्यूमन ओवरसाइट और सर्किट ब्रेकर्स जैसे सुरक्षा कवच का बलिदान नहीं देना चाहिए।
सिस्टम में इनोवेशन स्वतंत्र होना चाहिए, लेकिन साथ ही अगर कोई गलती हो तो उसे सुधारने या रोकने की क्षमता भी सिस्टम में होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि, अधिक गति के साथ अधिक विश्वास का निर्माण होना भी उतना ही जरूरी है। दक्षता और सुरक्षा को एक-दूसरे के विरोधी कारकों के रूप में नहीं देखना चाहिए। ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए उपयुक्त सुरक्षा ढांचा अनिवार्य है और संस्थागत ढांचा ऐसा होना चाहिए जहां दक्षता और सुरक्षा दोनों एक-दूसरे को मजबूत बनाएं।
इसके अलावा, टेक्नोलॉजी कहां मूल्य जोड़ती है और कहां बड़ा जोखिम पैदा करती है इसका आकलन रेगुलेटर्स को करना होगा और हर उपयोग के अनुसार सुरक्षा नियम बनाने होंगे। वित्तीय, कॉम्पिटिशन, डेटा और साइबर सिक्योरिटी रेगुलेटर्स की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से परिभाषित होनी चाहिए और उनके बीच तालमेल के लिए एक प्रभावी सिस्टम होना चाहिए। कोई भी गतिविधि केवल क्षेत्रीय सीमाओं को पार करने के कारण निगरानी से बच नहीं जानी चाहिए, ऐसा कहते हुए उन्होंने सभी टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को उचित नियामक निगरानी के तहत रखने की बात कही थी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के लिए एक 'फेडरेटेड प्लेटफॉर्म' की वकालत की थी। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी उद्योग की एक विश्वसनीय और मजबूत सामूहिक आवाज होना जरूरी है। ऐसा प्लेटफॉर्म भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों को नए विदेशी बाजारों में प्रवेश करने, विदेशी रेगुलेटर्स के साथ पहले से संवाद स्थापित करने और बौद्धिक संपदा का वैश्विक स्तर पर व्यावसायीकरण करने में मददगार हो सकता है।
सामूहिक जुड़ाव से सीमा पार के नियमों में भी भारतीय कंपनियों के लिए इनोवेशन लाने के अवसर बने रहेंगे। उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) के नए नियमों का उल्लेख किया था, जहां लोग जब AI सिस्टम के साथ बातचीत करते हैं तो उसका डिस्क्लोजर करना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इन नियमों का पालन न करने पर कंपनी के वार्षिक वैश्विक टर्नओवर के 3% तक का जुर्माना हो सकता है, जो केवल स्थानीय आय पर नहीं बल्कि पूरी वैश्विक आय पर आधारित होता है।

