सूरत कलेक्टर कार्यालय पर श्रमिकों का हल्लाबोल, बोले- ‘हक मांगते हैं, भीख नहीं... रविवार को छुट्टी दो, 8 घंटे...’, जानिए क्या है पूरा मामला

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सूरत में डाइंग, प्रिंटिंग, एम्ब्रॉयडरी, जरी और लूम्स सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में काम कर रहे 10 लाख से अधिक कामगारों के हो रहे शोषण के खिलाफ मजदूर यूनियन द्वारा आंदोलन शुरू किया गया है। आज सूरत में एम्ब्रॉयडरी फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर हल्लाबोल किया है। उनकी मांग है कि, रविवार की छुट्टी और 8 घंटे का निश्चित नौकरी का समय किया जाए। जब तक इन मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तब तक कलेक्टर कार्यालय नहीं छोड़ने का दृढ़ निर्णय श्रमिकों ने किया है। एक मजदूर ने आरोप लगाया पुलिसवाले हमारी फोटो खींचकर धमकियां दे रहे हैं क्यों हमारी फोटो खींच रहे हैं। पुलिस समझाने का प्रयास कर रही है कि सोमवार को कलेक्टर मिलेंगे। लेकिन मजदूर कह रहे हैं कि सोमवार तक हम यहां बैठेंगे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक समय पुलिस को शक हुआ कि एक मजदूर जेब में पत्थर लेकर पहुंचा है, तब उसे चेक करने के लिए कहा तो सामने मजदूरों ने हाथ जोड़कर कहा हम आपके हक के लिए आए हैं, कोई तमाशा करने के लिए नहीं आए हैं। मजदूर संघ के नेता मजदूरों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि एक मौका दो लेकिन मजदूर मानने को तैयार नहीं हैं और नारेबाजी शुरू कर दी है वे अपने नेता की भी बात मानने को तैयार नहीं हैं वे अपनी मांग पर अडिग नजर आ रहे हैं।

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श्रमिकों ने कहा कि, तारीख पर तारीख नहीं चाहिए हमें हिसाब चाहिए हम अपना हक मांगते हैं हम भीख नहीं मांगते नारों के साथ मजदूरों का उग्र विरोध कर रहे मजदूरों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन वे समझने को तैयार नहीं हैं और एक ही मांग पर अड़े हैं कि हमारी मांग पूरी नहीं होगी तो हम कहीं नहीं जाएंगे। हमें रविवार की छुट्टी और पूरा वेतन मिलना चाहिए।

अरविंद राज विश्वकर्मा ने बताया कि, एक ही मांग है कि हर रविवार को छुट्टी मिलनी चाहिए। हम भी इंसान हैं और रोजाना 12-12 घंटे काम करते हैं। इसलिए रविवार की छुट्टी मिलनी चाहिए और पूरा वेतन भी मिलना चाहिए। फिलहाल खाने-पीने या खाना बनाने का भी समय नहीं मिलता और नींद भी पूरी नहीं होती। हमें सप्ताह में एक दिन यानी रविवार को छुट्टी मिलनी ही चाहिए।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि, प्रशासन की ओर से केवल तारीख पर तारीख ही मिल रही है, जैसे अदालत में सनी देओल का डायलॉग है; दूसरा कुछ भी नहीं हो रहा है। उन्हें तारीख पर तारीख नहीं चाहिए, केवल रविवार की छुट्टी चाहिए। पिछले एक महीने से ऐसा ही चल रहा है और कोई उनकी बात नहीं सुन रहा है, आम जनता की किसी को परवाह नहीं है। अगर उनकी यह मांग पूरी नहीं की गई, तो वे आगे बढ़कर रास्ते रोक देंगे, चक्काजाम करेंगे और जो कुछ भी करना पड़ेगा वह सभी आंदोलन करेंगे। मजदूरों का उग्र विरोध मजदूरों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन वे समझ नहीं रहे हैं और एक ही मांग पर अड़े हैं कि हमारी मांग पूरी नहीं होगी तो हम कहीं नहीं जाएंगे।

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पहले दिए गए ज्ञापन की अवधि पूरी होने के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई संतोषजनक कार्रवाई या जवाब नहीं मिलने से श्रमिकों में रोष भड़क उठा है। इस संबंध में मजदूर यूनियन के प्रतिनिधि अजय डी. दुबे ने बताया था कि, अगर आगामी 30 तारीख तक हमारी मांगों और न्यायसंगत अधिकारों का समाधान नहीं किया गया, तो हमें अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करके भूख हड़ताल और धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सरकारी कानूनों का अमल संबंधित विभागों द्वारा करवाया जाए और कामगारों को न्याय मिले इसके लिए यूनियन उग्र आंदोलन करेगी।

कलेक्टर ने सोमवार को चर्चा के लिए बुलाया होने के बावजूद श्रमिक जाने के लिए तैयार नहीं हुए, तब SP विजय मल्होत्रा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी कि, जिन श्रमिकों को सोमवार की मीटिंग में आना हो वे अभी निकल जाएं, लेकिन जिन्हें पुलिस या प्रशासनिक तंत्र के साथ टकराव या संघर्ष ही करना है वे अपने स्थान पर ही रुके रहें।

DCP नकुम ने कहा कि, अगर हमारी बात नहीं मानी तो हमारे साथ टकराव होगा, एफआईआर दर्ज होगी। ACP विजय मल्होत्रा ने कहा, आपकी मांगों को आपके नेता ने कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। आप यहां से जगह खाली करें।

मजदूरों ने कहा कि, तारीख पर तारीख, तारीख के बाद तारीख... कितनी बार आएगी? यह तो सनी देओल का प्रसिद्ध डायलॉग ही बन गया है! पिछली बार भी सुनवाई के लिए मंगलवार का समय दिया था, लेकिन कुछ भी परिणाम नहीं आया। इस दौरान व्यापारियों की बैठकें हुईं और कई बैठकें भी हुईं, फिर भी कुछ भी सुनने को नहीं मिला है। क्या भारत में कोई कानून ही नहीं है? अब 30 तारीख का नया समय देने की बात हो रही है, लेकिन पिछली बार मंगलवार की तारीख देने के बावजूद कुछ नहीं हुआ तो अब लोगों को इन तारीखों पर विश्वास नहीं रहा है। अभी कहा जा रहा है कि आज ही सुनवाई होगी, लेकिन अगर समाधान नहीं आया तो लोग भूख हड़ताल पर बैठेंगे और विशाल रैली भी आयोजित करेंगे।

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