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गुजरात सरकार के कुछ महत्वपूर्ण फैसले जो कारोबारियों से लेकर आमजन तक को पहुंचाएगी राहत, किराया डिपॉजिट में मनमानी भी खत्म होगी
गांधीनगर। गुजरात विधानसभा का मानसून सत्र कारोबारियों और आमजन के लिए खास रहा। सरकार ने कई ऐसे संशोधिक विधयेक पास किये जो छोटे दुकानदारों के साथ-साथ बड़े व्यापारियों को भी राहत देगा। साथ ही किरायेदारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया जो मकान मालिकों को मनमानी डिपॉजिट लेने से रोकता है। बता दें कि विधानसभा में आखिरी दिन गुजरात ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और किराया संशोधन जैसे जरूरी विधेयक पारित किए गए। सबसे पहले बात करते हैं कि गुजरात ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक में हुए संशोधन के बारे में।
इसके तहत अब मॉल, रेस्टोरेंट-होटल, कैफे और दुकानों जैसे प्रतिष्ठान 24 घंटे खुले रखे जा सकेंगे। पुलिस या अन्य स्थानीय प्राधिकरण इन्हें किसी तरह बंद नहीं करा सकेंगे। हालांकि, इन प्रतिष्ठानों को अपने आसपास स्वच्छता, ट्रैफिक और सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। गुजरात के महानगरों में रहने वाले लोगों को इससे काफी फायदा होगा। उनके कारोबार में इजाफा होने के साथ-साथ आम लोगों को भी इससे फायदा होगा। दरअसल, सूरत, अहमदाबाद जैसे शहरों में बड़ी आबादी बाहर से कारोबार के लिए आते हैं। ऐसे में उन्हें रात में खाने-पीने की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, इन शहरों में बड़ी संख्या में प्रवासी रहते हैं जो यही रहकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। सरकार के इस फैसले के बाद इन्हें भी राहत मिलेगी।
हालांकि देर रात तक रेस्टोरेंट-होटल, कैफे और दुकानों के खुले रहने से क्राइम बढ़ने की संभावना भी अधिक रहती है। ऐसे में पुलिसिंग व्यवस्था को ओर मजबूत करना होगा। कई असामाजिक तत्व रात के समय उपद्रव करते हैं। इसके लिए पुलिस को सख्ती से निपटना होगा।
दूसरे राज्यों में पंजीकृत डॉक्टर भी सेल्फ डिक्लेरेशन से करा सकेंगे पंजीकरण
गुजरात ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल में किए गए संशोधनों के अनुसार अब दूसरे राज्यों में पंजीकृत डॉक्टरों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर गुजरात में पंजीकरण लेना आसान होगा। इससे चिकित्सा सेवाओं और पेशेवर स्तर पर काम करने की प्रक्रिया तेज होगी।
मकान मालिक 3 महीने से ज्यादा के किराए की डिपॉजिट नही ले सकेंगे
वहीं दूसरे विधेयक की बात करें तो राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी मकान मालिक 3 महीने के किराए से ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले सकेगा। दरअसल, गुजरात सरकार ने किराए के मकानों और व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़े दशकों पुराने कानून में बड़े बदलाव किए हैं। संशोधन विधेयक में 1947 के गुजरात रेंट्स होटल एंड लॉजिंग कंट्रोल एक्ट को खत्म कर करार आधारित नई किराया व्यवस्था लागू करने का प्रावधान है। नए कानून के तहत किराया समझौता लिखित होना जरूरी होगा और इसकी जानकारी रेंट अथॉरिटी को देनी होगी। मकान खाली करने के बाद वैध कटौती के बाद डिपॉजिट एक महीने के भीतर वापस करना होगा। इसके अलावा, गुमास्ता कानून में अब पंजीकरण के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन और सेल्फ-सर्टिफाइड दस्तावेजों के आधार पर आवेदन करने का प्रावधान किया गया है। पंजीकरण के आवेदन में इंस्पेक्टर की भूमिका खत्म कर दी गई है।
जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर भी जटिलताएं दूर की गईं
टुकड़ा धारा-47 में व्यापक संशोधन किए गए हैं। 75 साल पुरानी जटिलता अब खत्म होगी। संशोधन विधेयक में 1948 से अब तक हुए टुकड़ा धारा के सभी उल्लंघनों को किसी भी तरह के जुर्माने के बिना नियमित करने का प्रावधान किया गया है। विधेयक में जोड़ी गई नई धारा-5(4) के तहत राज्य सरकार ने सभी स्थानीय क्षेत्रों में एक समान क्षेत्रफल 10 गूंठा (1012 वर्ग मीटर) तय किया है। इस संशोधन से जमीन की खरीद-बिक्री में स्थानीय स्तर की जटिलताएं दूर होंगी।
इधर, सूखे के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा
प्रश्नकाल के दौरान बारिश की कमी और किसानों के फसल नुकसान के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सवाल-जवाब हुए। विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि विजय रूपाणी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में लगातार चार सप्ताह तक बारिश नहीं होने पर सूखा घोषित करने का परिपत्र जारी किया गया था। उन्होंने सरकार से पूछा कि कुछ तालुकों में चार सप्ताह से बारिश नहीं हुई है, तो क्या ऐसे क्षेत्रों में सूखा घोषित किया जाएगा? इसके जवाब में मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि राज्य सरकार भारत सरकार के ड्रॉट मैनेजमेंट मैन्युअल के अनुसार कार्रवाई करती है और इसी आधार पर सूखे को लेकर फैसला लिया जाएगा।
फसल बर्बाद होने पर सरकार उचित फैसला करेगी: ऋषिकेश पटेल
विधायक विमल चुडास्मा ने बारिश की कमी के कारण जिन क्षेत्रों में फसल बर्बाद हुई है, वहां किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की। इसके जवाब में संसदीय मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि किसानों को दिए जाने वाले लोन पर ब्याज नहीं लिया जाता है। फसल बर्बाद होने के मामले में सरकार उचित फैसला करेगी।
सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के कुछ जिलों में बारिश की कमी
कांग्रेस विधायक अमित चावड़ा ने ब्याज माफी को लेकर लोगों में गलत संदेश जाने की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि एनपीए हुए मामलों में ही लोन माफी मिलती है। सरकार के बयान के अनुसार 3 सितंबर 2026 तक मौसम में कुल औसत 94.43% बारिश दर्ज हुई है। हालांकि, सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के कुछ जिलों में बारिश की कमी है। इससे किसान चिंतित है। इस ओर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।

