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उत्तराखंड: पूर्व CM के PA के घर छापा, ₹32 लाख कैश, 200 ग्राम सोना और करोड़ों की लग्जरी घड़ियां बरामद
एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने उत्तराखंड सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन कमीशन (UKSSSC) द्वारा 2016 में आयोजित विलेज पंचायत डेवलपमेंट ऑफिसर (VPDO) की परीक्षा में कथित बड़े घोटाले को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। ED के देहरादून सब-ज़ोनल ऑफिस ने 10 सितंबर, 2024 को देहरादून में कई जगहों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत की गई थी। ED के अनुसार, यह मामला 2016 की VPDO परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों से पैसे लेकर OMR शीट्स में छेड़छाड़ करने और परीक्षा के परिणामों में हेरफेर करने से संबंधित है।
एजेंसी ने चंदन सिंह जीना के आवास की भी तलाशी ली थी। जीना वर्तमान में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत के पर्सनल असिस्टेंट (PA) के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले, 2009 से 2017 के दौरान रावत के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में वे उनके 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' (OSD) के रूप में भी काम कर चुके हैं। ED की जांच में सामने आया है कि VPDO परीक्षा की OMR शीट्स को कथित तौर पर UKSSSC के सुरक्षित स्थान से कथित तौर पर तत्कालीन सचिव के निजी आवास पर ले जाया गया था।
छापेमारी के दौरान क्या मिला?
ED के अनुसार, चंदन सिंह जीना के घर की तलाशी के दौरान 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी मिली थी। इसके अलावा, लगभग 200.5 ग्राम सोना भी मिला था। जब्त की गई वस्तुओं में 13 सोने के सिक्के, 7 सोने की चेन और Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice जैसी 12 लग्जरी ब्रांड की घड़ियां मिलीं। ED के अनुसार इन वस्तुओं की कुल कीमत लगभग 1.28 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। 12 घड़ियों में से कुछ का मूल्यांकन अभी अलग से किया जा रहा है, इसलिए कुल आंकड़ा बढ़ सकता है।
ED ने PMLA की धारा 17(1A) के तहत चंदन सिंह जीना और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया है। इन खातों में कुल ₹52.16 लाख की राशि जमा थी। जांच के हिस्से के रूप में जीना का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। ED के अनुसार, जांच में सामने आया है कि चंदन सिंह जीना ने नकद में बड़ी रकम खर्च की थी, लेकिन इस खर्च के लिए कोई स्पष्ट स्रोत नहीं बताया गया था। एजेंसी का कहना है कि मिली नकदी, सोना और अन्य संपत्तियां उनकी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अनुपातहीन हैं।
घोटाला कैसे किया गया
आरोप है कि OMR शीट्स में से ऐसे रोल नंबर अलग किए जाते थे जिनमें कम उत्तर भरे गए थे। इसके बाद ये रोल नंबर निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को सौंपे जाते थे। पैसे के बदले एजेंसी के कर्मचारी कथित तौर पर OMR शीट्स पर उत्तर के सर्कल (बबल्स) भरते और उत्तरों में बदलाव करते थे। इसके बाद, शीट्स को फिर से सील कर दिया जाता था। ED का दावा है कि इस काम के लिए अवैध भुगतान बिचौलियों के माध्यम से किया जाता था।

