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सूरत: पुलिस ने लापरवाही से ड्राइविंग का केस दर्ज किया हो तो भी मृतक को बीमा लाभ से वंचित नहीं कर सकते: कोर्ट
मोटरसाइकिल दुर्घटना में मृत्यु हुए बीमाधारक के खिलाफ पुलिस ने बीमाधारक द्वारा मोटरसाइकिल को लापरवाही और गफलतभरे तरीके से चलाने का अपराध दर्ज किया हो, केवल इस आधार पर जीवन बीमा पॉलिसी के तहत मिलने वाले एक्सिडेंट बेनिफिट का क्लेम नकारा नहीं जा सकता, ऐसा महत्वपूर्ण तथा अनेक वाहन चालकों के लिए उपयोगी साबित होने वाला फैसला सूरत जिला ग्राहक विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश आर. एल. ठक्कर और सदस्य पूर्वी वी. जोशी ने सुनाया है और मृतक की विधवा तथा नाबालिग संतानों को रु.12.50 लाख का क्लेम 7% ब्याज के साथ चुकाने का LIC को आदेश दिया है।
केस की जानकारी के मुताबिक सूरत के शिकायतकर्ताओं ने सूरत जिला ग्राहक विवाद निवारण आयोग के समक्ष एडवोकेट श्रेयस देसाई, प्राची अर्पित देसाई और ईशान श्रेयस देसाई के माध्यम से ग्राहक शिकायत दाखिल की थी शिकायत की हकीकत ऐसी थी कि LIC से रु. 12,50,000/- की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। यह पॉलिसी डबल एक्सीडेंट बेनिफिट सहित थी यानी बीमित व्यक्ति की दुर्घटना से मृत्यु होने की स्थिति में दूसरे अतिरिक्त रु. 12,50,000/- का एक्सिडेंट बेनिफिट क्लेम भी मिलने योग्य था।
ता. 4-12-2017 के रोज सुबह लगभग 11.30 बजे मोटरसाइकिल पर नौकरी पर जा रहे थे। तब शहर सूरत में ताड़वाड़ी पटेल पार्क के पास सड़क पर एक महिला को बचाने के प्रयास में उनकी मोटरसाइकिल सड़क पर लगे बैरिकेड से टकरा गई थी। दुर्घटना में उनके सिर में गंभीर चोट आई थी और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
LIC ने जीवन बीमा की मूल रु. 12.50 लाख की राशि चुका दी थी, लेकिन डबल एक्सीडेंट क्लेम की अतिरिक्त रु. 12.50 लाख की Double Accident Benefit का क्लेम नामंजूर कर दिया था। LIC का कहना था कि पुलिस की अंतिम जांच के अनुसार मृतक स्वयं मोटरसाइकिल को लापरवाही और गफलतभरे तरीके से चला रहे थे और उनके खिलाफ ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई हुई होने के कारण पॉलिसी की शर्तों के अनुसार एक्सिडेंट बेनिफिट मिलने योग्य नहीं था।
इस निर्णय के खिलाफ मृतक की विधवा और संतानों (शिकायतकर्ताओं) ने सूरत ग्राहक आयोग में शिकायत की थी। शिकायतकर्ताओं की ओर से एडवोकेट श्रेयस देसाई, प्राची अर्पित देसाई और ईशान श्रेयस देसाई ने दलील दी थी कि दुर्घटना हुई और दुर्घटना के कारण ही बीमाधारक की मृत्यु हुई, यह बात निर्विवाद है। लापरवाही या गफलतभरे तरीके से वाहन चलाने का आरोप एक ट्रैफिक नियम का उल्लंघन माना जाए। उसके कारण दुर्घटना नहीं हुई है या किसी अन्य तीसरे व्यक्ति को कोई चोट/नुकसान नहीं हुआ है, इसलिए केवल लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप के आधार पर पॉलिसी का एक्सिडेंट बेनिफिट नकारा नहीं जा सकता। पॉलिसी में जिस प्रकार के कानून के उल्लंघन के कारण लाभ नहीं देने का प्रावधान है वह इस केस में लागू नहीं होता।
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें, पुलिस के दस्तावेज, बीमा पॉलिसी की शर्तें तथा प्रस्तुत किए गए फैसलों का अध्ययन करने के बाद दर्ज किया कि मृतक मोटरसाइकिल चला रहे थे और दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोट लगने से उनकी मृत्यु हुई थी, यह तथ्य स्पष्ट है। केवल मोटरसाइकिल को लापरवाही और गफलतभरे तरीके से चलाने के आरोप के आधार पर एक्सिडेंट बेनिफिट नकारा नहीं जा सकता। LIC द्वारा क्लेम नामंजूर करना उचित नहीं है।
इसलिए सूरत जिला ग्राहक आयोग के अध्यक्ष आर. एल. ठक्कर और सदस्य पूर्वी वी. जोशी ने शिकायत मंजूर कर LIC को शिकायतकर्ताओं को रु. 12,50,000/- एक्सिडेंट बेनिफिट की राशि शिकायत दाखिल होने की तारीख 11-10-2019 से वार्षिक 7 प्रतिशत ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया है।
इसके अलावा शिकायतकर्ताओं को हुए मानसिक त्रास, आघात और परेशानी के लिए रु. 3,000/- तथा शिकायत खर्च के तौर पर रु. 2,000/- चुकाने का भी आदेश किया गया है। आयोग ने यह राशि आदेश की तारीख से 30 दिनों में चुकाने को कहा है।

