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भारत में 5 साल में अरबपतियों की संख्या चार गुना हुई; जानिए देश में कितने हैं Billionaires?
भारत में अति-धनी व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालिया आयकर रिटर्न (ITR) डेटा ने इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश की है। पिछले पांच वर्षों में, ₹100 करोड़ या उससे अधिक की आय घोषित करने वाले लोगों की संख्या चार गुना से अधिक बढ़ गई है। सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि आकलन वर्ष 2025-26 में ऐसे व्यक्तियों की संख्या बढ़कर 576 हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में उच्च आय वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि आकलन वर्ष 2025-26 के लिए 576 व्यक्तियों ने अपने आयकर रिटर्न में ₹100 करोड़ या उससे अधिक की कुल आय घोषित की थी। पांच साल पहले यानी आकलन वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा केवल 142 था। इस प्रकार पांच वर्ष की अवधि में यह संख्या चार गुना से अधिक बढ़ गई है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, आकलन वर्ष 2022-23 में 301 व्यक्तियों ने 100 करोड़ से अधिक की आय घोषित की थी। 2023-24 में यह आंकड़ा घटकर 284 हो गया था। हालांकि, अगले दो वर्षों में इसमें फिर वृद्धि हुई, 2024-25 में यह 415 तक पहुंचा और 2025-26 में बढ़कर 576 हो गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर कानून के तहत 'अरबपति' शब्द की कोई आधिकारिक या कानूनी परिभाषा नहीं है। इसलिए, सरकार ने उन व्यक्तियों का डेटा साझा किया है, जिन्होंने अपने टैक्स रिटर्न में 100 करोड़ या उससे अधिक की कुल आय घोषित की है।
सरकार का कहना है कि देशभर में रोजगार और समावेशी विकास को गति देने के लिए विभिन्न कदम लागू किए गए हैं। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 2022 में 3.6% थी, जो 2025 में घटकर 3.1% हो गई है। सरकार ने बताया है कि प्रगतिशील आयकर व्यवस्था और भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च में वृद्धि जैसे कदमों के माध्यम से आय और संपत्ति की असमानता कम करने और रोजगार बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
ये आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
हालिया ITR डेटा दर्शाता है कि भारत में उच्च आय वाला वर्ग तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, इससे देश की बढ़ती संपत्ति के बीच आर्थिक असमानता को कैसे संतुलित किया जाए, यह सवाल भी उठता है। आने वाले वर्षों में विकास और समान अवसरों के बीच संतुलन स्थापित करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

