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रुपये में ऐसी गिरावट…93 के पार पहुंचा, विदेशी निवेशक डर से छोड़ रहे भारतीय बाजार, आमलोगों को झेलनी पड़ सकती है महंगाई
नई दिल्ली। दुनिया में चल रहे ग्लोबल तनाव के चलते भारतीय रुपये में अभूतपूर्व गिरावट दर्ज की गई है। ऐसी गिरावट संभवत: पहले कभी दर्ज नहीं की गई है। पहली बार पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के पार निकल गया है। ये एक अमेकिरी डॉलर के मुकाबले अब 93.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशक द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने की वजह से भारत की मुद्रा को कमजोर कर दिया है। इसके साथ ही मजबूत डॉलर और दुनियाभर के मार्केट में अनिश्चितता ने स्थिति को और खराब कर दिया है। अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो आगे भी रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये को कमजोर कर दिया
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे जंग की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। इससे रुपये पर दबाव आया है। पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते तेल की सप्लाई पर खतरा पैदा हुआ है। कच्चा तेल करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होते ही डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ता है। उल्लेखनीय है कि रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार 93 के स्तर को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह 93.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया था, हालांकि अभी यह थोड़ा संभलकर 93.12 पर आ गया है। इस महीने की शुरुआत में रुपया 92 के स्तर पर था।
खाड़ी देशों के अब तेल ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है
ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। ईरान के तेल उत्पादन वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, ईरान भी अब दुश्मन देशों के तेल ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रहा है। इससे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिसके लिए हमें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हो गया।
विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं
जंग और डॉलर की बढ़ती मांग की वजह से विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। अब तक मार्च महीने में भारतीय शेयर बाजार से लगभग 8 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। ग्लोबल अनिश्चितता और युद्ध के डर से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों जैसे अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा रहे हैं। इतनी भारी बिकवाली से रुपए पर दबाव बहुत बढ़ गया है। दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की सप्लाई बाधित हुआ है। यह वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का 20% और भारत का लगभग आधा तेल गुजरता है। अभी भी इस समुद्री रास्ते को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
रुपया कमजोर होना भारत के लिए परेशानी का सबब है। इसका प्रभाव आम लोगों पर पड़ेगा। दरअसल, आयात महंगा हो जाएगा। विदेश से आयात किए जाने वाले मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे होंगे। क्रूड ऑयल जैसी चीजों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। इसके अलावा पढ़ाई भी महंगी हो जाएगी। इसलिए अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह हालात भारत की विकास दर को कम कर सकती हैं। हालांकि रुपया कमजोर होने से निर्यातकों को फायदा होता है। आईटी सेक्टर, फार्मा और कपड़ा उद्योग की कंपनियों को अपने उत्पादों के बदले डॉलर में भुगतान मिलता है। जब वे उन डॉलर्स को रुपए में बदलते हैं, तो उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा रुपए मिलते हैं।

