गुजरात टेक्सटाइल इंडस्ट्री पिछले पांच वर्षों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक बना, इसमें सूरत का महत्वपूर्ण योगदान

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सूरत। टैरिफ वॉर के बीच गुजरात के टेक्सटाइल इंडस्ट्री को लेकर एक अच्छी खबर है। प्रदेश में कपड़ा का कारोबार बूम पर है। निर्यात की दृष्टि से भी देखें तो गुजरात काफी मजबूत स्थिति में है। दरअसल, गुजरात ने भारत के कपड़ा निर्यात बाजार में एक बार फिर से महत्वपूर्ण उभरती भूमिका निभाई है। पिछले पांच वर्षों में राज्य ने देश के दूसरे सबसे बड़े कपड़ा निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। इसमें सूरत का स्थान महत्वपूर्ण है। विदेशों में गारमेंट निर्यात के मामले में सूरत अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2023-2024 में, जहां तमिलनाडु निर्यात में पहले स्थान पर रहा, वहीं गुजरात ने 5,749 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

दरअसल, राज्य की नई कपड़ा नीति आने वाले समय में इस क्षेत्र का स्वरूप बदल सकती है। गुजरात पहले से ही कॉटन यार्न और फैब्रिक के बाजार में अग्रणी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला में इसकी पूरी क्षमता अभी तक सामने नहीं आई है। नई कपड़ा नीति का उद्देश्य गुजरात को एक वैश्विक कपड़ा शक्ति के रूप में स्थापित करना है। इसमें विशेष रूप से गारमेंट निर्माण में निवेश को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। नीति में तकनीकी कपड़ों और मूल्य वर्धित उत्पादन को प्राथमिकता दी गई है, जो आने वाले वर्षों में गुजरात की स्थिति को और सुदृढ़ बना सकते हैं।

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गारमेंट इंडस्ट्री अब सरकार की प्राथमिकता में शामिल 

बता दें कि कपास की कीमतों में वृद्धि के कारण कपड़ा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी। अब जबकि कपास की कीमतों के आयात पर लगने वाला शुल्क पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है तो यह भारत के गारमेंट इंडस्ट्री को और मजबूती प्रदान करेगा। केंद्र सरकार भी इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें कर रही है। जैसे पीएम मित्र योजना पर सरकार तेजी से काम कर रही है। यह केवल गुजरात में ही नहीं बल्कि देश के सात राज्यों में पीएम मित्र पार्क योजना को अमलीजामा पहनाने की कोशिश की जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य विश्व स्तरीय कपड़ा पार्क स्थापित करना है।

गुजरात में कपड़ा इंडस्ट्री को लेकर असीम संभावनाएं हैं

गुजरात की कपड़ा विकास यात्रा 2012 की नीति से शुरू हुई थी। कपास यार्न और फैब्रिक के निर्यात में गुजरात की बड़ी भूमिका है। हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप में मांग में कमी आई, लेकिन अब हालात अब धीरे-धीरे सुधर रहे हैं। गुजरात के पास अभी भी बहुत संभावनाए हैं, जिन्हें नीति, निवेश और वैश्विक रुझानों के साथ सही दिशा में बढ़ाया जा सकता है।

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