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शेयर बाजार में कोहराम: 5 मिनट में स्वाहा हुए 15 लाख करोड़, इन 7 कारणों ने बिगाड़ा बाजार का खेल
भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार की सुबह किसी डरावने सपने से कम नहीं रही। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली और महज 5 मिनट के भीतर निवेशकों के करीब 15 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप तेजी से घटकर 437 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
बाजार का हाल:
सेंसेक्स: लगभग 2,400 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,424 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी 50: 700 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,750 के स्तर पर पहुंच गया।
सबसे ज्यादा प्रभावित: इंडिगो के शेयर 8% तक टूटे, जबकि टाटा स्टील, L&T, SBI और मारुति सुजुकी में 5% की गिरावट दर्ज की गई। PSU बैंक इंडेक्स भी 5% से ज्यादा लुढ़क गया।

बाजार में ऐतिहासिक गिरावट के 7 मुख्य कारण
1. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगी आग
बाजार में दहशत की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के बढ़ते दाम हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से सप्लाई रुकने की आशंका है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 118 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहली बार है जब तेल ने 100 डॉलर का स्तर पार किया है।
2. मिडिल-ईस्ट में भीषण युद्ध के हालात
इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों और उनके बेटे मोजतबा खामेनेई द्वारा कमान संभालने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने निवेशकों को वैश्विक अस्थिरता के डर से भर दिया है।
3. डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
कच्चे तेल की महंगाई का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। रुपया डॉलर के मुकाबले 92.19 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। तेल खरीदने के लिए भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल
अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.208% हो गई है। जब सुरक्षित सरकारी बॉन्ड अच्छा रिटर्न देने लगते हैं, तो निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेश से पैसा निकालकर वहां लगाने लगते हैं।
5. विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, मार्च के पहले हफ्ते में ही विदेशी निवेशकों ने लगभग 16,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। पिछले 4 ट्रेडिंग सत्रों में कुल निकासी 21,829 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

6. वैश्विक बाजारों में हाहाकार
गिरावट का यह सिलसिला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। जापान का निक्केई 6% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8% तक टूट गया। चीन और हॉन्गकॉन्ग के बाजारों में भी भारी बिकवाली देखी गई, जिससे भारतीय बाजार का सेंटिमेंट खराब हुआ।
7. बढ़ती महंगाई का डर
रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार, युद्ध लंबा खिंचने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी। इससे आम जरूरत की चीजों के दाम बढ़ेंगे और RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाएगा।
बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडेक्स India VIX 20% बढ़कर 23.90 पर पहुंच गया है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए। इतिहास गवाह है कि युद्ध या भू-राजनीतिक संकट का प्रभाव लंबे समय तक नहीं रहता।
अगला कदम: तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए 22,500 का स्तर बचाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और फार्मा जैसे सेक्टर इस संकट के बाद भी मजबूती से वापसी कर सकते हैं।

