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न हवा भरने का झंझट, न पंक्चर का डर, आ गए 'कचरे' से बने शानदार एयरलेस टायर
नई दिल्ली। वो दिन दूर नहीं जब सड़कों पर न तो टायर पंक्चर होने का डर होगा और न ही हवा चेक कराने की झंझट। दुनिया की प्रसिद्ध टायर निर्माता कंपनी Michelin ने ऑटोमोबाइल जगत में एक क्रांतिकारी बदलाव की नींव रखी है। कंपनी ने ऐसे 'एयरलेस' यानी बिना हवा वाले टायर बनाया है, जो न केवल पंक्चर-प्रूफ हैं, बल्कि 'कचरे' को रीसाइकिल करके तैयार किए गए हैं। इससे लोगों की जिंदगी आसान होगी। कार का रखरखाव भी सस्ता हो जाएगा।
क्या है UPTIS तकनीक
इस तकनीक को 'यूनिक पंक्चर-प्रूफ टायर सिस्टम' (UPTIS) नाम दिया गया है। इन टायरों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें बनाने में करीब 46 प्रतिशत रीसाइकिल सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। दिखने में ये टायर पारंपरिक टायरों से काफी अलग और स्टाइलिश हैं। इसको बनाने में प्लास्टिक मैट्रिक्स के साथ 'ग्लास फाइबर' का इस्तेमाल किया गया है। इसकी विशेष इंजीनियरिंग की वजह से टायर की बाहरी परत लचीली बनी रहती है, जबकि अंदरूनी ढांचा इतना मजबूत होता है कि वह बिना हवा के भी गाड़ी का पूरा वजन सह लेता है।
पर्यावरण के लिहाज से यह एक बड़ी उपलब्धि है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल लगभग 18 प्रतिशत टायर समय से पहले ही खराब होकर कचरा बन जाते हैं, क्योंकि वे पंक्चर हो जाते हैं या उनमें हवा का दबाव सही नहीं होता। मिशेलिन के ये एयरलेस टायर इस कचरे को कम करने में सक्षम हैं। हाल ही में म्यूनिख ऑटो शो में इन टायरों का सफल प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नवाचार ऑटो इंडस्ट्री की पूरी सूरत बदलने की ताकत रखता है।
पिछले कई दशक से कंपनी इन टायरों को बनाने में लगी है। अभी इन्हें बाजार में उपलब्ध होने में दो से तीन साल का समय और लग सकता है। मिशेलिन को उम्मीद है कि अगले 30 सालों में वह सिर्फ एयरलेस टायर ही बनाएगी। इन्हें बनाने में 100 फीसदी रीसाइकिल्ड मटीरियल का इस्तेमाल किया जाएगा।

