- Hindi News
- राष्ट्रीय
- कोटेश्वर गुरुकुल का स्वामी महिला के साथ होटल में पकड़ा गया
कोटेश्वर गुरुकुल का स्वामी महिला के साथ होटल में पकड़ा गया
स्वामीनारायण संप्रदाय अक्सर विवादों में बना रहता है। कभी स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों के बयानों के कारण तो कभी उनके संप्रदाय की पुस्तकों के कारण। इसी बीच इस संप्रदाय के एक संत से जुड़ा एक और विवाद सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि अहमदाबाद के कोटेश्वर गुरुकुल के स्वामी रामकृष्ण एक महिला से मिले थे। इस स्वामी का एक वीडियो भी इस समय वायरल हो रहा है, जिसमें स्वामी पैंट और टी-शर्ट पहनकर जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इस विवाद में स्वामीनारायण मंदिर अपनी सफाई देता नजर आ रहा है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस मामले की जानकारी मिलते ही स्वामी को निकाल दिया गया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पूरे मामले को मंदिर की ओर से दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वामी रामकृष्ण दास कोटेश्वर गुरुकुल के मुख्य पद पर आसीन थे। उन्हें एक महिला के साथ होटल में देखे जाने से विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में सबूत सामने आते ही भक्तों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए कालूपुर स्वामीनारायण मंदिर ट्रस्ट द्वारा तत्काल प्रभाव से जांच शुरू की गई थी।
गौरतलब है कि एक ओर मंदिर प्रशासन सफाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यह चर्चाएं भी चल रही हैं कि पूरे मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया था। जब मीडिया और अन्य लोगों ने इस संबंध में अधिक जानकारी पाने के लिए मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो अधिकांश पदाधिकारियों के फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहे थे, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस साधु द्वारा गुरु को शर्मसार करने वाला कृत्य किए जाने से हंगामा मच गया है और भक्तों में भी भारी रोष देखा जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने भी इस मामले की गंभीरता से संज्ञान लिया और साधु के वेश में रंगरलियां मनाने वाले स्वामी रामकृष्णदासजी को निकाल दिया है।
मंदिर पक्ष का एक दावा यह भी है कि स्वामी ने स्वेच्छा से मंदिर छोड़ दिया है। पूरे मामले को मंदिर की ओर से दबाने के प्रयास किए जाने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। वायरल तस्वीर में स्वामी रामकृष्ण दास पैंट, शर्ट, टोपी और घड़ी के साथ एक सामान्य व्यक्ति जैसे ही दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल यह बात सामने आ रही है कि रामकृष्ण स्वामी ने भगवा वस्त्र त्यागकर सांसारिक जीवन की शुरुआत कर दी है। लेकिन सवाल यह है कि धर्म के नाम पर ऐसे ढोंग कितने हद तक जायज हैं और आखिर कब तक धर्म के नाम पर ऐसे ढोंग किए जाते रहेंगे?

