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देशभर में प्रदर्शन और बवाल के बाद भी सरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों नहीं ले रही है, मोदी की छवि समेत इसके पीछे कई बड़े कारण हैं…
नई दिल्ली। नीट एग्जाम पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। संसद से लेकर सड़कों तक विपक्ष, छात्र संगठन और विभिन्न सामाजिक समूह लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, संसद मार्च, छात्रों के प्रदर्शन, दिल्ली में पुलिस कार्रवाई, कांग्रेस का प्रदर्शन और संसद के भीतर विपक्ष का हंगामा- इन सबके केंद्र में सिर्फ एक मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। इसके बावजूद अब तक केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि उनसे इस्तीफा लिया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई रणनीतिक और राजनीतिक कारण हैं। आइए इस्तीफा नहीं लेने के पूरे समीकरण को समझते हैं-
1. केंद्र नहीं चाहता है कि जनता के बीच संदेश जाए कि सरकार झुक गई
सबसे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि केंद्र सरकार किसी भी हाल में यह संदेश नहीं देना चाहती कि उसने आंदोलन या विपक्ष के दबाव में फैसला लिया है। मोदी सरकार की छवि से भी यह मामला जुड़ा हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यूपीए सरकार के दौरान विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बाद मंत्रियों के इस्तीफों का सिलसिला शुरू हुआ था। तब कांग्रेस को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस वर्तमान सरकार ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी सरकार उसी अनुभव से सीख लेकर चल रही है। यदि धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाता है तो विपक्ष इसे अपनी बड़ी जीत बताएगा और यह जनता के बीच यह संदेश जाएगी कि सरकार दबाव के आगे झुक गई। यही वजह है कि सरकार शुरुआत से यह कहती रही है कि वह व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठा रही है, न कि दबाव में फैसले ले रही है।
2. सिर्फ आरोपों पर इस्तीफा नहीं लिया जाएगा, ऐसी नीति पर सरकार चल रही
दूसरा बड़ा कारण मोदी सरकार की वह कार्यशैली मानी जाती है जिसमें केवल आरोप लगने या विपक्ष की मांग के आधार पर मंत्रियों से इस्तीफा नहीं लिया जाता। बता दें कि साल 2015 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और तत्कालीन राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर ललित मोदी प्रकरण को लेकर विपक्ष ने इस्तीफे की मांग की थी। उस समय तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा था कि एनडीए सरकार केवल आरोपों के आधार पर मंत्रियों से इस्तीफा नहीं लेती। इसके बाद से ही सरकार में यह परंपरा चल पड़ी है। बाद के वर्षों में पूर्व गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठी, लेकिन सरकार ने किसी का इस्तीफा नहीं लिया।
3. पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान के पुत्र हैं धर्मेंद्र प्रधान, मजबूत चेहरा हैं
धर्मेंद्र प्रधान की संगठनात्मक और राजनीतिक स्थिति भी उनके पक्ष में एक अहम कारण मानी जा रही है। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान के पुत्र हैं। छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं। 1998 से वे भाजपा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और लंबे समय से संगठन तथा सरकार दोनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को जमीन पर लागू करने और सफल बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। भाजपा के भीतर उनकी पहचान लो-प्रोफाइल, संगठननिष्ठ और गंभीर नेता की रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन और सरकार दोनों में उनकी मजबूत पकड़ भी ऐसा कारण है जिसकी वजह से भाजपा फिलहाल कोई कठोर फैसला लेने के पक्ष में नहीं दिख रही।
4. सरकार अभी चुनावी नफा-नुकसान समझने की कोशिश कर रही है
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार किसी भी बड़े आंदोलन पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले उसके राजनीतिक प्रभाव और जनसमर्थन का आकलन करती है। सरकार यह देखती है कि किसी आंदोलन का असर आम जनता पर कितना पड़ रहा है और उसका चुनावी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि किसी आंदोलन का व्यापक जनसमर्थन दिखाई देता है और उसका राजनीतिक असर बढ़ता है, तब सरकार अपने विकल्पों पर गंभीरता से विचार करती है। फिलहाल सरकार आंदोलन की दिशा और उसके प्रभाव पर नजर बनाए हुए है।
तो क्या इस्तीफे की कोई संभावना है या मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा
विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार उठ रही है। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं, जिनमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल था। सरकार की ओर से नेतृत्व स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा का आश्वासन दिया गया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम फैसला संभावित राजनीतिक लाभ-हानि को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। यदि भविष्य में मंत्रिमंडल या संगठन में फेरबदल होता है तो राजनीतिक जानकारों के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कुछ संभावनाएं हो सकती हैं। उन्हें सरकार से संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है या शिक्षा मंत्रालय के बजाय किसी अन्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ऐसा पहले भी हो चुका है। उधर, दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए थे। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक, 21 से अधिक छात्रों की मौत की जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्रों पर हुई कार्रवाई के बाद न केवल विपक्ष बल्कि बॉलीवुड के कई दिग्गज भी सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में यह सवाल बार-बार उठा रहा है कि सरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों नहीं ले रही है।

